अगर आप लड़की हैं तो “नीरजा” से ये 5 बातें जरुर सीखें

Learning from Neerja Bhanot Life in Hindi: अभी कुछ समय पहले ही स्टार सोनम कपूर की नीरजा मूवी रिलीज हुई थी और कई लोग होंगें जो इससे पहले नीरजा नाम से भी परिचित नहीं होगें…धन्य हों ऐसी फिल्मों का जो हमें ऐसे प्रेरणादायी लोगों से अवगत कराती है…. नीरजा का जीवन हमें क्या सिखाता है ये जानना बहुत जरुरी है…

1. ना गलत काम करो और ना सहो –

भले ही ये शब्द नीरजा के पिता के हों लेकिन ये ही वो शब्द थें जिन्होंनें नीरजा को विपरीत परिस्थितियों में लड़ने की हिम्मत दी। नीरजा का जन्म 1963 में हुआ था और उन्हें प्यार से लाडो कहा जाता था। उनके पिता हरीश भनोट पेशे से पत्रकार थे जबकि मां का नाम रमा भनोट था। नीरजा की शादी एक बिजनेसमैन से हुई थी लेकिन उनका शादी का अनुभव बेहद ही खराब रहा क्योंकि उनकी जैसी महिला को भी दहेज के लिये यातनाएं दी गई थी। इससे  तंग आकर उन्होनें पति का घर छोड़ के मां बाप के पास मुंबई आ गई।

2. हारे नहीं जीवन को दें नयी दिशा –

जीवन ठहरने के लिये नहीं। मुसीबत कितनी भी बड़ी हो अगर आप अडिग है तो अपने जीवन को नयी दिशा दे सकते हैं। पति का घर छोड़ने के बाद उन्होनें अपने जीवन को एक नई दिशा देते हुए मॉडलिंग करना शुरु किया और पैन एम एयरलाइन्स ज्वाइन कर ली।

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3. नीरजा किस तरह थी मानसिक तौर पर मजबूत-
  • उस दिन नीरजा सीनियर पर्सर के तौर पर तैनात थी और विमान ने मूबंई से न्यूयार्क की उड़ान भरी थी जो कि कराची में हाइजैक कर लिया गया था। आतकंवादियों ने विमान को हाईजैक करने के 17 घंटो बाद मारना शुरु किया था
  • लेकिन नीरजा ने अदम्या साहस और सूझबूझ के साथ इमरजेंसी दरवाजा खोलने में सफलता पाई। उन्होनें घबराकर अपने दिमाग का संतुलन नहीं खोया और ये दिखाता है कि वो मानसिक रुप से कितनी मजबूत थी।
  • नीरजा अपने फर्ज के प्रति बेहद ही समर्पित थी और ये ही वजह थी जिसने उन्हें खुद की फिक्र करने से पहले दूसरों की जान बचाने की ओर प्रेरित करती है।
  • नीरजा ने अपनी जान की परवाह ना करते हुए तीन बच्चों को विमान से निकालने के आखिरी समय तक जद्दोजहत की। और इसी कारण वो शहीद भी हुई। ये बेहद ही गौरवान्वित करने वाली बात है कि दुनिया में ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो अपनी जान की परवाह ना करते हुए दूसरों की जान बचाने के लिये आगे आते हैं। अगर नीरजा चाहती तो अपनी जान बचा सकती थी लेकिन उन्होनें ऐसा नहीं किया। नीरजा सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हीरोइन आफ हाइजैक के नाम से जानी जाती है।
4. महिला होने का मतलब “कमजोर” कतई नहीं है –

नीरजा ने उन महिलाओं को अदम्य साहस दिया है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिये प्रयासरत रहती है। और इसी कढ़ी में नीरजा की याद में एक संस्था नीरजा भनोट पैन एम न्यास की स्थापना की गई है जो महिलाओं को उनके साहस और वीरता के लिए सम्मानित करती है और उन्हें आगे बढ़ने के लिये प्रेरित करती है।

5. अपने सपनों को पहचानें और सजायें –

भले ही 23 साल की उम्र तक आने के बाद हममें से कई ये सोचते हैं कि हमें जीवन में किस तरफ बढ़ना है या कौन सा करियर चुनना है लेकिन नीरजा को उम्र के इसी पढ़ाव पर अशोक चक्र मिला और ये पुरस्कार प्राप्त करने वाली वो सबसे युवा और प्रथम महिला थीं।

यदि आप भी नीरजा जी की लाइफ से जुड़े कुछ मजेदार बाते हमारे साथ  शेयर करना चाहते हैं तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स पर कमेंट करे|

फ़ोटो : IE

Summary
Name
नीरजा भनोट
Nickname
(नीरजा)
Job Title
एयर होस्टेज

Nandini Singh

नंदिनी सिंह ट्रेंडिंगऑवर में एडिटोरियल प्रड्यूसर हैं|

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