हिरन और कौवा – एक सच्चे मित्र की कहानी

उत्तराखंड के एक घने जंगले में बहुत से जानवर रहते थे | उसी जंगले में कौवा तथा हिरन के दो मित्र भी रहते थे | कौवा हिरन से बहुत प्रेम करता था |  दोनों मित्र मुसीबत में फसे जानवरों की मदद भी किया करते थे, इसीलिए जंगले के सरे जानवर उन दोनों को बहुत सम्मान देते थे |

हिरन प्रतिदिन हरी घास खाने जाता था | एक दिन एक सियार की नज़र हिरन पर पड़ी | सिया ने मन ही मन सोचा, “ कितना मोटा-ताज़ा हिरन है? काश ! इश्क माँस खाने को मिल जाए |” सियार हिरन को मारकर खाने की योजना बनाने में जुट गया | सियार हिं के पास जाकर बोला,”हिरन ! तुम बहुत सुन्दर हो | मैं तुम्हारा दोस्त बनाना चाहता हू |” हिरन बहुत भोला था | उसने सियार को अपना मित्र मान लिया |

एक दिन सियार ने हिरन से कहा, “मित्र जंगले के दुसरे कोने में एक खेत है, जहां बहुत साडी हरी घास है, चलो वहा चलते हैं | हिरन ने सोचा, “ कोमल हरी घास खाने को मिलेगी तो सियार के साथ जाने में क्या नुकसान है?” वह सियार के साथ चला गया | रास्ते में एक शिकारी की नज़र हिरन पर पड़ गई | वह भी हिरन को मारने की योजना बनाने लगा |

सियार ने अगले दिन भी हिरन को उसी जगह चलने को कहा | इस पर कौवा बोला,” मित्र ! बार-बार लालच मत करो, कहीं मुसीबत में न फस जाना | लालच बुरी बला है |” लेकिन हिरन को हरी घास का लालच वहीं खीचकर ले गया जहाँ शिकारी ने अपना जाल फैला रखा था | हिरन जाल से अनजान था | वह अनजाने में उस जाल में फस गया और सियार से प्रार्थना करने लगा,” मित्र मेरी सहायता करो, मई जीना चाहता हू |” किन्तु दुस्ट सियार दूर बैठा मुस्कुराता रहा और इंतेज़ार करने लगा की कब शिकारी आकर, हिरन को मारकर उसकी खाल निकाले,और कब उसे हिरन का मॉस खाने को मिले |

हिरन निराश होकर रोता रहा, और पछताता रहा –“ काश ! अपने सच्चे मित्र कौवे की बात मानी होती, तो आज यह मुसीबत नहीं आती |” पर जब बुरा समय आता है तो बुध्दि अच्छे-बुरे को समझ नहीं पाती | कहा भी गया है-‘ जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है|’

शाम को जब कौवे ने देखा की हिरन अभी तक वापस नहीं आया है, तो वह सारे जंगले में उसे ढूढ़ता रहा |खोजते-खोजते उसने हिरन को जाल में फसा हुआ देखा |

कौवे को आता देखकर हिरन ने कहा,” कौवे भाई ! मुझे किसी तरह बचा लो |” कौवे ने कहा, ठीक है, जैसा मैं कहू, तुम वैसा ही करना |”

कौवे ने उसे सारी योजना समझाते हुए कहा, “ जब शिकारी आए तो तुम ऐसे लेटे रहना जैसे मर गए हो | शिकारी जब जाल

उठाएगा तब मैं ज़ोर- ज़ोर से कॉव-कॉव करूँगा | मेरी आवाज़ सुनकर तुम तुरन्त भाग जाना |”

सुबह शिकारी को आता देखकर हिरन ऐसे लेटा जैसे मर गया हो | शिकारी ने हिरन को मारा हुआ समझा और निश्चिंत होकर जाल समेटने लगा | कौवा ज़ोर-ज़ोर से कॉव-कॉव चिल्लाया | उसकी आवाज़ सुनकर हिरन भाग खड़ा हुआ | हिरन को भागते हुआ देखकर शिकारी ने उसे मारने के लिए पूरी ताकत से डंडा फेका | भाग्य की बात, डंडा उस सियार को लगा जो हिरन की मौत का इंतज़ार कर रहा था | डंडा लगते ही सियार वही मर गया | हिरन और कौवा फिरसुख से रहने लगे |

 

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