जाने MRP को लेकर अपने अधिकारों को

कर्मप्रधान हमारे समाज में किसी भी संसाधन की आपूर्ति हेतु हमारे संविधान ने एक विकसित एवं सुदृढ़ बाज़ार-व्यवस्था की स्थापना की है, जहाँ दुकानदार, ग्राहकों को उनकी मांग की आपूर्ति कर अपनी जीविका कमाते हैं. यहाँ किसी भी चीज़ की आवश्यकता हमें बाज़ार तक तो ज़रूर खीँच ले जाती हैं परन्तु क्या आपको पता है कि एक ग्राहक के रुप में भी हमारी सरकार ने हमे कुछ बेसिक कंज्यूमर राइट्स दिए हैं. परन्तु एक निश्चित मार्गदर्शन एवं उचित जागरूकता अभियान की कमी के फलस्वरूप अक्सर ग्राहकों को बाज़ार में दुकानदारो द्वारा ठगते एवं बरगलाते हुए देखा जाता हैं. अक्सर हमारी सारी जागरूकता MRP के ऊपर मोल भाव तक जाकर ही रुक जाती हैं. परन्तु क्या आपको पता हैं की सामानों की विविधता से ले कर आपके मांगो की आपूर्ति तक की ज़िम्मेदारी भी आपके मौलिक अधिकार में शामिल हैं.

आइये डालते हैं एक नज़र उन तमाम अधिकारों पर जो की एक ग्राहक के रूप में सरकार ने हमारे अधिकारों की रक्षा करने हेतु बनाए है. पेश है एक रिपोर्ट :

1. राईट टू सेफ्टी: राईट टू सेफ्टी के तहत किसी भी ज़हरीली अथवा स्वास्थ्य सम्बंधित विकारो को जन्म देने वाली किसी भी तरह की वस्तुओ को बाज़ार में बेचने से रोकना एवं ग्राहकों के स्वास्थ्य को पहली प्राथमिकता देना ही हमारा मुख्य उद्देश्य है. हेल्थकेयर, फार्मास्यूटिकल एवं फ़ूड प्रोसेसिंग जैसे सेक्टर्स का हमारे स्वास्थ्य से सीधा संपर्क होता है अतः ऐसे सेक्टर में ग्राहकों को उत्तम गुणवत्ता वाली वस्तु एवं सेवाए मिल पाए ऐसा सुनिश्चित किया जाता है. ध्यान दे राईट टू सेफ्टी के तहत आप किसी भी तरह की ऐसी वस्तुओ के प्रति कंपनी के विरुद्ध शिकायत कर सकते हैं |

2. राईट टू इनफार्मेशन: किसी भी वस्तु अथवा सामान की गुणवत्ता,मात्रा, शुद्धता, शुल्क एवं निर्माण-अवधि की पूरी जानकारी अपने ग्राहकों को देना कंपनी की ज़िम्मेदारी होती हैं. सामानों में इन जानकारियों को दे आप ग्राहकों की मांग को थोड़ा और बेहतर तरीके से पूरा कर सकते हैं|

3. राईट टू चूज: कल्पना कीजिये की अगर टूथपेस्ट सिर्फ कोलगेट कंपनी ही बनाती तो हम पेप्सोडेंट का नाम कभी भी सुन पाते क्या? राईट टू चूज के तहत बाज़ार-व्यवस्था को उपभोगताओ को किसी भी विशिष्ट सामान के अलग अलग वैरायटी उपलब्ध करानी होती हैं ताकि ग्राहकों को अपने मनपसंद सामान एवं अपनी मांग के अनुसार चुनाव करने की आज़ादी मिल सके |

4. राईट टू रेड्रेस्सल: ग्राहकों को उनकी मूलभुत सुविधाओ को मुहैया करने हेतु सरकार ने हर जिले में एक कंज्यूमर-कोर्ट की स्थापना की है जहाँ ग्राहकों को उनकी शिकयतो का पूर्ण समाधान मिल सके. राईट टू रेड्रेस्सल के तहत ग्राहकों को उनके द्वारा कंपनी के विरुद्ध की गयी शिकायतों को सुन कर उन पर अविलम्ब कार्यवाही करने का आश्वासन मिल सके |

5. राईट टू बी हर्ड: कम्पीटीशन से भरे इस मार्किट में बने रहने हेतु कीमत एवं गुणवत्ता के साथ-साथ ग्राहकों के सुझाव को भी नदर-अंदाज़ नहीं किया जा सकता. राईट टू बी हर्ड के तहत हर कंपनी को अपने विषय वस्तु एवं सेवाओ के बारे में अपने कंज्यूमर के विचारो एवं सुझावों को साँझा करने हेतु उपरोक्त सहायता करने का आश्वासन दिया जाता हैं ताकि ग्राहक के पसंद-नापसंद को बेहतर ढंग से बाज़ार में पहुचाया जा सके |

6. राईट टू कंज्यूमर एजुकेशन: हम सबको पता हैं की शिक्षा एवं जागरूकता किसी भी परेशानी में हमारी कितनी मदद कर सकती हैं. ग्राहकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना हमारे संविधान का मौलिक अधिकार हैं. बहुत सारी सरकारी एवं गैर- सरकारी संस्थाए समय-समय पर ग्राहकों को उनके अधिकारों से रूबरू कराने हेतु जागो ग्राहक जागो जैसे अभियानों एवं जागरूकता शिविरों का भी आयोजन कर ग्राहकों को उनके अधिकारों के प्रति शिक्षित एवं जागरूकरेंक करती रहती है |

याद रखे की एमआरपी में मोल भाव करना ही बस हमारा अधिकार नहीं वरन ग्राहक के रूप में भी हमारे संविधान ने हमे और भी दूसरे अधिकार दिए हैं अतः हम आप सब से ये ही  अनुरोध करते हैं की आप अपने इन अधिकारों का पूर्ण फायदा उठा अपने जागरूक भारत के स्वप्न को थोड़ा और उज्जवलित करने की कोशिश |

Tredinghour

THNN (Trendinghour News Network).