मेरी कहानी : रोहित कुँवर बैंक PO सिंडिकेट बैंक

एक लड़का जो प्लस टू में साइंस स्ट्रीम से अच्छे मार्क्स से उत्तीर्ण होने के बाद एक साल की कड़ी मेहनत एवं लगन के फलस्वरूप इंजीनियरिंग एग्जाम पास कर भारत के एक बेहद ही प्रतिष्ठित सरकारी इंजीनियरिंग संस्थान में कंप्यूटर साइंस पढने पहुँच जाए एवं कुछ सालो बाद पता चले की वो लड़का आज एक भारत सरकार के अधिन बैंक में बैंक मेनेजर बन गया हैं तो आप क्या सोचेंगे ..? क्या इसे आप वर्तमान शिक्षण पद्धिति का दोष या फिर बैंकिंग सेक्टर को लेकर उस लड़के का प्यार एवं समर्पण.?

आज बेशक ही भारत में बढती बेरोज़गारी एवं एक अच्छे जॉब संभावनाओं के अभाव में हमारी एक बड़ी आबादी अपने सपनो का गला घोंट देती हैं, परन्तु कुछ सपने ऐसे भी होते हैं जो तमाम आलोचनाओ एवं विषम परिस्थितियों के बाद भी सिर्फ इसलिए अंकुरित हो पाती हैं क्योंकि आगे चलकर वो समाज के लिए एक मिसाल बन सके. एक उम्दा कैरियर एवं समाज के प्रतिष्ठित वर्ग में स्थापित करने के वायदे के साथ आज बैंकिंग सेक्टर आपको वो हर चीज़ दे सकती हैं जिसकी आप बस कल्पना मात्र ही कर सकते हैं.

एक औसत मिडिल-क्लास फैमिली से निकल तमाम आलोचनाओं को झेलते हुए आज प्रोबेशनरी ऑफिसर बन चुके रोहित कुँवर का इंटरव्यू लेने जब हमारी टीम उनके घर पहुंची तो अनायास ही अपने पुराने दिनों को याद कर उनकी आँखे नम हो गयी. बेहद ही खुशमिजाज रोहित जी से हमारी बातचीत के दौरान उन्होंने अपने सफलता के राज़ हमारे साथ साझा करने में थोड़ी सी भी देरी नहीं की, स्वयं उनके शब्दों में

सिंडिकेट बैंक में PO बनने से पहले मै बैंक ऑफ़ बड़ौदा में भी कुछ वर्ष क्लर्क के रूप में काम कर चुका हूँ. जीवन के इन कुछ सालो के अनुभव को जब मैंने अपने संघर्ष-काल से मिलाया तो मुझे ज्ञात हुआ कि बैंक PO का एग्जाम क्लियर करना काफी आसान हैं. हम अपने लगन एवं मेहनत से कभी भी किसी भी परिस्थिति का रुख मोड़ सकते हैं. सफलता के प्रति आश्वस्त होने के लिए हमे बस कुछ बातो का ध्यान रखना पड़ता हैं, जो निम्नलिखित हैं :

1.सिलेबस को समझे: यदि आपने बैंक PO के रूप में करियर बनाने का मन बना ही लिया हैं तो सबसे पहला काम सिलेबस को अच्छी तरह समझने में करे. इससे आपको अपने शक्ति एवं कमजोरियों को परखने में काफी मदद मिलेगी.

2. एक बेहतर स्टडी प्लान बनाये: अब जब आपने अपने कमजोरियों को ढूंड ही लिया हैं तो लग जाइये उन कमजोरियों को अपनी शक्ति बनाने में. एक बेहतर स्टडी प्लान इस कार्य में आपकी काफी मदद कर सकती हैं. ध्यान दे आपको दिन में 10 घंटे पढने की कोई जरुरत नहीं है बस जो भी करे उसे पूरी ईमानदारी एवं लगन से करे.

3. पढने की आदत डाले: न्यूज़ पढना, नेट सर्फिंग करना एवं देश-दुनिया से अपडेट रहना शायद भविष्य में आपकी सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरे. जितना हो सके खाली वक़्त में पढने की आदत डाले. ध्यान रहे जितना ज्यादा आपकी नॉलेज बढ़ेगी उतना ही अच्छा आप डिलीवर भी कर पाएंगे.

4. GK एवं कंप्यूटर विषयों पर रखे विशेष ध्यान: कम्पटीशन का मतलब सिर्फ रीजनिंग एवं मैथ ही नहीं होता. अक्सर ऐसा देखा गया हैं की तैयारी करते वक़्त लोग मैथ, इंग्लिश, रीजनिंग इत्यादि में इतना ज्यादा व्यस्त हो जाते हैं कि कंप्यूटर एवं जनरल नॉलेज जैसे महत्वपूर्ण सब्जेक्ट्स को नज़र-अंदाज़ कर देते हैं. कोशिश करे ऐसा नहीं करने की, ज्ञात हो कि कम समय में आप ज्यादा मार्क्स तभी ला सकते हैं जब आपकी इन विषयों पर विशेष पकड़ हो.

5. जितना हो सके मोक टेस्ट दे: ध्यान दे समय-समय पर मोक टेस्ट देने की आदत न सिर्फ आपके तैयारियों को परखेगी वरन आपको अपनी तैयारी एवं सफलता के बीच खाई को भी पाटने का मौका मिल पायेगा.

6. पॉजिटिव रहें: ध्यान दे पॉजिटिव लोग ही विफलताओ को एक संभावना के रूप में ले सकते हैं. दवाब में कभी काम न करे. ज्ञात हो की आपकी मेहनत एवं लगन का भी उस वक़्त कोई मोल नहीं रह जाता जब आप पॉजिटिव नहीं रह पाते.

 

रोहित कुँवर द्वारा Recommend कियें गए बुक्स की सूची :
  • रीजनिंग : वर्बल एंड नॉन वर्बल – आर.एस अग्रवाल
  • एनालिटिकल रीजनिंग : एम.के पाण्डेय
  • मैथ्स (Aptitude) : आर.एस अग्रवाल
  • इंग्लिश : Objective General English by S.P. Bakshi
  • जनरल अवेयरनेस : न्यूज़ पेपर, बैंकिंग अवेयरनेस (Publisher : Arihant)
  • कंप्यूटर : कंप्यूटर फंडामेंटल P.K सिन्हा

“विश्वास कीजिये जीत आपकी ही होगी”

कई मायने में लोग ये सोच सकते हैं की आखिर B.TECH किये हुए किसी लड़के ने बैंक PO निकाल ही लिया तो इसमें कौन सी बड़ी बात हैं?

परन्तु पाठको से हमारा यही निवेदन है की ये कहानी रोहित जी के त्याग, समर्पण एवं एक अच्छा करियर होने के बावजूद बैंकिंग सेक्टर के प्रति लगाव को दर्शाती हैं. यकीन मानिये समाज एवं अपने परिवार से उनकी सोच के विरुद्ध लड़-झगड़ कर अपनी सोच एवं सपनों को पूरा करने में काफी हिम्मत लगती हैं. यहाँ बैंक PO निकलना ही मुख्य कारण नहीं था वरन ये कहानी थी 5 सालो तक एक बच्चे की समाज एवं अपने परिवार को समझाने की, कि मै बैंक PO बनना चाहता हूँ,क्या आप मेरी मदद करेंगे?

 

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