इंजीनियरिंग के छात्रो को देना पड़ेगा ‘Exit Test’ फिर मिलेगी डिग्री

नई दिल्ली : भाई बहुत दिनों बाद हम इंजिनियरों के मतलब की एक खबर आई हैं| खबर यह है कि ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) से मान्यता प्राप्त सभी सरकारी और गैर-सरकारी प्रोद्योगिकी संस्थानों के विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग डिग्री पाने के लिए अब अंतिम वर्ष में एक “Exit Test” परीक्षा देनी पड़ेगी | अरे डरिये नहीं..!! 8 सेमेस्टर में कुल 100 से भी अधिक छोटे-बड़े सेमेस्टर एग्जाम देने के बाद जब हौसला और जोश दोनों जवाब वैसे में AICTE का यह नया फरमान निश्चित रूप से थोडा डराने वाला लग सकता हैं| परन्तु ध्यान देने लायक बात यह है कि इससे छात्रो के स्किल्स की परख हो सकेगी और यह अनुमान लगाया जा सकेगा की वाकई में बच्चे इस डिग्री के लायक है भी की नहीं|

हालाँकि इस निर्णय को अंतिम रूप अगले सप्ताह होने वाले AICTE के मीटिंग के बाद ही मिल सकेगी |गौरतलब है कि भारत में AICTE से मान्यता प्राप्त 3000 से ज्यादा प्राद्योगिकी संस्थान है, जहाँ से एक अनुमान में मुताबिक हर साल 7 लाख से ज्यादा बच्चे इंजीनियरिंग करते हैं जिनमे से मात्र 20-30 फीसदी को ही जॉब मिल पाता है | इंजीनियरिंग डिग्री के नाम पर हर साल देश भर के तमाम इंजीनियरिंग कॉलेज बच्चों को एक बेहतर भविष्य देने हेतु जो वायदे करते है वो अंतिम साल में आते-आते दम तोड़ देती हैं| ऐसे में AICTE का यह कदम निश्चित रूप से उन दलीलों पर नकेल कसने का काम करेगी|

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इस टेस्ट के माध्यम से हम चाहते हैं कि बच्चों के Aptitude, Critical Thinking और अन्य Skills को जाँच सके | Exit एग्जामिनेशन इन मानकों को जांचेगी | इस टेस्ट से हमें कॉलेजों के टीचिंग स्टैण्डर्ड का भी पता लगेगा | – MHRD अधिकारी

बोर्ड इसपे भी विचार कर रही है कि क्यों ना Graduate Aptitude Test in Engineering (GATE) सभी टेक्निकल संस्थानों के स्टूडेंट्स के लिए अनिवार्य कर दिया जाए | इससे संस्थानों के शिक्षा का स्तर और भी बढेगा |यहाँ आपको बता दें कि GATE एक ऑल इंडिया स्तर का एग्जाम होता है जिसे पास कर Indian Institute of Science Bangalore सहित सभी Indian Institute of Technology के स्नाकोत्तर (M.Tech) कोर्स में दाखिला मिलता है |इस से पहले ही Medical Council of India (MCI) ने सर्कुलर जारी कर दिया था कि मेडिकल कॉलेज के छात्रो को कोर्स के आख़िरी साल में एक एग्जाम पास करना पड़ेगा तभी उसे डॉक्टर की उपाधि दी जाएगी |

ट्रेंडिंगऑवर ने इस संदर्भ में नॉएडा के मशहूर कैरियर काउंसलर राजेश मिश्रा से बात कि, बकोल मिश्रा – अकेले दिल्ली और दिल्ली के आस-पास 200 से ज्यादा टेक्निकल संस्थान है जहाँ से हर साल लाखों स्टूडेंट इंजीनियरिंग करते हैं | इनमे से 20-25 % बच्चें कैंपस से ही Placed हो जाते हैं | बाकी बचे बच्चों के लिए जॉब लेना मुश्किल हो जाता है उन्हें विभिन्न तरह के समस्याओं का सामना करना पड़ता है | इसके मूलतः दो कारण हैं पहला बच्चों में दाख़िले के पहले पूर्ण रूप से कोर्स के प्रारुप के बारे में पता नहीं होना तथा दूसरा उनके चार साल के इंजीनियरिंग पढाई के दौरान Core सब्जेक्ट का ज्ञान नहीं होना |

फ़ोटो साभार : लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी

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THNN (Trendinghour News Network).

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