विशेष : अब हीरोईन भी हीरो है

लद गये वो दिन जब फिल्में केवल हीरों के इर्द-गिर्द ही घूमा करती थी….अब जमाना जरा बदल गया है….जी हाँ..ऩीरजा, जय गंगाजल जैसी फिल्मों ने ये साबित कर रही है…यह कहना गलत नहीं होगा की पहले जहाँ हीरो ही फिल्म की जान हुआ करते थे वहीं अब हीरोईन भी पूरी फिल्म का भार अपने कंधे पर न केवल उठा सकती है बल्कि उनकी सफलता की गारंटी भी बन गई है…बात करें चाहें जय गंगाजल की या फिर ऩीरजा की…दोनों ही फिल्मों ने डंके की चोट पर ये सिद्ध किया है कि अकेले हीरोइन के दम पर भी दांव खेला जा सकता है….

आखिर क्या है जय गंगाजल और नीरजा में :

आप में से कई ये सोच रहे होंगे की क्यूँ नीरजा और जय गंगाजल इतनी सुर्खियों में रही बावजूद इसके की उसमें कोई हीरो नहीं है..तो आईये जानते हैं कारण..

  • दमदार कहानी :

यह कहना गलत नहीं होगा की चाहे हीरो हो या हीरोइन….दमदार कहानी बहुत जरुरी है किसी भी फिल्म की सफलता के पीछे… अगर कहानी अच्छी होगी और दर्शकों में जागरुकता पैदा करने वाली होगी तो दर्शकों को टिकट खिडकी तक लाने के लिये कोई नहीं रोक सकता है | जय गंगाजल हो या फिर नीरजा..दोनों ही फिल्मों को ट्रेलर ने दर्शकों को बांध लिया था और फिल्म देखने के काफी हद तक मना भी लिया था|ऩीरजा और जय गंगाजल की गंभीर विषयाधारित कहानियों लोगों को पसंद आयी|

  • अभिनय की गंभीरता :

सोनम कपूर और प्रियंका चोपडा को ग्लैमरस गर्म भले ही कहा जाये लेकिन इन फिल्मों में उनके गंभीर और संजीदा अभिनय की तारीफ करने से कोई भी खुद को नहीं रोक सका….. सोनम कपूर के करियर में नीरजा अहम रोल निभा सकती है इस बात को नजरंदाज नहीं किया जा सकता लेकिन वहीं प्रियंका चोपडा विदेशी सीरीयल में अहम किरदार निभाकर सुर्खियां बटोर चुकी है और कहना गलत ना होगा कि जय गंगाजल में उनका अभिनय चाकू की नोंक सा तेज धार रहा है जहां गलती की कोई गुंजाइश नहीं दिखी| सोनम के अभिनय ने जहां सबकी दिल जीत लिया तो वहीं दूसरी ओर प्रिंयका चोपडा के एक्शन सीन्स ने ये साबित किया कि फिल्म में हीरोईन होने का मतलब ये नहीं की दर्शकों को एक्शन सीन्स से महरुम रहना पडेगा|

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तो अब ये भूलना ही होगा कि फिल्म का मतलब है हीरो…कहानी और ग्लैमरस हीरोइन……..फिलहाल हीरोईन..मेन मेन्यू में शामिल हो चुकी है और आने वाले दिनों में शायद इस बात पर चर्चो खत्म भी हो जाये की क्यूँ हीरोईन का मेहनताना हीरो के मुकाबले कम है| नीरजा और जय गंगाजल जैसी फिल्में इस बात का आलर्म है कि आने वाले दिनों में सिनेमा में हीरोईन की न केवल जगह, मेहनताना बल्कि रोल  भी हीरों के बराबर या उससे ज्यादा ही होगा| ये कहना गलत नहीं होगा की न केवल आधुनिक समाज में बल्कि सिनेमा में भी महिलाओं ने अपनी स्थिति में तेजी से बदलाव किया है…खैर ये बात हुई सिनेमाजगत और फिल्मों की…लेकिन आप हमारे साथ अपने विचार शेयर करना ना भूले… आपको ये लेख कैसा लगा या आप इस बारे में क्या सोचते है|

 

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Nandini Singh

नंदिनी सिंह ट्रेंडिंगऑवर में एडिटोरियल प्रड्यूसर हैं|

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