मुकुल की दादी

महारास्ट्र केऔरंगाबाद में भयंकर गर्मी पद रही थी | सारा शहर गर्मी से परेशान था |

सभी लोग आकाश में काले बादलों का इंतज़ार कर रहे थे | इधर गोकुल पाटिल के घर से कुछ आवज़े सुनाई देने लगीं | उनकी बुजुर्ग माताजी ज़ोर-ज़ोर से अपने बेटे को पुकार रही थी, परन्तु पाटिल जी तो आराम से अख़बार पढ़ने में व्यस्त थे | तभी उनका 12 साल का बेटा मुकुल दादी की आवाज़ सुनकर दौड़कर आया और बोला, “ दादी ! आपको क्या चाहिए |” दादी का मन मुकुल की मीठी-मीठी आवाज़ सुनकर ही खुस हो गया | दादी ने प्यार से कहा, “ बेटा ठंडा पानी पिला दे |” मुकुल ने दादी को पानी पिलाकर कहा, “ आप आराम करो,मुझे कार्ड बनाने हैं |” दादी ने हैरानी से पूछा, “ तुम कार्ड क्यों बना रहे हो? क्या तुम्हारा स्कूल का सारा काम पूरा हो गया? अगर नहीं हुआ तो पूरा कर लो |”

तभी मुकुल की मम्मी रसोईघर से बहार आकर बोली, “ माँ जी! आप इसको बिगाड़ रही हो, इस बार-बार मत बुलाया करो, पढाई करने दो | यह आपकी वजह से ही कुछ काम नहीं करता |” इतना कहती हुई वह मुकुल का कान पकड़कर कमरे से बाहर ले जाती हुई बोली- “ ये सारे कागज़ के कचरे के डिब्बे में डालो |कितनी बार कहा है, कागज़ काटकर मत बिखेरा करो | घर में कितना कचरा बिखेर दिया है |” यह बोलकर वह गुस्से से रसोईघर में चली गई |

मुकुल के पापा भी बोले , “ मुकुल पढाई में ध्यान दो, सारा गृहकार्य कर लो | मैं तुम्हेँ घुमाने ले जाऊँगा |” मुकुल ने अपना सारा गृहकार्य करके दो सुन्दर कार्ड भी बनाए | मुकुल चुपचाप, मन ही मन मुस्कुराता हुआ अपनी दादी के कमरे में गया | अपनी छोटी-छोटी हथेलियों से दादी की आखें बन्द करता हुआ बोला , “ दादी पहेचान कौन?” दादी ने खुस होकर, उसे प्यार से छुआ और बोली, “ मेरा छोटा-सा कन्हैया है |”

मुकुल बोला,” दादीजी ! मेरी अध्यापिका ने भी कहा था कि हमें सबको ख़ुशी देनी चाहिए | जीवन में हर इंसान महत्वपूर्ण है | परिवार के सदस्यों की ख़ुशी के साथ-साथ रिश्तेदारों का भी हमें सम्मान करना चाहिए | प्यार बाटने से ही प्यार मिलता है | दादी खुश होकर बोली, “ क्या बना रहा था ? जो तुझे इतनी डाट पड़ी |” मुकुल ने कार्ड दिखाया जिस पर लिखा था , “ जन्मदिन मुबारक हो दादी |” जन्मदिन की बात उनके बेटे और बहु को भी याद नहीं थी, पर पोते को याद थी | यह जानकार उनकी आखो में आसू आ गए | उन्होंने प्यार से मुकुल को गले लगा लिया और ढेर सारा आशीर्वाद दिया | मुकुल के मम्मी-पापा , दादी-पोते के बीच प्यार का दृश्य देख रहे थे | उन्हें भी अपनी भूल का एहसास हो गया | दोनों उनके पास आ गए |

मम्मी-पापा को अपनी ओर आता देखकर मुकुल ने जल्दी से अपने हाथो से कानो को ढक लिया | उसे लगा की अब उसकी पिटाई होने वाली है | जब उसने सब कुछ ठीक-ठीक देखा तो धीरे से एक कार्ड अपने मम्मी-पापा की ओर बढ़ा दिया , जिसमे लिखा था – “ मुझे माफ़ कर दीजिये मम्मी-पापा जी !” कार्ड पढ़कर मम्मी-पापा ने भी उसको सिने से लगा लिया और उसे खूब प्यार किया | दोनों ने कहा, “ तुम अपने बड़ो का सम्मान इसी तरह करते रहना |

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Mukul Ki Dadi
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महारास्ट्र केऔरंगाबाद में भयंकर गर्मी पद रही थी | सारा शहर गर्मी से परेशान था | सभी लोग आकाश में काले बादलों का इंतज़ार कर रहे थे | इधर गोकुल पाटिल के घर से कुछ आवज़े सुनाई देने लगीं |
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