‘गज़ब का है ये दिन’ फ़िल्म ‘सनम रे’ से लिरिक्स एंड गाने

‘गज़ब का है ये दिन’ फ़िल्म ‘सनम रे’ से लिरिक्स एंड गाने : गज़ब का है ये दिन अमाल मालिक और अरिजीत सिंह द्वारा गाए इस गाने को कंपोज़ किया है अमाल मलिक ने जबकि सगीत लिखा है मनोज मुन्तशिर ने |

गायक :  अमाल मालिक, अरिजीत सिंह
संगीत:   मनोज मुन्तशिर
बोल:     अमाल मलिक
रिलीज़ कम्पनी : टी सीरीज

 

चल पड़े हैं हम ऐसी राह पे , बेफिक्र हुए के अब जाना कहाँ ,लापता हुए  सारे रास्ते , ढूँढेगा हमें यह ज़माना कहाँ,

यह समा है कैसा , मुस्कुराने जैसा,धीमी बारिशें हैं हर जगह,यह नशा है कैसा,डूब जाने जैसा, जागी ख्वैशें हैं हर जगह

गज़ब का है यह दिन,गज़ब का है यह दिन,

गज़ब का है यह दिन देखो ज़रा (2)

पानी हूँ पानी मैं, हाँ बहने दो मुझे ,जैसा हूँ वैसा ही , रहने दो मुझे,

दुनिया की बंदिशों से , मेरा नाता है कहाँ , रुकना ठहरना मुझको आता है कहाँ|

यह समा है कैसा , मुस्कुराने जैसा,

धीमी बारिशें हैं हर जगह, यह नशा है कैसा, डूब जाने जैसा, जागी ख्वैशें हैं हर जगह

गज़ब का है यह दिन , गज़ब का है यह दिन,

गज़ब का है यह दिन देखो ज़रा (2)

नीली है क्यूँ ज़मीन , नीला है क्यूँ समा, लगता है घास पर सोया आसमान,

यह मस्तियाँ मेरी , मनमानियां मेरी , लो मिल गयी मुझे आज़ादियाँ मेरी,

यह समा है कैसा , मुस्कुराने जैसा , धीमी बारिशें हैं हर जगह, यह नशा है कैसा,

डूब जाने जैसा ,जागी ख्वैशें हैं हर जगह |

गज़ब का है दिन, गज़ब का है येन दिन,

गज़ब का है यह दिन देखो ज़रा (2)

चल पड़े हैं हम ऐसी राह पे , बेफिक्र हुए के अब जाना कहाँ,लापता हुए सारे रास्ते , ढूँढेगा हमें यह ज़माना कहाँ | यह समा है कैसा मुस्कुराने जैसा , धीमी बारिशें हैं हर जगह , येन नशा जैसा , डूब जाने जैसा, जागी ख्वैशें हैं हर जगह, गज़ब का है येन दिन, गज़ब का है यह दिन, गज़ब का ही यह दिन देखो ज़रा (2)

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