पीरियड्स में आई असामनता को दूर करेगा मुद्रासन योग

क्या आपको पता है कि Mudrasan Yoga से आप अपने पीरियड्स में आई असमानताओं को रोक सकती हैं| जी हाँ..अमूमन महीने के एक निश्चित पखवारे में होने वाले मासिक धर्म के बारे में लोगों के बीच काफी गलत फैमियां फैली हैं | बात चाहे पीरियड्स में आई अनियमितता से हो या फिर मासिक चक्र के दौरान हो रहे असहनीय दर्द से, हर मौके में हमारी लाज एवं लोगों से शेयर न कर पाने के मलाल के बीच हम अक्सर किसी बड़ी समस्या को दावत दे बैठते हैं |

ऐसे में Mudrasan yoga पीरियड्स सम्बंधित आपकी सारी समस्याओं को दूर कर आपके भीतर एक नयी उर्जा का संचार कर सकता है.. इस आसन को तीन तरह से किया जा सकता है | आइए  डालते हैं एक नजर..

Mudrasan Yoga कैसे करें:

पहली विधि..

  • सबसे पहले पद्मासन की अवस्था में आ जाये तथा दाये हाथ की हथेली को पहले नाभि पर रखें तथा फिर बाये हाथ की हथेली दाये हाथ पर रखें | अब श्वास बाहर निकालते हुए आगे झुक कर ठोड़ी भूमि पर लगा दें | अब श्वास अन्दर भरते हुए वापस आये |

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दूसरी विधि..

  • पदाम्सन में ही बैठते हुए दोनों हाथों को पीठ के पीछे ले जाये, दाये हाथ से बाये हाथ की कलाई को पकडे | अब श्वास बाहर छोड़ते हुए ठोड़ी स्पर्स करें तथा दृष्टि को समान बनाये रखें |

तीसरी विधि..

  • किसी नर्म चादर पर पीठ के बल शवासन की अवस्था में लेट जाये | अब श्वास अन्दर लेते हुए धीरे-धीरे पैरों को ऊपर उठाये | अब कमर के भाग को भी ऊपर उठाये | दोनों हाथों की हथेलियों से कमर को सहारा दें |

Mudrasan Yoga के फायदे(Mudrasan Yoga Benifits):

(1) इस आसन के नियमित अभ्यास से पीरियड्स सम्बंधित सारे विकार दूर होते हैं | साथ ही पैंक्रियास को सक्रिय कर ये आसन मधुमेह संबंधित परेशानियों पर रोक लगाते हैं |

(2) इस आसन से सम्पूर्ण शरीर में रक्त स्त्राव की समस्या दूर होती है | ऐसे में शरीर में एक नयी उर्जा का संचार होता है | तनाव, थकान एवं अनिंद्रा सम्बंधित समस्याओं में राहत मिलती है |

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(3) ये आसन पेट एवं पीठ के लिए काफी लाभदायक होता है | कब्ज, अपचन एवं एसिडिटी  दूर करने में काफी सहायक होता है |

Mudrasan Yoga करते वक़्त बरते ये सावधानी..

जो लोग नेत्र, कमर दर्द अथवा ह्रदय रोग सम्बंधित समस्या से जूझ रहे हैं | उनसे हमारा निवेदन है कि कृपया कर इस आसन का अभ्यास न करें |

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मुद्रासन योग
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