Ramesh Jha Saharsa ( रमेश झा सहरसा )

Ramesh Jha Saharsa ( रमेश झा सहरसा ) : अगस्त के क्रांति में भाग लेने वाले युवा क्रन्तिकारी में रमेश झा (Ramesh Jha) प्रथम पांति में थे। स्वभाव से नटखट एव चंचल श्री झा उस समय  तेजनारण जुबली कालेज के दुतीय वर्ष के छात्र थे। उन्होंने समय की पुकार सुनी और दीवाने के रूप में संग्राम में कूद पड़े । इनका विवाह एक वर्ष पूर्व ही हुआ था। रमेश बाबू के मूल गाम बनगाँव था लेकिन पिता श्री गढ़िया आ कर बस गए थे और वही  रहने लगे थे ।
15 अगस्त को इनके निर्त्त्व में सहरसा हेलेड  इंन्स्टीच्यूट जो अब मनोहर उच्च विधालय के नाम से जाना जाता है, को बंद करवाया तथा छात्रो को देश के आजादी के लिऐ ललकारा । उसी दिन आजादी के दिवाने पर गोरी पलटन के गोली दागी जिस में बारह सेनानी जख्मी हुए ।
15 अगस्त 1942 को उन्होंने अपने नेतृत्व में अनेको बन्दूक रायफल तलवार आदी जमा किय।

Ramesh Jha Saharsa जी का संछिप्त विवरण :

जन्म तिथि : 1 फरवरी 1924
मृत्यु : 18नम्बर 1985
पिता : स्वर्गय गणेश झा
माता : सूरज देवी
पत्नी : गोरी देवी
ग्राम : बनगाँव
जेल यात्रा : 20 अक्टूबर 1942 से 16 मई 1946 तक

बरियाही अँगेज  के कोठी में घुसकर जबरन उसके बन्दुक डायनोंमो सेट आदि रायफल लूट लिया । 29 अगस्त को  अंगेरजो ने सहरसा में एकत्रित उग्र भीड़ पर पुनः गोली चालई जिसमे 6 लोगो को गोली लगी जो घटना स्थल पर ही दम तोड़ दिए। बनगाँव के कपिलेश्वर चौधरी के घुटने में गोली लगी तथा रमेश बाबू के आँख में एक छारा  के चोट से जख्मी ।इसी बीच रमेश बाबू जहा तहा भागते रहे ।उन्होंने 19 अक्टूबर 1942 तक पकिलवार , धमदाहा , दुर्गानन्द पाटशाला कटिहार , जोगबिनी आदि स्थान पर उस ने  शरण ली । 20 अक्टूबर को उन्हें गिरप्तार कर लिया गया और 16 मई 1946 तक लगातार सेंट्रल जेल भागलपुर में रहे । 1942 से 1946 तक  लगातार  छड़े से जख्मी इनके आखे इन्हे लगातार कस्ट देती रही , जब  तब जेल में रक्तसाव भी हुआ , और इन्हे अपने एक आखे खोने पड़ी। 1942 में रमेश झा सहित 25 आजादी के दिवाने के विरोध अंग्रेजी हकुमत ने साढ़े साठ वर्ष की सजा प्रत्येक के लिय सुनाई । अंतरिम सरकार बनने में इन सब को मुक्त कर दिया गया ।
पंडित रमेश झा आचर्य नरेन्द देव  के नेतृत्व में नासिक समेलन में कांगेस से अलग होकर एक सोसलिस्ट दल में आय । 1952 में प्रजा

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