व्यंग: दिल्ली में Fogg नहीं Smog चल रहा है..

TV में एक ऐड आता है जिसमे एक पाकिस्तानी सैनिक सीमा की पहरेदारी करते वक़्त भारतीय जवान से पूछता है कि “और जनाब क्या चल रहा हैं..?” इसपर भारतीय जवान कहते हैं  “यहाँ इंडिया में तो Fogg चल रहा है..“| उसके बाद तो मानो पुरे भारत ने इसे अपना नया Tagline बना लिया| कही भी कोई कुछ भी पूछते तो लोग हस्ते हुए यही कहते  कि “यहाँ तो Fogg चल रहा है”| मगर दिल्ली के मौजूदा हालत को देखते हुए तो यही लग रहा है कि “दिल्ली में Fogg नहीं Smog चल रहा है|”

जी हाँ..दिल्ली में सरकार किसी की भी रहे मगर उनकी सबसे बड़ी चुनौती रहती है कि किस तरह से दिल्ली के प्रदुषण पर काबू पाया जा सके| अभी हाल ही में आप सरकार ने दिल्ली के प्रदुषण को कम करने हेतु ओड-इवन का सुझाव दिया था जिसे जनता ने उतना पसंद नहीं किया| मगर 17 साल के दिल्ली के इतिहास में पहली बार Smog एवं प्रदुषण के चलते लगभग 1800 Schools की छुट्टी इस बात के तरफ संकेत करती है कि अब हम सबको राजनीती से ऊपर उठकर दिल्ली के लिए कुछ जरुर सोचना पड़ेगा|

दिवाली में फटे बम-फटाको के बीच अब दिल्ली में ऐसा माहौल बन गया है कि ठण्ड से पहले ही धुंद ने पूरी दिल्ली को अपने चपेट में ले लिया है| विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली के हवा में PM 2.5 का परिमाण पिछले 17 सालो के अपने रिकॉर्ड स्तर में पहुँच चूकी है जो WHO (World Health Organisation) के स्टैण्डर्ड से लगभग 70 गुना ज्यादा है|

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बताते चले कि कभी दिल्ली की गिनती विश्व के सबसे गंदे शहरों में की जाती थी| मगर देश के राजधानी की इज्जत बचाने के लिए बड़े परिमाण में पेड़ लगाये गए एवं डीजल-पेट्रोल गाड़ियों को हटाकर CNG गाड़ियाँ लायी गयी| मगर इतने सालो बाद भी आज परिणाम कुछ नहीं निकलता दिख रहा| वही दिल्ली के मुख्य-मंत्री केजरीवाल जी का कहना है कि पंजाब एवं हरयाणा में मिटटी की उर्वरा शक्ति बढाने के लिए जलाये गए फसल के वजह से आज दिल्ली की ये अवस्था हुई है|

खैर एक जिम्मेदार नागरिक के नाते हम सब पोलिटिकल प्रोपोगेन्डा से दूर लोगो से बस यही गुजारिस करते है कि अपने दिल्ली को यूँ बर्बाद न होने दे| साथ ही हमारी टीम लोगो को  “Clean and Green Delhi” के सपनो को पूरा करने के लिए अपना योगदान अवस्य देने हेतु प्रेरित भी करती है| अब समय आ गया है जब हमें अधिक से अधिक पेड़-पौधे के वृक्षारोपण एवं कार-पूलिंग जैसे सिधान्तों पर और जोड़ देना परेगा वरना वो दिन दूर नहीं जब दिल्ली दिलवालों की नहीं बल्कि कचरेवालों की ही बनकर रह जाएगी|

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