माँ-बाप से अलग करने पर बीवी को दे सकते हैं तलाक- सुप्रीम कोर्ट

एक बच्चे को 9 महीने तक अपने गर्व में पालने के बाद जब एक माँ अपने बच्चे को जनम देती हैं तो मानो पूरी दुनिया उस नन्ही से जान के आगे फीकी नजर आती हैं| बचपन से बच्चो की पढाई-लिखाई, खेल-कूद, स्वास्थ्य एवं न जाने कितने ही दुःख तकलीफे झेल, माँ- बाप अपने बच्चों की परवरिस करते हैं ताकि उनका बच्चा भी इस भीड़ में अपनी अलग पहचान बना सके|और करे भी क्यूँ न, आखिर आगे चल कर उनको ही तो अपने माँ बाप के बुढ़ापे की लाठी बनना हैं| हमारे शास्त्र भी तो हमे यही शिक्षा देती हैं|

मगर आजकल बड़े होने के बाद ज्यादातर मामलों में यह देखा जा रहा हैं कि बच्चे अपने जिम्मेदारियों एवं मौलिक दायित्वों को भूल शादी के बाद अपने घर से अलग पहचान बनाने निकल परते हैं| हालाँकि परिवार बढ़ रहा हैं एवं बच्चो की पढाई लिखाई से लेकर घर चलाने में पैसे की कितनी जरुरत होती हैं और फिर सेविंग्स ही तो सब कुछ होती हैं| ऐसे में इन्सान अपने बीवी की सुने या कि अपने बूढ़े माँ बाप की| आखिर इन्सान करे तो क्या करे..?

आज हमारे समाज में तेजी से बढ़ रहे Old Age Home की संख्या इस बात को दर्शाती हैं कि किस तेजी से आधुनिकता के होर में हम अपने समाज एवं माँ बाप को पीछे छोरते जा रहे हैं|हाल ही में देश के सर्वोच्च न्यायालय सुप्रीम कोर्ट ने बैंगलोर बेस्ड एक दम्पति के तलाक के फैसले को यह कहते हुए जायज ठहराया कि शादी के बाद यदि आपकी बीवी आपको अपने बुजुर्ग माँ-बाप के सेवा करने से रोकती हैं तो फिर आप सही मायने में तलाक के हक़दार हैं|

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हिन्दू शास्त्रों में पिता-पुत्र का सम्बन्ध काफी “पवित्र” बताया गया हैं और यदि बीवी किसी भी रूप से आपको इस कर्तव्य को निभाने से रोकती हैं तो फिर यह काफी गलत बात हैं| Justice Anil R Dave एवं L Nageshwara Rao के बेंच ने आगे जोड़ते हुए कहा कि शहरों में ये बाते आम हो चली हैं| वेस्टर्न कल्चर से प्रभावित हो आज लोग Nuclear Family की डिमांड कर रहे हैं|समिति ने यह भी कहा कि यदि बीवी अपने पति को इस ” Moral Responsibility” से रोकती हैं तो इसे ” Act of Cruelty” भी कहा जा सकता हैं|

कोई भी बेटा न तो अपने माँ-बाप को छोरना चाहेगा और न ही अपने बीवी को| ऐसे में बीवी एवं माँ बाप के बीच फस पति की मानसिक एवं शारीरिक शांति भंग होती जाती हैं जिसके की आगे चलकर उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पर सकता हैं|बताते चले की बंगलोर बेस्ड एक दम्पति ने अपने बीवी से परेसान हो तलाक़ के लिए लोअर कोर्ट में अपील की थी जिसे की मंजूर कर लिया गया था परन्तु हाई कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया था| ऐसे में पति ने बीच-बचाव के लिए सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगायी थी|