ऐसे पाए पेट के कीड़ों से छुटकारा

ज्ञात हो की भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बच्चो के पेट में कृमियों (कीड़ो) की समस्या को दूर करने के लिए बीते 10 फरवरी को देश भर में नेशनल डीवार्मिंग डे का आयोजन किया था एवं इस दिन देश भर के स्कूलों एवं प्री-स्कूलों में पढने वाले बच्चो के पेट में कृमियों की समस्या से छुटकारा दिलाने हेतु Albendazole (400 mg) नामक दवा भी वितरित की गयी थी.

बताते चले की पुरे दुनियां में 1 से 14 साल तक के बच्चो के पेट में कृमियों से होने वाले दर्द एवं शिकायतों में भारत सबसे आगे हैं. ये आंकड़े थोड़े चिंताजनक जरुर हैं. बच्चो के पेट में कृमियों की समस्या एनीमिया एवं कुपोषण के आलावा कई अन्य शारीरिक एवं मानसिक समस्याएं भी पैदा कर सकती हैं परन्तु घबराने की कोई बात नहीं क्योकि कुछ सावधानियों एवं जागरूकता के फलस्वरूप इस समस्या का निदान पाया जा सकता हैं. पेश हैं एक रिपोर्ट.

कृमि के प्रकार:

बच्चो के पेट में प्रमुख रूप से तीन तरह के कृमि पाये जातें हैं. पहला हुक वर्म, दुसरा हैं राउंड वर्म एवं तीसरा हैं टेप वर्म. ये कृमि प्रदुषित पदार्थ खाने एवं अस्वच्छ हाथो से खाद्य पदार्थ लेने से हमारे शारीर में प्रवेश करती हैं.

कृमि से जन्मी परेशानियाँ:

साधारणतया कृमि की वजह से पेट में असहज दर्द की शिकायत होती हैं एवं कभी कभी खाने से भी मन ऊब सा जाता हैं. कृमि से उपजी बीमारियों में एनीमिया, कुपोषण, एवं अन्य शारीरिक एवं मानसिक समस्यायें प्रमुख हैं. आपकी आंतो में मौजुद कृमि आपके आवश्यक पोषक तत्वों को खीँच आपको कमजोर बना देतें हैं. छोटे बच्चो में इससे थकावट आने लगती हैं एवं पढाई से भी उनका मन भरा भरा सा लगने लगता हैं. आयरन एवं अन्य तरह के विटामिन की कमी हो जाने की वजह से उनके शारीरिक विकास में भी बाधाए आ सकती हैं.

 कैसे करे रोकथाम:

कृमि सम्बंधित किसी भी तरह के विकार में Albendazole (400 mg) को पानी में घोल कर पिला सकते हैं. साथ ही समस्या बढ़ने पर आप विशेषज्ञों की भी सलाह ले सकते हैं. इसके अलावा इन आदतों को अपने जीवन शैली में ढाल आप भविष्य में ऐसे परेशानियों से भी बचे रह सकते हैं.

  • किसी भी खाद्य पदार्थ को खाने से पहले कृपया कीटाणुनाशक साबुन से अच्छी तरह से हाथ धोना न भूले.
  • ध्यान दे की बच्चे शौचालय में ही मल त्याग करे एवं मल त्यागने के तुरंत बाद अच्छी तरह से साबुन से हाथ धोना न भूले.
  • बच्चो को गीली मिट्टी, कूड़ा- करकट एवं अन्य गंदगी वाली जगहों में नंगे पाँव न जाने दे.
  • सुनिश्चित करे की बच्चे हमेशा चप्पल पहन कर ही बाहर निकले एवं साथ ही किसी भी तरह की शिकायतों में तुरंत डॉक्टरी सेवा का उपयोग करे.

 

 

Tredinghour

THNN (Trendinghour News Network).

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