मात्र एक ब्लड टेस्ट से अलजाईमर के खतरे को टालें

आज के इस भागम-भाग भरे संसार में जहाँ देखो लोग अपनी चाहत को अंजाम देने में लगे रहते हैं | ऐसे में दिन प्रतिदिन अलजाईमर के रोगियों में भी अच्छी खासी बढ़ोतरी हुयी है | परन्तु शुरुआत में किसी ऐसे परिक्षण के अभाव में इस रोग का पता नहीं चल पाता है इस रोग के बारे में प्रारंभिक चरणों में कुछ कहा नहीं जा सकता परन्तु यदि वक़्त रहते इसका इलाज नहीं कराया गया तो आगे जाकर ये डीमेंसिया जैसे खतरनाक रोगों को भी जन्म दे सकता है |

अभी हाल ही में जर्मनी के कुछ शोधकर्ताओं द्वारा किये गए एक शोध की मानें तो अब मात्र एक ब्लड टेस्ट के द्वारा ही इस रोग के बारे में पता लगाया जा सकेगा | यह जाँच इन्फ्रारेड सेंसोर्स (infrared sensors) की मदद से इम्यूनो-केमिकल विश्लेषण पर आधारित होगी |

सतह पर एक विशेष तरह का एंटीबाडीज का लेप लगा होगा | ये सेंसोर्स लेप के द्वारा खून या फिर सरेब्रोस्पाईनल फ्लूइड  (मस्तिष्क और स्पाइनल कोर्ड से निकलने वाला तरल पदार्थ) से अलजाईमर का बायो-मार्कर लेगा |

उसके बाद ये सेंसोर्स बायो-मार्कर्स में हुए परिवर्तनों से इस बात की समीक्षा करेंगे की अलजाईमर का खतरा है की नहीं|

यहाँ पाठको को ये बताते चलें की अलजाईमर के खतरे का पता लगना आसान नहीं होता एवं अमूमन इसके बारे में पता चलने में 10 से 15 साल का वक़्त लग जाता है | आगे जाकर ये बीमारी स्मृति-लोप को भी जन्म दे सकती है |

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Photo : strongfigure

Tredinghour

THNN (Trendinghour News Network).

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