मोहल्ला सभा से जुड़ी महत्वपूर्ण तथ्य

मोहल्ला सभा से जुड़ी महत्वपूर्ण तथ्य (Things You Must Know About Mohalla Sabha) में आज हम आपको मोहल्ला सभा से जुड़े सभी प्रकार के प्रश्नों के उत्तर देने की कोशिश करेंगे | उम्मीद है इस आलेख में आपको Mohalla Sabha से संबंधित जानकारियाँ मिल जाएगी, यदि ऐसे प्रश्न जिनका उत्तर यहाँ उपलब्ध नहीं है उस प्रश्न को हमारे कमेंट बॉक्स में पूछें | हम शीघ्र ही जवाव देंगे |

मोहल्ला सभा क्या है ?

सरकार ने दिल्ली की हर विधान सभा को 40 से 50 मोहल्लों में बांटा है| इन मोहल्लों के वोटर्स की बैठक को मोहल्ला सभा कहा जायेगा| मोहल्ले के लोग मोहल्ला में बैठकर अपने क्षेत्र के कार्यों और समस्याओं पर निर्णय लेंगे, उन्हें अमल में लायेंगे और उन पर निगरानी रखेंगे|

एक मोहल्ले का साइज क्या है ?

लगभग 1000 घरों पर एक मोहल्ला बनाया गया है| हालांकि आर्थिक, सामाजिक और भोगोलिक परिस्थिति को ध्यान में रखकर मोहल्ले का आकार छोटा-बड़ा भी हो सकता है|

इनकी बैठकें कैसे, कब और कहां होंगी?

मोहल्ले की सभा कम से कम महीने में एक बार, निश्चित दिन, समय और स्थान पर होगी| शुरुआत में इसे दो महीने में एक बार भी रखा जा सकता है बहुत जरुरी मुद्दों के लिए शोर्ट नोटिस पर विशेष मोहल्ला सभा बुलाई जा सकती है| सर्कार की कोशिश है कि पूरी दिल्ली में अगले महीने से मोहल्ला सभा शुरू हो सकें|

ये बैठकें कौन करवाएगा?

मोहल्ला सभा करने की जिम्मेदारी जिला अधिकारी की होगी हर एक मोहल्ले में सभा करने के लिए दो-दो मोहल्ला coordinator  बनाये जा रहे हैं|

मोहल्ला सभा Co-ordinator की  क्या भूमिका होगी?

मोहल्ले की बैठक की सूचना सभी नागरिकों को देना, सभा की व्यवस्था करना, सभा में लिए गये निर्णयों के मिनट्स बनाना सभा में तय किये गए कार्यों को अफसरों और डिस्ट्रिक्ट अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी (DUDA) मदद से पूरा करवाना इत्यादि|

क्या मोहल्ला Coordinator को कोई सैलेरी मिलेगी?

नहीं| मोहल्ला Coordinator सेवा की भावना से बिना सैलेरी के काम करेंगे|

क्या गारेंटी है कि मोहल्ला Coordinator भ्रष्ट नहीं होगा?

मोहल्ला Coordinator के पास किसी तरह के  निर्णय लेने की पावर नहीं होगी| सारे निर्णय मोहल्ला सभा में लिए जायेंगे| इसलिए भ्रष्टाचार की गुंजाइश न के बराबर है| फिर भी अगर किसी तरह के गड़बड़ी सामने आती है तो इसकी शिकायत जिला अधिकारी से कर उसे हटाया जा सकता है|

बैठकों में जनता किस तरह के फैसले ले सकेंगी?

मोहल्ला सभा में मोहल्ले के विकाश से जुड़े छोटे-छोटे और तात्कालिक जरूरतें के काम पर फैसले लिया जायेगा| मोहल्ले की सभाओं में सरकार की योजनाओं जैसे पेंसन, बीपीएल कार्ड, निवास प्रमाण पत्र आदि पर भी फैसले लिए जा सकेंगे|

मोहल्ला सभा में मुद्दों पर चर्चा और फैसले किस तरह से होंगे|

मोहल्ले की सभा में Coordinator की जिम्मेदारी होगी की वह लोगों की बिच चर्चा कराकर मोहल्ले में होने वाले  जरुरी कार्यों की लिस्ट बनाये और अगर काम ज्यादा हैं तो प्राथमिकता के लिए वोटिंग कराएँ|

Mohalla Sabha में लिए गए फैसलों पर अमल कैसे होगा?

मोहल्ला सभा में तय किये गए काम को मोहल्ला Coordinator सरकार द्वारा इंपैनल्ड छोटे-छोटे Contractors से करवाएँगे| मोहल्ले के जिन समस्याओं का समाधान मोहल्ला सभा के पास  उपलब्ध Citizen-LAD फंड से नहीं कराया जा सकेगा उन समस्याओं की शिकायत सबंधित विभागों के अधिकारीयों को एक मोबाइल एप के जरिये भेजी जाएगी| अधिकारी इन समस्याओं का समाधान एक निश्चित समय-सीमा में करेंगे| जो अधिकारी मोहल्ला सभा से आई शिकायतों का समाधान निश्चित समयसीमा में नही कर पाएंगे उनकी शिकायत खुद-ब-खुद मुख्यमंत्री कार्यालय में पहुंच जाएगी|

फैसलों के अमल के लिए फंड कहां से आएगा?

देश में पहली बार शहरों में लोगों की अपनी मर्जी से खर्च करने के लिए Citizen-LAD फंड दिल्ली सर्कार ने शुरू किया है| इसके लिए 2016-17 के बजट में 350 करोर रखे गयें हैं| इस साल हर मोहल्ला सभा लगभग 10 लाख रूपए के कार्यों के बारे में फैसले ले सकेंगी|

क्या यह पैसा बहुत कम नही है?

किसी भी क्षेत्र की सभी जरूरतों के लिए तो 10 लाख रुपये कुछ नहीं हैं लकिन बहुत सारे कार्य साकार द्वारा, निगम द्वारा, एमएलए फंड आदि से भी हो रहे हैं| यह एक नई  शुरुआत है जहां जनता खुद बैठकर अपने मोहल्ले के विकास से जुरी कुछ छोटी-मोटी अथवा तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने विवेक से फैसला लेगी| आने वाले वर्षों में यह राशि बढाई भी जा सकती है|

क्या मोहल्ला में तय किये जाने वाले काम के लिए कोई खर्च सीमा होगी?

वैसे तो मोहल्ले के पास अधिकार होगा की वो अपने फंड के लगभग 10 लाख रूपए एक काम के लिए भी लगा सकते हैं| लेकिन अच्छा ये रहेगा की लोग मोहल्ले के उन छोटे-छोटे कामों को करने का निर्णय लें, जिनके लिए उन्हें नेताओं या ओफसरों के आगे-पीछे दोड़ना पड़ता है|

Mohalla Sabha की बैठक में निर्णय होने से भ्रष्टाचार-कमीशनखोरी कैसे रुकेगी?

लोग अपने मोहल्ले की सभा Citizen-LAD फंड के पैसे से काम करने ka फैसला ले सकेंगे| यहाँ तक की छोटे-छोटे कार्यों के लिए ठेकेदार के चयन भी मोहल्ला सभा के आदेश पर होगा. इतना ही नहीं, काम ठीक से ना होने पर ठेकेदार के खिलाप करवाई भी मोहल्ला सभा भी कर सकेगी|

क्या मोहल्ला सभा के निर्णय लेने के चक्कर में कामों में देरी नही होगी?

बिलकुल नही| आज मोहल्ले के छोटे-से-छोटे काम के लिए, दफ्तरों में कई लेवल्स पर मंजूरी के लिए इंतजार करना होता है| साथ ही महीनो तक अफसरों के चक्कर भी काटने पड़ते हैं| उसके बाद भी काम पूरा होने की कोई गेरेंटी नही होती| इसके विपरीत, मोहल्ला सभा में किसी काम पर फैसला होने के बाद किसी भी अन्य दफ्तर या अफसर की मंजूरी की जरुरत नही| वो काम सीधा ठेकेदार या सरकारी विभाग पूरा करेगा, जिन्हें कान सौपने के साथ ही काम पूरा करने की डेडलाइन भी दे दी जायगी|

क्या मोहल्ला सभा इस तरह के काम और और प्रोजेक्ट को मंजूरी दे सकती है?

किसी के माकन की मरम्मत, अनुदान या ऋण, व्यक्ति विशेस या निजी संस्थाओं को लाभ पहुँचाने वाले काम या सेवाएं, धार्मिक कार्यों इत्यादि को छोड़कर मोहल्ला सभा बहुत सारे कामो के लिए इस फंड का इस्तेमाल कर सकती है|

मोहल्ला सभा में तय कार्यों का स्टेटस जनता को कैसे पता चल सकेगा?

इसके लिए एक मोबाइल एप- ‘माई मोहल्ला(My Mohalla) बनाया जा रहा है| माई मोहल्ला मोबाइल एप के जरिये इन सभी कामों की स्थिति का पता लगाया जा सकेगा| इस एप के जरिये मोहल्ला सभा की अगली मीटिंग, एजेंडा और मिनट्स ऑफ़ मीटिंग भी पता किये जा सकेंगे|

क्या मोहल्ला सभा में भ्रस्टाचार या गलत फैसले नही होंगे?

मोहल्ले के लोग एक साथ निर्णय लेंगे तो, न तो गलत काम के लिए और न ही गलत आदमी के पक्ष में फैसला होगा अभी तक का अभी तक का अनुभव यही है कि जब व्यक्ति को अकेले फैसला लेना होता है तो गलत काम के लिए या गलत आदमी के पक्ष में फैसले लेने की संभावना ज्यादा रहती है? यह भी संभव होता है की कुछ लोग जब दूसरों के बारे मै फैसला ले तो गलत निर्णय ले लें| लेकिन जब लोगों की अपनी बैठक मै अपने ही पैसे के बारे मैं और अपने मोहल्ले के विकाश के बारे मैं फैसला लेने की  जिम्मेदारी होगी तो वे अपने लिए सबसे बढियां फैसला लेंगे|

क्या गारेंटी है कि मोहल्ले के लोग फैसला लेने मैं गलती नही करेंगे?

गांधी जी मानते थे कि लोगतंत्र मैं गलती करने का सबसे ज्यादा अधिकार आम जनता को होना चाहिए| उनका कहना था, “आज तो प्रजा हर जगह रंक बन गई है| उसे गलती करने का अधिकार नही है, वह सुधर नही कर सकता  गलती करने की अनुमति और सुधर करने का अधिकार ही स्वराज की परिभाषा है|”

अगर लोग खुद फैसले लेंगे तो क्या वो आपस में नही लड़ेंगे? / क्या मोहल्ले के सभी लोगों में निर्णय लेने के लिए आवश्यक समझदारी है?

ऐसा बिलकुल संभव है| लोकतंत्र एक सतत प्रक्रिया है| ‘लोग आपस मैं लड़ेंगे’, ‘लोग समझदार नही हैं’ जैसे बहनों के चलते ही अंग्रेज भी कहा करते थे की भारत को आजादी नही दी जा सकती क्योंकि यहां के लोग जाहिल हैं| लोग लड़ भी सकते हैं और लड़ कर संभलेंगे भी, तभी लोगतंत्र मजबूत होगा|

यह कैसे संभव है की यहाँ के लोग किसी एक मुद्दे पर एक हो सकेंगे?

आम सहमती बातचीत के बाद ही हो सकती है. चूँकि आज के समय मैं लोगो के पास ऐसा कोई पंच नही है जहा मोहल्ले के विकाश के मुद्दों के बारे मैं चर्चा की जा सके| मोहल्ला सभा ही एक ऐसा मंच होगा जहाँ सभी लोग अहम् मुद्दों और विकाश के बारे मैं चर्चा कर सकेंगे| किसी भी काम को करने के लिए आम सहमती या वोटिंग के बाद ही उसपर फैसला लिया जायगा|

क्या मोहल्ले के प्रभावशाली लोग मोहल्ला सभा के फैसलों पर हावी नही होंगे?

यह संभव है| लेकिन इसका समाधान यही है कि मोहल्ले के अधिक से अधिक लोग बैठकों मैं जाएं और किसी एक व्यक्ति या समूह को फैसलों पर हावी न होने दें|

क्या मोहल्ला सभा आरडब्ल्यूए को ख़तम करके बनाई जा रही है?

आरडब्ल्यूए सिविल सोसाइटी का महत्म्पूर्ण हिस्सा हैं| वे स्वतंत्र रूप से अपना काम करती रहेंगी| मोहल्ला सभा एक तरह से RWA (Residence Welfare Society ) की सबसे बड़ी मददगार होंगी| अगर अभी RWA को कोई काम करना हो तो उन्हें मोहल्ला सभा उनके पास अपना लोकल प्ले है| लेकिन जहां वो हर जगह जाकर खुद निर्णय ले पाएंगे| इस तरह मोहल्ला सभा की बैठकों से आरडब्ल्यूए का काम आसान होगा और जल्दी होगा| इससे आरडब्ल्यूए को और मजबूती मिलेगी|

क्या Mohalla Sabha के काम से नगर निगम के काम मैं कोई कन्फ्युजन होगा?

बिलकुल नही, मोहल्ला सभा तो किसी एक मोहल्ले की लोगों की बैठक है| ये एक ऐसा प्लेटफार्म होगा जहाँ दिल्ली सरकार, नगर निगम, DDA आदि सभी एजेंसियों को अपने काम करने, अपने योजनाओं को लागू करने की सुविधा होगी|

क्या दिल्ली मैं इसके पहले Mohalla Sabha हुई हैं?                

पिछले साल दिल्ली की 11 विधानसभाओं मैं मोहल्ला सभा का पायलेट क्या गया था| इसके अछे और बुरे अनुभवों के आधार पर पूरी दिल्ली के लिए मोहल्ला सभा पॉलिसी बनाई जा रही है| इससे पहले भी आम आदमी पार्टी और साकार बन्ने से पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी द्वारा त्रिलोकपुरी और करावल नगर के वार्ड काउन्सलर के प्रयोग से मोहल्ला सभा के सफल प्रयोग हुए थे|

क्या देश मैं कहीं मोहल्ला सभा होती है?

नहीं| दिल्ली सरकार देश की पहली ऐसी  सरकार है जो ये एतिहासिक पहल करने जा रही है|

क्या दुनिया मैं कहीं और मोहल्ला सभा का मॉडल उपलब्ध है?

दुनियां के लगभग सारे विकशित देशों मै मोहल्ले के छोटे-छोटे कार्यों पर निर्णय लेने के लिए स्थानीय स्तर पर आम लोगों के भागीदारी होने के कानून हैं| अमेरिका और यूरोप मैं जहाँ टाउन हॉल मीटिंग्स, काफी चलन मैं हैं| वहीँ, ब्राजील जेइसे देशों में बजट बनाने का काम भी मोहल्ला सभाओं से सुरु होता है| स्विट्जर्लैंड मैं तो जनता की मंजूरी से ही कानूनी बनाती है|

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