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फेसबुक के फ्री बेसिक को ज़ोर का झटका धीरे से

save the internet won over free basic

नई दिल्ली : फेसबुक (Facebook) के बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट फ्री बेसिक को आज उस वक्त मुह का खाना पड़ा जब ट्राई ने जारी किये स्टेटमेंट में कहा कि भारत में इंटरनेट डेटा के लिए अलग अलग प्राइसिंग नहीं हो सकती। अगर नेट न्यूट्रैलिटी से जुड़े नियमों को कोई सर्विस प्रोवाइडर तोड़ता है तो उसे 50 हजार रुपए रोज के हिसाब से हर्जाना देना होगा।

गौरतलब है की फ्री बेसिक के सपोर्ट में कई सारी भारतीय टेलिकॉम कंपनीज कैंपेन कर रही थी जैसे एयरटेल, रिलायंस इत्यादि|

क्या था फ्री बेसिक :

  • फ्री बेसिक के जरिये को कोई भी यूजर अपने एंड्रॉइड स्मार्टफोन से इन्टरनेट एक्सेस कर सकता था। ( सिर्फ लिमिटेड सर्विस के लिए )
  • फेसबुक ने पहले इंटरनेट डॉट ओआरजी ऑफिशियली शुरू किया था लेकिन कई एक्सपर्ट्स ने इंडिया में इसे नेट न्यूट्रैलिटी के खिलाफ बताया था बाद में इसका नाम बदल कर फ्री बेसिक्स रख दिया गया |
  • पहले चरण में यह सर्विस तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गोवा, आंध्र प्रदेश, गुजरात, केरल और तेलंगाना के यूजर्स के लिए लॉन्च की गई थी।
  • कोई भी मोबाइल यूजर्स फेसबुक की फ्री बेसिक्स ऐप के जरिए फेसबुक, न्यूज, क्रिकेट, जॉब्स, ट्रेन, फ्लाइट्स शेडयूल, हेल्थ, एस्ट्रोलॉजी, ओएलएक्स जैसी सीमित साइट्स और एप्स को फ्री में एक्सेस कर सकता था। यूजर्स को इनका इंटरनेट चार्ज भी नहीं देना पड़ता।
  •  फ्री बेसिक के खिलाफ़ दायर किये गए PIL पे आनन फ़ानन में ट्राई ने दिसंबर में रिलायंस ने फ्री बेसिक्स को होल्ड पर रख दिया था।
  • फ्री बेसिक के सपोर्ट के लिए फेसबुक ने करोड़ों रुपए इसके प्रचार प्रसार में लुटाये |

कम्युनिकेशन को बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे एजुकेशन, हेल्थ और जॉब में बहुत मदद मिलेगी।- मार्क जुकरबर्ग (फेसबुक संस्थापक)

ट्राई द्वारा जारी किये गए फाइनल रिपोर्ट में ये बातें मुख्य रही :

1. ट्राई के चेयरमैन राम सेवक द्वारा जारी किये गए एक बयान में उन्होंने बताया की – “सर्विस प्रोवाइडर अलग-अलग कंटेंट के लिए डिफरेंट टैरिफ नहीं बना सकते। इस बारे में आज नोटिफिकेशन भी जारी किया गया है जो तुरंत लागू हो गया है।’

2. अगर कोई टेलिकॉम कम्पनी अलग-अलग टैरिफ लाता है, तो ट्राई उसे ट्रैरिफ वापस लेने के ऑर्डर दे सकता है। यदि कोई सर्विस प्रोवाइडर नियमों को तोड़ता है तो उसे हर दिन के 50 हजार रुपए देना होगा।

3. ‘कोई भी सर्विस प्रोवाइडजर ऐसा कोई कॉन्ट्रैक्ट या एग्रीमेंट नहीं कर पाएगा जो भेदभाव वाले डाटा टैरिफ को प्रमोट करता हो।’

4. ‘ट्राई के नोटि‍फि‍केशन के मुताबिक, केवल इमरजेंसी सर्वि‍स या पब्लिक सर्वि‍स के लि‍ए डाटा टैरि‍फ में छूट दी जा सकती है।’

5. ‘ट्राई दो साल या उससे पहले इस नई पॉलिसी का रिव्यू कर सकता है।’

source :  Save The Internet, All India Bakchod

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Tredinghour

THNN (Trendinghour News Network).

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