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कुछ बातें नेताजी के बारे में शायद आप नहीं जानतें हों

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस

नेताजी पढाई में इतने तेज थे की इस बात का अंदाजा आप उनके सिविल सर्विसेज इम्तिहान में आये चौथी रैंक से लगा सकते हैं|

netaji subhash chandra bose

Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी 1921 से लेकर 1941 के बीच लगभग 11 बार जेल जा चुके थे|

कुछ इतिहासकारों का कहना है कि जब नेता जी ने जापान और जर्मनी से मदद लेने की कोशिश की थी तो अंग्रेजी हुकूमत ने अपने ख़ुफ़िया एजेंटों को 1941 में उन्हें ख़त्म करने का आदेश दिया था।\

netaji subhash chandra bose with mahatama gandhi

Netaji Subhash Chandra Bose with Mahatama Gandhi

नेताजी का वो दिया हुआ नारा कौन भूल सकता है “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा” और “जय हिन्द”

Netaji with Hitlar

इनमे कोई सक नहीं की जापान सरकार से नेताजी को काफी सहयोग मिला, जापान के सहयोग से ही उन्होंने आजाद हिन्द फौज की अस्थापना की थी |

जापान में आज भी नेताजी को बहुत आदर मिलता है हाल ही में जापान के प्रधान मंत्री शिंजो अबे नेताजी मेमोरियल हॉल देखने कलकत्ता आये थे|

Netaji Subhash Chandra Bose with Azad Hind Foj

Netaji Subhash Chandra Bose with Azad Hind Foj

ऑस्ट्रिया मूल के एमिली शेंक्ल से उन्होंने शादी किया उनकी एक बेटी अनीता बोस जो की एक जर्मनी की बहुत ही सफल अर्थशास्त्री है|

सन् 1934 में जब सुभाष चन्द्र बोस ऑस्ट्रिया में अपना इलाज कराने हेतु रुके हुए थे उस समय उन्हें अपनी पुस्तक लिखने हेतु एक अंग्रेजी जानने वाले टाइपिस्ट की आवश्यकता हुई। उनके एक मित्र ने एमिली शेंकल नाम की एक ऑस्ट्रियन महिला से उनकी मुलाकात करा दी। एमिली के पिता एक प्रसिद्ध पशु चिकित्सक थे। नेताजी एमिली की ओर आकर्षित हुए और उन दोनों में स्वाभाविक प्रेम हो गया। उन्होंने सन् 1942 में बाड गास्टिन नामक स्थान पर हिन्दू पद्धति से विवाह रचा लिया। वियेना में एमिली ने एक पुत्री को जन्म दिया। सुभाष ने उसे पहली बार तब देखा जब वह मुश्किल से चार सप्ताह की थी। नेताजी ने उसका नाम

अनिता बोस

रखा था। अगस्त 1945 में ताइवान में हुई तथाकथित विमान दुर्घटना में जब सुभाष की मौत हुई, अनिता पौने तीन साल की थी। अनिता अभी जीवित है। उसका नाम अनिता बोस फाफ  है। अपने पिता के परिवार जनों से मिलने अनिता फाफ कभी-कभी भारत भी आती है।

 

नेताजी के बारे में जितना जानने की कोशिश कोजिये उतना ही कम है, वे हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी दी हुई सिद्धांतों को हमें हमेशा याद रखनी चाहिए| जय हिन्द!!!

फोटो साभार : ट्विट्टर, डेली मेल

 

 

 

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