देश रत्न- एक सच्चा देश भक्त

चम्बल नदी का हरा- भरा अति सुन्दर किनारा और उसके निकट आम के बागों के बीच एक छोटा- सा खुबसूरत गाँव-रामपुर | वहीं आम के बाग में एक पुराना सा स्कूल | स्वतंत्रता-दिवस के ठीक एक दिन पहले वहां देश भक्ति का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमे चौथी कछा का एक विधार्थी ’देश रत्न’ अत्यंत जोश एवं आत्म-विश्वास के साथ एक कविता सुना रहा था –

माँ ! मुझको बंदूक मँगा दे, मई भी लड़ने जाऊँगा,

  सीमा पर आए दुश्मन को, मई भी मार गिराऊंगा | “

नौ साल के इस बालक की कविता सुनकर वहा के मुख्य अतिथि कृष्णानंद सागर का दिल प्रसन्न हो गया | कविता समाप्त होते ही उपस्थित छात्र, मुख्य अतिथि एवं अन्य श्रोताओं की तालियों से वातावरण गूंज उठा | कार्यक्रम के समाप्त होने पर बालक को प्रथम पुरुस्कार के रूप में ‘ भगत सिंह की वीरता ‘ नाम की पुस्तक भेट की गई | इस पुस्तक को पाकर बालक को ऐसे लगा जैसे वह भी  देश का बहादुर सैनिक बन चुका है | इस पुष्तक ने बालक देश रत्न का जीवन ही बदल दिया |

सोते-जागते, उठते-बैठते उसे देश की सीमाए, देश का गौरव, बहादुर सैनिक और गर्व से लहराता हुआ तिरंगा आदि नज़र आने लगे | देशभक्ति की भावना उसकी रग-रग में समा गई |

यह वही बालक था,जिसका पिता चम्बल के बीहड़ो का भयंकर डाकू था | जिसके कारन वह दिन-रात अपने घर में बंदूकधारियो को आते-जाते देखता | उनके साथ रहकर भी उन्ही की तरह बाते तथा अभिनय करने लगा था | उसकी माँ सदैव चिंतित रहती , “ कही मेरे पति की तरह, मेरा एकलौता पुत्र भी डाकू न बन जाए |” वह उसके अंधकारमय भविष्य की कल्पना करके काप उठती थी | देश रत्न अपने साथ के बच्चो को मारता- पिटता, शैतानी करता तथा किसी की भी कोई बात नहीं मानता था | आस-पड़ोस के लोग उसकी माँ पर ताने कसते- “ चूहों की जाये,बिल ही खोदेंगे|” रामेश्वरी ऐसे ताने सुनकर शर्म और अनहोनी की आशंका से दर जाती थी |

एक दिन की बात है,एक शिक्षक गंगाशरण जी बालक देशरत्न के घर के सामने से गुजर रहे थे | उन्होंने देखा, देशरत्न छोटे-छोटे बालको के साथ मार-पीट कर रहा है | उन्होंने देशरत्न को अपने पास बुलाकर उससे पूछा,-“ पढ़ते हो ?”

नहीं”- देशरत्न ने उत्तर दिया |

क्यों नहीं”? – गंगाशरण जी ने पूछा |

दददू पढने ही नहीं भेजते “ | देशरत्न ने कहा |

शिक्षक गंगाशरण जी उस बालक के साथ उसकी माँ रामेश्वरी के पास गए और उसकी अनुमति लेकर उस नटखट बालक को स्कूल में ले आए | उन्होंने देशरत्न का स्कूल में नाम लिखवाया | गुरुदेव गंगाशरण जी की अनुभवी नज़र ने देशरत्न के जीवन की दशा एवं दिशा दोनों ही बदल दी | सफलताए परिश्रमी व्यक्ति के पीछे-पीछे दौड़ती है | ऐसा ही देशरत्न के साथ भी हुआ | वह पढ़-लिखकर सेना में सेकंड लेफ्टिनेंट बन गया | केवल कुछ वर्षो में अपने साहस व परिश्रम से वह कप्तान भी बन गया |

अचानक देश की सीमाओ पर युद्ध छिड गया | बहादुर कप्तान देशरत्न को एक सैन्य टुकड़ी के साथ सीमा पर अग्रिम मोर्चे पर तैनात किया गया | सेना की टुकड़ी को सीमा पर छुपे दुश्मनों की गोलियों का सामना करना पड़ा | एक हथगोले देशरत्न की टुकड़ी के बंकर के पास आकर गिरा | तीन सैनिक शहीद हो गए | देशरत्न का बाया हाथ कंधे के पास से चिथड़े बनकर अलग हो हया | इस घटना से देशरत्न ने हिम्मत नहीं हरी बल्कि उसका हौसला चार गुना बढ़ गया | उसने बुलंद आवाज़ में कहा ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाया और उस ओर दौड़ पड़ा, जिधर से हथगोला आया था | सामने बंकर में छिपी दुश्मन की टुकड़ी पर देशरत्न ने गोलाबारी करने के लिए अपने सैनिक साथियों को आदेश दिया | पलक झपकते ही बंकर को गोले से उड़ा दिया गया | देशरत्न ने तुरन्त तिरंगा फहराकर सभी सैनिको के साथ ‘ भारत माता की जय ‘ का नर लगाया |

देशरत्न शत्रु की स्तिथि का निरीक्षण कने के लिए कुछ कदम आगे बढ़ा ही रहा था की दाईं ओर से दुश्मन की गोलाबारी फिर शुरू हो गए | एक गोला उसके दाहिने पैर में लगी | देशरत्न गिर पड़ा, लेकिन अगले ही पल वह दोबारा उठकर फायर करने लगा | उसके दुश्मन- सेना के अनेक सैनिको को मार गिराया | तभी एक हथगोला देशरत्न के पास आकर फटा और देशरत्न शहीद हो गया | “ माँ मुझको!  बंदूक माँगा दे” गाने वाला बालक देशरत्न सचमुच बंदूक सेअपने देश की सीमाओ की रक्षा करता हुआ विगति को प्राप्त हो गया | प्रायः बच्चो को अनेक अपने हाल पर छोड़ दिया जाता है | ऐसा कभी-कभी ही होता है की बुरे रास्ते पर जाने वाले बच्चो को, अच्छे रास्ते पर लेन के लिए, ईश्वर किसी न किसी दूत को भेज देता है | ऐसा ही देशरत्न के साथ भी हुआ | देवदूत बनकर गुरूजी गंगाशरण आए और उस बालक देशरत्न के जीवन की दिशा एवं दशा दोनों ही बदलदी और उशे कहा से कहा पंहुचा दिया | कुख्यात होने से बचाया और विख्यात कर दिया |

 

Summary
Article Name
Desh Ratna- Ek Saccha Desh Bhakt
Description
चम्बल नदी का हरा- भरा अति सुन्दर किनारा और उसके निकट आम के बागों के बीच एक छोटा- सा खुबसूरत गाँव-रामपुर | वहीं आम के बाग में एक पुराना सा स्कूल | स्वतंत्रता-दिवस के ठीक एक दिन पहले वहां देश भक्ति का कार्यक्रम आयोजित किया गया
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