5 बाते जो बनाती है बिहारियों को सबसे अलग

Amazing Facts About Bihari: चाहे आप दुनिया के किसी भी कोने में क्यूँ न बसे हो पर यदि आप भी ” केलवा के पात पर उगेलन सुरुजवा रे केकरा लागे” सुनकर रोमांचित हो जाते हैं और घर की यादे आपके आँखों में आंसू ला देती है तो आप भी उन खुशनसीबो में से एक है जिन्हें मौका मिला उस पवित्र भूमि से जुड़ने का जिसे लोग “बिहार” कहते हैं|

अक्सर लोग बिहार एवं बिहारियों को लेकर काफी गलत धारणा मन में बना लेते हैं| कुछ लोग तो मजाक में यह भी कहते है कि “जहाँ न पहुंचे बैलगाड़ी वहाँ पहुंचे बिहारी”| पर इन सब से उलट जो लोग बिहार से सम्बन्ध रखते हैं या जिनके दोस्त बिहारी हैं उन्हें ये बात भलीभांति पता होगी कि बिना बिहारी के तो मानो ग्रुप अधुरा सा लगता है| आइये डालते है नजर उन 5 बातो पर जो हम बिहारियों को औरो से अलग बनाती है|

(1) मुझे बड़ा होकर IAS बनना है: जी हाँ..जिस तरह गुजरात के बच्चे-बच्चे बड़े होकर टाटा अम्बानी बनने का सपना देखते हैं उसी तरह हम बिहारी भी बचपन से ही इंजिनियर, डॉक्टर अथवा IAS बनना चाहते हैं| अब चाहे आप इसे अन्य करियर आप्शन के प्रति जागरूकता में कमी का नतीजा कहे या फिर समाज के प्रति कुछ कर गुजरने की हमारी मानसिकता मगर 10 में से यदि 6 बिहारी से यह पूछा जाये कि आप बड़ा होकर क्या बनाना चाहते है तो सामने से जवाब आता है IAS..हालाँकि अब इस मानसिकता में थोडा बदलाव जरुर देखने को मिला है और बिहारी अब अन्य फील्ड में भी काफी अच्छा कर रहे हैं| विश्वास नहीं होता तो जरा गूगल करके देख ले|

IAS
IAS

(2) जुगाड़ में नंबर 1: कभी दिवाली अथवा छट पूजा के वक़्त हॉस्टल से घर गए हैं..? अगर गए होंगे तो ट्रेन में सीट न मिलने का दर्द आप भली भांति जानते होंगे| जहाँ एक ओर अन्य लोग सीट नहीं है, ठंडी के छुट्टी में घर चलेंगे इत्यादि जैसे बहाने बना घर जाने का प्लान टाल देते हैं वही केवल बिहारी ही जूझते भीड़ में भी संघर्ष करते हुए घर पहुँच ही जाते हैं। तो क्या हुआ इसके लिए उन्हें बाथरूम के बगल में बैठना परे अथवा कोई जुगाड़ ही लगना परे| आखिर घर जाने का मन बना लिया तो फिर पीछे कैसे हटे|

Special jugad in train
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(3) लिट्टी-चोखा: एक ऐसा लाइट व्यंजन जो आज बिहार की पहचान बन गया है| आग अथवा उपले में सेंके गए गरमा-गरम लिट्टी के साथ जब स्वादिष्ट चोखा परोसा जाये तो फिर न कहने का कोई बहाना ही नहीं रह जाता| आज अपने स्वाद के ही बदौलत लिट्टी चोखा बिहार से बाहर निकल धीरे-धीरे पुरे भारत को अपने स्वाद एवं टेस्ट का दीवाना बना रहा है|

Litti Chokha
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(4) छट पूजा: छठ पूजा का वो पवित्र माहौल और शारदा सिन्हा के आवाज़ में गूंजती गीतों के बीच खुद को घर एवं घाट से दूर रख पाना लगभग असंभव सा हो जाता है| आस्था एवं धरम के महासैलाब के द्वारा प्रत्यक्ष रूप से सूर्य देव को धरती पर जीवन को संभव बनाने हेतु धन्यवाद प्रकट किया जाता है| भाई एक बार तो छठ माई की जय बोलना ही परेगा|

Chhath puja
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(5) बेमिशाल भाषा शैली: हम बिहारियों की एक खास बात है कि हम “मै” के जगह पर “हम” का प्रयोग करते हैं| वही हमारी कुछ लोकल बोल जब हिंदी के साथ मिक्स होती है तो सुनने में बड़ा ही मजा आता है| भले ही बाहर वाले हमारे भाषा को थोडा असभ्य समझे परन्तु कही न कही रे, बुरबक, पगला गए हैं क्या, जैसे वर्ड हमें भीतर से जरुर रोमांचित कर देती है| यही वजह है कि आज बॉलीवुड एवं टीवी सीरियलों में बड़े पैमाने में बिहारी भाषा का प्रयोग किया जा रहा है जिसे दर्शक काफी ज्यादा पसंद भी कर रहे हैं|

Bihari language
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