जब महादेव के सरंक्षक नन्दी ने रावण को दिया था श्राप

When Nandi Cursed Ravana in Hindi: आप चाहे माने या न माने परन्तु आपका अहंकार आपके सारे सद्गुणों को ढक एक दिन आपके काल की वजह बन सकता है कम से कम रामायण के किरदार रावण से तो हमें यही सिख मिलती है | जी हाँ..रावन..वेद एवं शास्त्रों के महाज्ञाता, महान वीणावादक, शौर्य एवं पराक्रम की धुरी एवं महादेव के परम उपासक रावण |

अपने आराध्य महादेव को प्रसन्न करने के लिए रावण सदैव यज्ञ एवं आहुतिया दे अपने महादेव को मनाने की कोशिश करते रहते थे | ऐसे में महादेव द्वारा मिली शक्तियों से उनका प्रभाव और भी ज्यादा बढ़ गया था जो कि उनके अहंकार की एक बड़ी वजह थी | अपनी इन्ही शक्तियों एवं महादेव के प्रति अटूट आस्था को ढाल बना वे स्वयं महादेव को कैलाश छोड़ लंका नगरी आ बसने के लिए बाध्य करने लगे |

लंका जीतने के बाद एक बार फिर जब रावण महादेव को मनाने के लिए कैलास पहुँचे तो द्वार में खड़े नन्दी ने ये कहकर उनका रास्ता रोक दिया कि महादेव अभी अपनी साधना में व्यस्त हैं | इस बात से रुष्ट हो रावण ने इसे अपने अहम् से जोड़ नन्दी को कड़ी चेतवानी दी कि यदि नन्दी जी ने उनका रास्ता नहीं छोड़ा तो परिणाम काफी घातक हो सकता है | परन्तु महादेव के परम नन्दी को कुछ करने की रावण का क्या विसात | ऐसे में वे क्रोधित होकर नन्दी को चिढाने लगे |

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इस बात से अति रुष्ट हो नन्दी ने रावण को ये श्राप दिया कि “ हे रावन तुझ में बहुत अहंकार है और याद रखना एक दिन तेरा ये अहंकार ही तेरे काल की वजह बनेगा और तेरी समस्त नगरी का नाश एक वानर के हाथों होगा”. खैर वो दिन भी आया जब महाबली हनुमान ने अपने साहस एवं शौर्य के बल पर समस्त लंका को जला नन्दी की बातों पर मुहर लगा दी |

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) :   इस लेख में प्रकट कि गयी जानकारी लेखक द्वारा गहन अध्यन एवं रिसर्च के पश्चात दी गयी है. रीडर्स ध्यान दे कि कुछ तथ्य जुटाने हेतु महाग्रंथो के विभिन्न अध्यायो से मदद ली गयी है. ऐसे में रीडर्स से अनुरोध है कि वे लेख पढ़ते वक़्त किसी भी तरह से विचलित न हो. हमारा उद्देश्य किसी भी तरह से धार्मिक आस्था को आहत करना नहीं है..

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फोटो साभार: deviantart

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