राष्ट्र स्वयंसेवी संघ (RSS) से जुड़ी ये 5 बाते शायद आप नहीं जानते हों

27 सितम्बर 1925 मे केशव बलिराम हेडगेवर द्वारा स्थापित राष्ट्र स्वयंसेवी संघ (RSS) आज अपने जन्म के इतने वर्षो बाद भी अपने मूल आदर्शो के प्रति अच्छी खासी सजग दिखाई पड़ती है | भारत के अनमोल सांस्कृतिक विरासतों को सुव्यवस्थित तरीके से पीढ़ी दर पीढ़ी आगे ले जाकर एक सम्पूर्ण हिन्दू राष्ट्र की कल्पना करता RSS आज किसी परिचय का मोहताज नहीं |

बात चाहे त्रासदी अथवा प्राकृतिक आपदा में लोगो की निस्वार्थ सेवा करने की हो या फिर जगह-जगह स्कूल, चैरिटी की मदद से सांस्कृतिक विरासतों को जीवित रखने का संकल्प.. आज संघ ने हर मोड़ पर अपने मूल आदर्शो को जीवित रखने हेतु कड़ा संघर्ष किया है | मगर क्या आपको पता है कि आज शक्ति एवं दृढ संकल्प का परिचायक बन बैठी RSS को कभी सिर्फ इसलिए बैन कर दिया गया था क्यूंकि उनकी विचारधारा राष्ट्र विरोधी समझी गयी थी | आइये डालते हैं संघ से जुड़ी कुछ ऐसी ही बातो पर जो शायद आपको न पता हो :

1. हो चुकी है बैन: जी हाँ, RSS एक बार नहीं बल्कि 4 बार बैन की जा चुकी है | एक बार आजादी के पहले एवं 3 बार आजादी के बाद जब RSS के ही नाथूराम गोडसे ने महात्मा गाँधी की हत्या की थी उस वक़्त पुरे राष्ट्र में RSS विरोधी नारे गूंजने लगे थे | इसके अलावा इमरजेंसी के दौरान (1975-77) तथा बाबरी मस्जिद के तोड़ने के आरोप (1992) में भी इनपर प्रतिबन्ध लगाया जा चूका है |

2. साल 1971 के बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई में RSS वालंटियर्स ने ना सिर्फ आराजकता के उस माहौल में देश के विधि-व्यवस्था को बनाये रखने का काम किया बल्कि घायलों को रक्तदान कर अपने मानवीय गुणों का भी परिचय दिया |

3. 1975 के दौरान इंदिरा गाँधी द्वारा इमरजेंसी लगा दिए जाने के बाद देश में जहाँ तहा ह्यूमन राईट (Humen Rights) के मुद्दे सामने आने लगे | इस दौरान RSS ने सत्याग्रह का साथ लिया | जगह-जगह होते धरना प्रदर्शनों एवं व्यापक पैमाने में फैले जन आक्रोश के बीच साल 1977 में इमरजेंसी को हटा लिया गया साथ ही RSS पर लगा प्रतिबन्ध भी |

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4. RSS किसी तरह की फॉर्मल मेम्बरशिप पर बिलीव नहीं करती कोई भी चाहे तो संघ परिवार का हिस्सा बन सकता है | आपको मेम्बर बनने हेतु बस नजदीकी शाखा से संपर्क करना होता है | हालाँकि संघ परिवार ये दावा करता है की वे किसी तरह के मेम्बरशिप डिटेल्स नहीं रखते हैं परन्तु एक अनुमान के मुताबिक अगस्त 2015 तक संघ परिवार के मेम्बेर्स की संख्या करीब 25-60 लाख के बीच आंकी गयी है वही कुल शाखाओ की संख्या भी लगभग 51335 है |

5. संघ शाखाओं में मेम्बेर्स के फिजिकल फिटनेस हेतु न सिर्फ व्यायाम, योग एवं अन्य तरह के गेम्स पर भी ध्यान दिया जाता है बल्कि वे एक अच्छा इंसान बन कर समाज के उत्थान में मदद कर पाए इसके लिए भी देश भक्ति एवं हिंदूवादी आदर्शो को उनमे स्थापित किया जाता है |

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आज संघ ने हर मोड़ पर अपने मूल आदर्शो को जीवित रखने हेतु कड़ा संघर्ष किया है |
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