क्या न्यूज देखते समय आप रिमोट अपने पास रखते हैं ….??

न्यूज चैनल खोलते ही आपको जो हेडलाइन्स या फिर खबरें देखने को मिलती हैं | वो कुछ इस तरह की होती हैं…मारपीट, हत्या, डकैती, चोरी, ब्लातकार वगैरह वगैरह… क्या न्यूज का मतलब सिर्फ यही है कि हम लोग सिर्फ नकारात्मकता वाली खबरें देखते रहें… क्या न्यूज का मतलब ये नहीं है कि दर्शकों को सामने कुछ अच्छा और सकारात्मक परोसा जाए…

अब्दुल कलाम जी ने भी एक बार कहा था कि देश की मीडिया को सकारात्मक चीजें दिखाने में इतना परहेज क्यूँ है… क्या दर्शकों को सकारात्मक खबरें देखकर खुद आश्वासन देने का हक नहीं है कि कुछ तो अच्छा हो रहा है |

funny alien news

ये बात सही है कि नकारात्मक खबरों से शुतुरमुर्ग की तरह रेत में गड्डा खोदकर मुंह दबाकर नहीं बचा जा सकता है और ना ही इससे कोई समस्या हल हो सकती है… लेकिन लगातार नकारात्मक खबरें दिखाने से भी स्थिति में कोई बहुत बड़ा फर्क नही आ जायेगा बजाय टीआरपी रेटिंग बढ़ाने में। और अगर देश को कुछ अच्छा बनाने में मदद करनी है या फिर अपने आस-पास का माहौल अच्छा बनाने में हेल्प करनी है तो कुछ तो ऐसा दिखाना ही पड़ेगा जो कम से कम ये संदेश दे कि हालात अभी इतने भी नही बिगड़े…किसी ने सही कहा है किसी से कुछ भी छीन लो लेकिन उम्मीद नहीं…क्योंकि उम्मीद कुछ न होने में भी कुछ होने का आभास कराती है और कोई ना कोई रास्ता निकल आने की वजह भी बनती है।

अगर हम प्राइवेट चैनल्स से हटकर लोकसभा, दूरदर्शन जैसे चैनलों पर नजर डालें तो समझ में आता है कि न्यूज का असली महत्व क्या है। ऐसा इसलिए नहीं है कि ये सरकारी चैनल है और सिर्फ खुद की छवि को साफ-सुथरा दिखाने में ही भलाई समझते हैं बल्कि इनके मुद्दे जायज हैं वो आम लोगों की जिंदगी से कहीं ना कहीं जुड़ते हैं और उनको टच करते हैं…ऐसे न्यूज चैनल्स को देखते समय आपको इस बात की टेंशन लेने की आवश्यकता नहीं है कि क्या होगा कि अगर कोई खबर अवैध संबंधों या फिर गैंगरेप से जुड़ी हुई हो और आपको टीवी चैनल बदलना पड़े क्योंकि आप परिवार के साथ बैठे हुए हैं…ना जाने कितने लोग टीवी का रिमोट हाथ में इसलिए लिए हुए बैठे रहते हैं ताकि असहनीय न्यूज से सामना ना हो…लेकिन न्यूज चैनल वाले ये बात कहाँ समझने वाले हैं |

funny news headlines about dhoni
इंडिया न्यूज़ के डबल मीनिंग हेडलाइंस

लेकिन अगर बात करें विज्ञापनों की तो उन्हें ये बात बहुत ही अच्छे से समझ आ गई है… और शायद यही वजह है कि उन्होनें अपने विज्ञापनों में काफी सुधार किया है यानी समाज के प्रति जिम्मेदारी और व्यवसाय दोनों एक साथ किये जा सकते हैं,…Wheel, Pearls, इलायची, ghadi Detergent कुछ ऐसी कंपनियाँ जिन्होनें कहीं ना कहीं विज्ञापनों की परिभाषा बदल कर रख दी है क्योंकि उन्होंने समाज में सफाई, दूसरों की सहायता और भारत के सफाई अभियान को भी जोड़ दिया यानी एक साथ दो ऐम टारगेट किए हैं |

जब आप अपने आस-पास अच्छा देखते हैं तो अच्छा करने के लिये प्रेरित भी होते हैं और कहाँ जायेंगे हम अपना ही इलाका गंदा करके जहाँ सब लोग एक दूसरें को शक की नजर से देखें… अपने आस-पास की खबरों को दिखाना न्यूज चैनल्स का काम है लेकिन किसी भी संवेदनशील खबर को बार-बार और लगातार दिखाना गलत है |

 

Summary
Review Date
Reviewed Item
क्या न्यूज देखते समय आप रिमोट अपने पास रखते हैं
Author Rating
51star1star1star1star1star

Nandini Singh

नंदिनी सिंह ट्रेंडिंगऑवर में एडिटोरियल प्रड्यूसर हैं|

Leave a Reply