पैसे पेड़ पर नहीं पापड़ बेलकर बनते हैं ‘लिज्जत पापड़ की कहानी’

Lijjat Papad Success Story in Hindi: औरतों को बिजनेस के मामले में हमेशा पुरुषों से कम ही आंका जाता है लेकिन इंदिरा नूयी, चंदा कोचर जैसी सफल बिजनेस वुमन ने इस बात को पूरी तरह गलत साबित किया है । लेकिन इसके अलावा घर से शुरु हुए पापड़ के छोटे से कारोबार को कुछ महिलाओं ने अपनी काबिलियत से सफलता के शिखर पर पहुँचा कर उन महिलाओं को भी केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है जो हमेशा गाँव की पृष्ठभूमि होने के कारण नकार दी गयी। आज हम इन्हीं महिलाओं की मेहनत की कहानी आपके सामने लेकर आये हैं ।

Lijjat Papad Success Story in Hindi:

बेरोजगारी से रोजगार तक और फिर इतना बड़ा बिजनेस –

  • बात 1959 की है जब जसवंती बेन का मकसद सिर्फ परिवार की आमदनी बढ़ाने के लिये कुछ पैसे कमाना था और उन्होनें अपने साथ और बेरोजगार महिलाओं को जोड़कर 100 रुपये का कर्ज लिया और पापड़ बनाने का काम शुरु किया।
  • और आज अगर देखा जाये तो 40,000 महिलाँए उनके यहाँ काम करती हैं और हर साल 200 करोड़ रुपये का वार्षिक कारोबार है। और आज भी जो महिलाएँ यहाँ काम करती हैं वो अशिक्षित हैं लेकिन वो इसे अपनी कमी नहीं मानती हैं और यही इस कारोबार की सफलता का राज है अपनी कमी को अपनी कमी ना बनने दें। ये सभी महिलाएँ पापड़ों की गुणवत्तता का खास ख्याल रखती हैं ।

जसवंती बेन कम पढ़ी-लिखी थी लेकिन समझदार काफी थी

लिज्जत पापड़ संस्थापिका
लिज्जत पापड़ संस्थापिका Jaswanti Ben
  • सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरे भारतवर्ष मे जसवंती बेन के लिज्जत पापड़ फेमस हैं। और इसी वजह से इन्हें इकनोमिक टाइम्स अखबार ने सन् 2002 में महिला उद्यमी के तौर पर पुरस्कृत भी किया। जसवंती बेन की उपलब्धी इसलिए भी खास मानी जाती है क्योंकि वो ना केवल गरीब परिवार से ताल्लुकात रखती हैं बल्कि उनकी शिक्षा भी कुछ खास नहीं थी।
  • लेकिन इसके बाद भी उन्होंने इस चीज को कभी अपनी कमी नहीं बनने दी । वो कंपनी की सभी बैठकों में न केवल भाग लेती थी बल्कि फैसले लेने में भी पीछे नहीं हटती थी।

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कैसा है लिज्जत पापड़ का उद्योग –

  • जी हाँ… ये कंपनी बाकी कंपनियों से काफी हटकर है यहाँ अध्यक्षता कार्यकारी समिति से सदस्य बारी-बारी से संभालते हैं और वो भी सबकी सहमति से चुने जाते हैं।
  • यानी सबको मौका दिया जाता है जो इस उद्योग की सफलता में एक अहम किरदार निभाते हैं।
Lijjat Papad Success Story in Hindi:

पापड़ के अलावा-

  • ये इन सभी महिलाओं की मेहनत का ही असर है कि अब लिज्जत कंपनी ने पापड़ के अलावा डिटर्जेंट और ब्रेड बनाने का काम भी शुरु कर दिया है।
  • आप शायद यकीन ना माने लेकिन कई स्कूल ये शोध करने में जुट गये कि वो क्या मूल कारण थे जो गाँव की महिलाओं द्वारा स्थापित उद्योग को इतना सफल बना पाये।

हैरान कर देने वाली है कुछ बातें –

ज्योति नायक प्रेसिडेंट लिज्जत पापड़
ज्योति नायक प्रेसिडेंट लिज्जत पापड़
  • ये उद्योग घरों की छत से शुरु होकर विश्वस्तर पर प्रसिद्ध हो चुका है।
  • अभी भी पापड़ों को मशीन से ना बनाकर हाथों से ही बनाया जाता है।
  • आज भी आधे से ज्यादा अशिक्षित महिलाँए यहाँ काम करती हैं।
  • आटा गूंदना, लोई बनाना, पापड़ बनाना, सुखाना और पैंकिग इस पापड़ के मुख्य चरण हैं।

माने या ना माने लेकिन भारतीय महिलाओं के लिये ये काफी सम्मान की बात और ये हौसला भी देती है कि अगर आप अपने हुनर को तलाश लें तो कामयाबी पा सकती हैं | अगर आप भी किसी ऐसे ही रियल हीरो को जानते हैं तो उनकी कहानी हमारे साथ जरुर साँझा करे..

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Shri Mahila Griha Udyog
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लिज्जत पापड़
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Nandini Singh

नंदिनी सिंह ट्रेंडिंगऑवर में एडिटोरियल प्रड्यूसर हैं|

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