तो इस वजह से दुर्योधन ने नहीं लिया द्रौपदी स्वयंवर में हिस्सा

Facts about Draupadi Swayamvar in Hindi: जीवन में कर्म एवं एक आदर्श चरित्र की महत्वता का गुणगान करती हमारे धरमग्रंथों में यूँ तो कई ऐसे आदर्श हुए हैं जिन्होंने हमारे समाज को एक नया आयाम दिया परन्तु यदि बात हो महाभारत की और उसमे दुर्योधन का नाम न लिया जाये ऐसा भला कहीं हो सकता है क्या…?

जी हाँ..यूँ तो दुर्योधन का नाम सुनते ही दिमाग में छल एवं कपट वाले राजा की छवि सामने आ जाती है परन्तु क्या आपको पता है कि दुर्योधन अपने पत्नीव्रता के लिए काफी विख्यात थे | बात तब कि है जब द्रौपदी के स्वयंवर के लिए दूर-दूर से राजा महाराजा अपने साहस एवं पराक्रम का परिचय दे द्रौपदी से विवाह करने की इच्छा लिए स्वयंवर में सरीक होते हैं ऐसे में महाबली दुर्योधन को भी स्वयंवर में आने का निमंत्रण भेजा जाता है परन्तु बताते चले कि दुर्योधन का अपने स्त्री भानुमती से अगाध प्रेम की वजह से इस स्वयंवर में सरीक नहीं हुए |

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राजकुमारी भानुमती से विवाह के समय उन्होंने कलिंग की राजकुमारी को ये प्रण दिया था कि वो आजीवन उन्ही के होकर रहेंगे एवं कभी भी परायी स्त्री पर बुरी नजर नहीं डालेंगे अथवा दूसरी शादी नहीं करेंगे | भाई मानना पड़ेगा आजकल के मॉडर्न पती दुर्योधन से ये गुण तो सिख ही सकते हैं | धन्य हैं ऐसे पती के प्यार को |

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) :   इस लेख में प्रकट कि गयी जानकारी लेखक द्वारा गहन अध्यन एवं रिसर्च के पश्चात दी गयी है. रीडर्स ध्यान दे कि कुछ तथ्य जुटाने हेतु महाग्रंथो के विभिन्न अध्यायो से मदद ली गयी है. ऐसे में रीडर्स से अनुरोध है कि वे लेख पढ़ते वक़्त किसी भी तरह से विचलित न हो. हमारा उद्देश्य किसी भी तरह से धार्मिक आस्था को आहत करना नहीं है..

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फोटो साभार: deviantart

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