दृढ संकल्प का दूसरा पर्याय – अब्राहम लिंकन

बहुत पहले की बात है, डियाना ( अमेरिका ) के एक गाँव में टामस लिंकन नाम का एक मजदूर रहता था | अब्राहम लिंकन उसी मजदूर के पुत्र थे | एक गरीब मजदूर की संतान होकर भी अब्राहम विद्या-प्रेमी थे और पुस्तके पढने के शौक़ीन भी | वे अच्छी-अच्छी पुस्तके खोज-खोजकर पढ़ते थे | जब कभी वे बीमार पद जाते तो अपनी बहन से पुस्तके पढ़वाकर सुनते थे | वे इनाम या उपहार में भी रुपैये-पैसे के बदले पुस्तके लेना ही पसंद करते थे |

एक दिन अब्राहम लिंकन ने अपने अध्यापक क्राफर्ड के पास अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन की जीवनी देखी | उसने वह पुस्तक उनसे पढने के लिए मांगी | क्राफर्ड महोदय सोच में पद गए | फिर कुछ सोचकर बोले, “ देखो अब्राहम ! मई किसी को अपनी पुस्तके नहीं देता, लेकिन तुम्हारे पुस्तक-प्रेम के कारण, तुम्हे दे रहा हूँ| इसे जरा सावधानी से रखना, फटे नहीं और न ही खोए |”

“ जी नहीं, फटना और खोना तो दूर, अगर कही द्दग-धब्बा भी लग जाए तो आप मुझे चाहे जो सज़ा दीजयेगा | बहुत जल्दी लौटा दूँगा |” अब्राहम ने जवाब दिया और पुस्तक लेकर आनंद से उछलते-कूदते घर चले गए |

सर्दियों की रार थी | माता-पिता अँगीठी के पास बैठे आग ताप रहे थे | अब्राहम भी उन्ही के पास बैठ पढने लगे | कई घंटे बीते | सब सो गए | अब्राहम अपनी पुस्तक में ही खोए रहे | बीच-बीच में कई बार पिता की आँख खुली और उन्होंने अब्राहम को सोने के लिए कहा | अंत में पिता की डांट भी सुननी पड़ी | मन मरकर अब्राहम ने पुस्तक खिड़की पर राखी और बिस्तर पर लेट गए | पढ़ी हुई बातें सोचते-सोचते न जाने उन्हें कब नींद आ गई |

सवेरे पुस्तक पढने के विचार से वह सबसे पहले उठे और खिड़की के पास पहुँचे | लेकिन वहां जो कुछ उन्होंने देखा, उसे देखकर उनका दिल धक् से रह गया | रात में वर्षा हुई थी | पानी की बौछारों से पुस्तक पूरी तरह गीली हो गई थी | उसके कुछ पृष्ठ फट और गल गए थे | बालक अब्राहम को काटो तो खून नहीं | उनके कानो में क्राफर्ड महोदय के शब्द गूँजने लगे | अब क्या उत्तर देंगे उन्हें? परन्तु बैठने से तो काम चलेगा नहीं | अब्राहम उसो समय पुस्तक लेकर क्राफर्ड महोदय के पास पहुँचे | उनकी आखों में आँसू भरे थे | सिर ग्लानी से झुका था | क्राफर्ड महोदय पुस्तक देखते ही बरस पड़े,” आखिर तुमने अपनी लापरवाही से इतनी सुन्दर और मूल्यवान पुस्तक नष्ट कर ही डाली | इसीलिए मई अपनी पुस्तके किसी को नहीं देता |”

“आँखें नीची किये अब्राहम ने कहा,” क्या कहूँ ! पुस्तक मैंने खिड़की पे रख दी थी | रात को अचानक पानी बरसा और पुस्तक भीग गई | इस अपराध के लिए मै दुखी हूँ |”

“लज्जित या दुखी होने से काम नहीं चलेगा, तुम्हे मेरी पुस्तक की कीमत चुकानी होगी | मैं कोई लखपति नहीं हूँ, समझे |” क्राफर्ड ने कहा |

“मेरे पास पैसे तो नहीं हैं|” अब्राहम बोले |

क्राफर्ड ने तेज़ स्वर में कहा,” पैसे नहीं तो क्या हुआ ? हाथ-पैर तो हैं |”

“बताइए फिर मई क्या करूँ?” अब्राहम ने असहाय स्वर में कहा |

“ पुस्तक यहाँ रख दो और तीन दिन तक मेरे खेत में घास काटो | बस, मई समझ लूँगा की मेरी पुस्तक का मूल्य वसूल हो गया | उसके बाद पुस्तक भी तुम्हारी हो जाएगी|” क्राफर्ड महोदय ने अब्राहम से कहा |

अब्राहम के हृदय पे राखी हुए चट्टान हट गई | वह प्रस्न्नातापुर्वाक तीन दिन तक क्राफर्ड महोदय के खेत में घास काटते रहे | चौथे दिन उस पुस्तक को अपने हाथ में लिए घर आकर अब्राहम ने अपनी बहन से कहा,”घास कटनी पड़ी तो क्या हुआ? पुस्तक तो अपनी हो गई|”

आगे चलकर यही बालक अमेरिका का राष्ट्रपति बना और अमेरिका को दास-प्रथा को दूर किया|

इस कहानी में अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के बचपन में घटी एक घंटा का वर्णन है जिससे उनका पुस्तक प्रेम उजागर होता है | दृढ इच्छाशक्ति किसी भी कार्य में आई बाधाओ को हटा देती है |

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THNN (Trendinghour News Network).

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