जींस खरीदते समय रखे इन बातों का ध्यान (जाने जीन्स का इतिहास )

पाठकों को मेरा नमस्कार, इस आलेख को आप पढनें आये हैं तो जाहिर सी बात है आप भी मेरी तरह जीन्स पहनना पसंद करते हैं | जीन्स (जींस) अब युवा पिढी ही नहीं बल्कि हर तबके के लोगों में खासा लोकप्रिय होने लगे हैं | इसमें कोई दो राय नहीं है कि यह पश्चीमी सभ्यता से आये हुए फैशन ट्रेंड है परन्तु 21वी सदी में एशियाई देशों में इसका प्रचालन काफ़ी बढ़ा है |

सबसे पहले जींस के इतिहास के बारे में हम बात करेंगे :

जींस का इतिहास भारत के संदर्भ में : जींस के इतिहास के बारे में हम बात करे तो हम पाते हैं कि 16 वीं शताब्दी की भारतीय निर्यातित मोटा सूती कपडा़ आता था जिसे उस समय डुंगारी कहा जाता था। तथा इसे नील के रंग में रंग कर मुंबई के डोंगारी किले के पास बेचा जाता था। मजदूरों, नाविकों ने इसे अपने अनुकूल पाया और इससे बनी पतलूनें वो पहनने लगे।

जींस के कपडे़ का निर्माण 16वी शताब्दी की शुरुआत मे इटली के एक कस्बे ट्यूरिन के निकट चीयरी में किया गया था। इसेजिसे जेनोवा के हार्बर के माध्यम से बेचा जाता था, जेनोवा (इटली का एक शहर) एक स्वतंत्र गणराज्य की राजधानी थी जिसकी नौसेना काफी शक्तिशाली थी। कहा जाता है कि इस कपडे़ से सबसे पहले जेनोवा की Navy के नाविको की पैंट बनायी गयीं क्योंकि नाविको को ऐसी पैंट चाहिये थी जिसे सूखा या गीला भी पहना जा सके तथा पेंट के निचले हिस्से को पोत के डेक की सफायी के समय उपर को मोडा़ जा सके।

यदि इतिहासकारों की मानें तो इसका नाम कई लोगों के अनुसार जेनोवा के नाम पर पडा़ है। Jeans बनाने के लिये कच्चा माल फ्रांस के निम्स शहर से आता था जिसे फ्रांसीसी मे दे निम कहत थे इसीलिये इस कपडे़ का नाम डेनिम पड़ गया।

आधुनिक जींस का इतिहास :

अमेरिका में जैकब डब्लू.डेविस (Jacob W. Davis) नाम का एक दर्जी था जो अमेरिका की सबसे पुरानी क्लोथिंग कम्पनीयों में से एक लेवी स्ट्रॉस एंड. को. (Levi Strauss & Co.) के लिए काम करता था, ने 1871 पहली जींस बनाई बाद में इसे 20 मई 1873 को पेटेंट करवा लिया गया | शुरुआत के कई सालों तक जींस नीले कलर में ही उपलब्ध हुआ करता था |

द्वितीय विश्वयुद्ध के ख़त्म होते होते अमेरिका, यूरोप और अन्य महादेशों में जींस काफी प्रचलित हो चूका था | ख़ास कर Teenagers के बीच ये खासा लोकप्रिय हो चूका था |

अब बात करते हैं कि जींस खरीदते वक्त किन बातों का ध्यान हमें रखना चाहिए :

(1.) सबसे पहले तीन चीजें हैं जो जींस खरीदते समय हमें ध्यान देनी चाहिए वो है – Comfortability (आरामदायक), Reliable (विश्वसनीयता) और Good Looking (देखने में बढ़िया)|

जींस हम रोज नहीं खरीदते या यूँ  कहे कि एक बार जींस खरीदने के बाद हम उसे कुछ सालों तक तो पहनते ही हैं | यदि जींस आरामदायक ना हो तो हमें परेशानीयों का सामना करना पड़ता है तथा जींस दिखने में अच्छा न हो तो हम उसे पहनना कम कर देते हैं |इसलिए जींस खरीदते वक़्त हमें इन तीनो चीजो का खासा ध्यान रखना पड़ेगा |

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(2.) जींस का साइज़ : किस साइज़ के जींस में आप कम्फर्ट मेहसूस करते हैं ये आपसे बेहतर कोई नहीं जान सकता | साइज़ दो वजहों से महत्वपूर्ण हो जाता है – पहला आप कमर के किस हिस्से से जींस पहनते हैं और दूसरा जींस का ब्रांड क्यूंकि कई बार हम देखते हैं कि ब्रांड बदलने से साइज़ भी बदलता है | सभी ब्रांड के अलग-अलग नाप स्कीम होते हैं |

(3.) जींस के फैब्रिक का ध्यान : ज्यादातर जींस के फैब्रिक कॉटन से ही बने होते हैं, और ये बढियाँ भी होता है | कोशिश करे कि फैब्रिक कॉटन ही हो | जब आप अच्छे ब्रांड्स में जींस खरीदते हैं उसके टैग्स पर आपको दिख जाएगा की उसमे कितना प्रतिशत कॉटन उपयोग हुआ है |

जींस फैब्रिक
जींस फैब्रिक

नोट: कई बार जींस को ज्यादा Strechable बनाने  के लिए डेनिम के साथ लाइक्रा भी मिला दिया जाता है। यदि आपकी जींस में डेनिम का प्रतिशत 90 से 100 न हो, तो वो आरामदायक नहीं होगी। आपको बता दे कि सस्ती और महंगी जींस में डेनिम की क्वॉलिटी और मात्राओं का ही अंतर होता है।

(4.)  स्किनी जींस पतली टांगों वालों पर (ज्यादा पतली नहीं) अच्छी लगती है, क्योंकि यह शरीर से बिल्कुल चिपकी होती है। वैसे इस तरह की जींस लडकीयाँ ज्यादा पसंद करती है |

नोट (लड़कियों के लिए) : यदि आपका Thigs (जांघें) पैरों की तुलना में मोटी हो, आपके लिए गाजर या टेपर्ड बेहतर विकल्प हो सकता है।

Curved jeans
Curved jeans

(5.) जींस का शेप और आपकी पसंद : हर मनुष्य का अलग-अलग Shape और Size होते हैं, इसलिए इस Myth को दूर रखें कि यह उस पर अच्छा लग रहा है तो मेरे पर भी अच्छा ही लगेगा |

फैक्ट्स :  Cargo Jeans को द्वितीय विश्व-युद्ध के दौरान ब्रिटिश सैनिकों के लिए कई जेबों वाली यूनिफॉर्म के तौर पर बनाया गया था। इसकी जेबों में विभिन्न तरह के चीजें जैसे नक्शा, दवाई, आदि जरूरत का सामान रखते थे।

जींस के बारे में क्या कहते हैं विश्व की सबसे बड़ी जींस कंपनी Levi Strauss & Co. के सीईओ चिप बर्ग का :

  • जींस को पानी में धोना नहीं चाहिए बल्कि उसे अलग तरह से साफ करना चाहिए |
  • बर्ग कहते हैं कि एक अच्छी जींस को वाशिंग मशीन में धोने की बिल्कुल जरूरत नहीं होती ऐसा करने से जींस लॉन्ग लास्टिंग कम होगा|

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस लेख में प्रकट किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं।

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Hrituraj Yadav

ऋतुराज एक फैशन ब्लॉगर (Fashion Blogger) और टॉमकैट क्लॉथ इंडिया से सह-संस्थापक हैं |

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