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जलियांवाला बाग: एक सफ़र शहीदों के नाम

jallianwala bagh tourism

Jallianwala Bagh Tourism: 13 april 1919 का दिन था सभी लोग काफी खुश थे और हो भी क्यूँ न बैसाखी जो थी और शायद इसी लिए अपने जश्न को दोगुना करने लोग दूर-दूर से पवित्र नगरी अमृतसर पहुँच रहे थे| क्रांतिकारियों ने ये फैसला लिया कि अब बहुत सह ली अंग्रेजो की गुलामी वैसे भी प्रथम विश्व युद्ध के बाद भारत को आजाद कर देने वाले फैसले से मुकड़ जाने के बाद लोगो के दिल में बहुत गुस्सा था और ऊपर से  Rowlatt Act के लागु कर दिए जाने के बाद विद्रोह चरम पर पहुँच चुकीं थी|

ऐसे में लोगो में फैले गुस्से को भापते हुए अँगरेज़ सरकार ने किसी भी तरह के मीटिंग्स अथवा सम्मलेन की मनाही दे रखी थी परन्तु उन आजाद पतंगों को क्या पता था की जिस खुशी से वे जलियांवाला बाग़ में आजादी एवं बैसाखी का उल्लास मनाने हेतु जमा हो रहे है वही पवित्रभूमि मात्र कुछ घंटो के भीतर ही एक सनकी पुलिस ऑफिसर के क्रूरता का बलि चढ़ शमशान में बदल जाएगी | निहत्थे बेकसूर लोगो के ऊपर लगभग 1700 राउंड की फायरिंग और 1000से भी ज्यादा बेकसूर की निर्मम हत्या की गवाह जलियांवाला बाग़ के दीवारो पर बुलेट के निशान एवं कुएं को देख आपका खून जरुर खौल उठेगा| आइये करते हैं एक सफ़र उन शहीदों के नाम जिनके खून से हमारे आज़ादी की किस्से लिखे गए|

Jallianwala Bagh Tourism

(1) दीवारों पर बुलेट मार्क्स: बेकसूर लोगो के ऊपर जनरल डायर की क्रूरता की निशानी आज भी आपको देखने को मिल जाएगीं| दीवारों पर बुलेट से हुए छेद से यह अनुमान आसानी से लगाया जा सकता हैं कि वो तबाही का मंजर कैसा होगा|

jallianwala bagh

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(2) शहीद स्मारक: जलियांवाला बाग़ में ख़ुशी मनाने एवं रौलेट एक्ट का विरोध करने हेतु जमा हुए भीड़ पर अंधाधुंध गोलियों की बौछारें एवं जान बचाते कुए में कूदते महिलाओं बच्चों के नमन में बनी शहीद स्मारक जलियांवाला बाग़ का मुख्य आकर्षण हैं|

sahid smarak jallianwala bagh

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(3) अमर ज्योति: भारत माँ के उन लालों के नमन हेतु इंडियन आयल के सौजन्य से जलती अमर ज्योति को देख आँखों में आंसू आ जाना लाजमी हैं|

amar jyoti jallianwala bagh

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(4) शहीद उधम सिंह की अस्थियां:  कभी खुद जलियांवाला बाग़ नरसंहार का गवाह बने उधम सिंह जी ने यह फैसला लिया था कि चाहे कुछ भी हो जाये वो जनरल डायर को उनके किये की सजा अवस्य देंगे| ऐसे में लन्दन जाकर उन्होंने डायर को मौत के घाट उतारा था| भारत सरकार के अथक प्रयास के बाद उनके अस्थियों को  सन 1974 में वापस स्वदेश ला जलियांवाला बाग़ में स्थापित किया गया|

 

udham singh ash jallianwala bagh

udham singh ash jallianwala bagh

(5) सुन्दर कलाकृतियों से सुसज्जित बाग़: जलियांवाला बाग़ के भीतर काफी सुन्दर कलाकृतियों से उस नरसंहार को दिखने की कोशिश की गयी हैं ताकि आप उन शहीदों के दर्द को और भी अच्छी तरह से समझ एवं महसूस कर सके|

 

jallianwala bagh garden

jallianwala bagh garden

Entry Timing for Jallianwala Bagh:  All days of the week: 6:30 AM – 7:30 PM

Entry Fees for Jallianwala Bagh: जलियांवाला बाग़ में एंट्री के लिए आपको कोई शुल्क चुकाने की जरुरत नहीं होती| यहाँ प्रवेश निशुल्क हैं|

How to Reach Jallianwala Bagh: जलियांवाला बाग़ स्वर्ण मंदिर के ठीक सामने है जहाँ के लिए आपको अमृतसर स्टेशन से 10 रूपए प्रति सवारी के दर से ऑटो रिक्शा आसानी से मिल जाएगी|

यदि आप भी Jallianwala Bagh Tourism से सम्बंधित किसी तरह की जानकारी हमारे साथ साँझा करना चाहते हैं तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स पर अवस्य कमेंट करे|

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Shivani A

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