राजा और बाज़

एक दिन, राजा चंगेज़ खान अपने मित्रो के साथ शिकार के लिए जंगल में गया |  उन सभी के हाथ में धनुष-बाण थे और चेहरे पे प्रसन्नता! “ आज पुरे दिन शिकार करेंगे |” राजा ने कहा | राजा के कंधे पे बैठा था, उसका पुराना और प्रिय साथी, बाज़ | उन दिनों राजा बाज़ को शिकार करने का प्रशिक्षण देते थे | जब भी राजा और उसके साथी शिकार के लिए जाते, बाज़ ऊपर उड़कर अपनी पैनी नज़र से देख लेता था की शिकार कहाँ छिपे हुए हैं ? उस दिन चंगेज़ खान और उसके शिकारी मित्र पुरे दिन घूमते रहे, लेकिन कहीं कोई शिकार नहीं मिला | शाम को घर लौटते समय राजा ने अपने मित्रो से कहा,” तुम लोग इस रास्ते जाओ,मैं दुसरे रास्ते से आऊंगा |”वह रास्ते पहाड़ो से बीच होकर जाता था | उस रास्ते पे उसने एक झरना भी देखा था | पूरा दिन घुमने के बाद राजा को गर्मी के कारन प्यास लग रही थी | वह अपने घोड़े पर बैठकर घीरे-धीरे उस झरने की ओर जाने लगा | कुछ दूर झरने से बूँद-बूँद पानी आ रहा था |

वह घोड़े से उतरा और अपना चांदी का कटोरा निकाल कर उसमे झरने का पानी भरने लगा |पानी का बहाव बहुत कम था, जिससे कटोरे में पानी जल्दी नहीं भर रहा था | काफी देर बाद जब कटोरा भर गया, तो राजा पानी  पीने के लिए उसे मुह के पास ले गया | वह पानी पीने ही वाला था की बाज़ ने झपट्टा मारा और कटोरा नीचे गिरा दिया | बाज़ राजा के आगे-पीछे मंडराता रहा | राजा हैरान हुआ की बाज़ ने ऐसा क्यों किया ? परन्तु बाज़ उसे बहुत प्रिय था,इसीलिए फिर से कटोरे में पानी भरने लगा | बूँद-बूँद पानी से कटोरा भरने में समय लग रहा था | राजा प्यास से अधमरा हुआ जा रहा था | कटोरा आधा ही भरा था की राजा ने उठाकर पानी पीना चाहा | जैसे ही वह कटोरा मुह के पास ले गया,तभी बाज़ तेज़ी से उड़ता हुआ आया और कटोरा फिर से नीचे गिरा दिया |

अब तो राजा को बहुत गुस्सा आया | पहले से ही राजा इतना परेशान था| पुरे दिन कोई शिकार नहीं मिला, ऊपर से इतनी गर्मी और अब उसका अपना प्रिय बाज़उससे शरारत कर रहा था | जब भी वह पानी पीने लगता, बाज़ आकर कटोरे को गिरा देता |

बाज़ ने तीसरी बार जब राजा का पानी गिरा दिया तो राजा आग बबूला हो गया | मेरा प्रिय और पालतू बाज़, आज इसे क्या हो गया है | राजा की थकावट और परेशानी बढती ही जा रही थी | क्रोध से उसका मुह लाल हो गया | वह सोचने लगा की इसने मेरा पानी तीन बार गिरा दिया, अगर अब इसने ऐसा किया तो इसे जान से मार दूँगा | उसने एक बार फिर कटोरा झरने के बूँद-बूँद टपकते पानी के नीचे रखा,”कब पानी भरे और वह अपनी प्यास बुझाये |

चंगेज़ कान अब बाज़ के हमले के लिए पहले से ही तैयार था | उसने एक हाथ अपनी तलवार पर रख लिया | “ अब यदि बाज़ पानी गिराने नीचे उतरेगा, तो मैं उसका गला ही काट दूँगा “ राजा क्रोध से मन ही मन बोला | जैसे ही कटोरा में पानी भरा, बाज़ एक बार फि फड़फड़ाता हुआ हवा की गति से नीचे आया| इधर राजा पहले से ही तयार था | इससे पहले की बाज़ उस पर झपटता चंगेज़ खान ने उसे अपनी तलवार से काट डाला | खून से लतपथ बाज़ ज़मीन पर गिर पड़ा| “ तुम इसी मौत के योग्य थे “ राजा ने क्रोध से फुफकारते हुए कहा |

बाज़ को मारने के बाद राजा ने देखा की उसका कटोरा उसी के पैरों के नीचे आकर पिचक गया, जो अब पानी भरने लायक नही रहा | राजा के क्रोध की कोई सीमा नहीं थी | बाज़ के कारन ही राजा का कटोरा पिचका था और राजा उसमें पानी भरकर नहीं पी सकता था |

राजा गुस्से में बडबडाया,” मैं ऊपर, जहाँ से यह पानी आ रहा है, जाकर पीता हूँ |” ऐसा विचारकर राजा ऊपर चढ़ने लगा | राजा जितना ऊपर चढ़ता, प्यास उतनी ही बढती जाती | राजा का क्रोध बाज़ पर बढ़ता ही जा रहा था |

“ आज बाज़ के कारन मै इतनी कठिनाई में हूँ |” राजा मन ही मन भुनभुनाता जा रहा था | चंगेज़ खान ऊपर पंहुचा गया | पानी एक तालाब से आ रहा था | उसे तालाब में को चीज़ तैरती हुए दिखाई दी | पास जाकर देखा तो वह एक जहरीला साँप मारा हुआ था | उसे देख कर राजा सन्न रह गया | तो यह कारण था, बाज़ के ऐसे व्यवहार का | मेरा वफ़ादार बाज़ मेरा हितैषी था | मेरे प्राणों की रक्षा के लिए मुझे एस झरने का पानी नहीं पीने दे रहा था | यह कहता हुआ राजा बहुत देर तक रोया और बोला,” आज मैंने अपने प्यारे बाज़ के प्राण ले लिए | मेरे दोस्त ! हो सके तो मुझे माफ़ कर देना |”

“ बाज़ ने मेरे प्राण बचाए और मैंने उसे ही मार दिया” राजा के दुःख को कोई सीमा न थी | उसकी आँखों से टप-टप आँसू गिरने लगे | वह भरी कदमो से नीचे उतरा | पश्चाताप-भरी नम आँखों से उसने अपने बाज़ को उठाया और भर्राई आवाज़ में बोला,” मेरे प्यारे मित्र ! तुमने तो अपनी वफादारी दिखा दी पराने मैंने तुम्हारे साथ जो किया उसके लिए मैं अपनी अंतिम साँस तक स्वयं को माफ़ नहीं कर सकूँगा | यह सब केवल मेरे गुस्से के कारण हुआ |” यह कहते हुए उसने बाज़ को अपने गोद में रख लिया और अपने आप से एक वादा किया,” आज इस घटना से मैंने एक बहुत बड़ी शिक्षा ली है की मैं क्रोध में आकर कभी कोई कार्य नहीं करूँगा |”

 

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