जब प्रभु राम ने दी गिलहरी को उनकी सफ़ेद धारियाँ

How Squirrel got its Stripes in Hindi: जब भी आप कभी पार्क या किसी जू में घुमने जाते हैं तो वहाँ छोटी सी प्यारी गिलहरियों को देख आपका आनंद जरुर अपने चरम पर पहुँच जाता होगा | मूंगफली एवं खाने की किसी चीज पर टूट पड़ने वाली इन नन्ही सी जान की के ऊपर आपने सफ़ेद धारियाँ भी बेसक देखी होंगी परन्तु क्या आपको पता है कि इन धारियों के पीछे भी एक काफी रोचक कहानी है..

तो भाई बात तब की है जब हनुमान जी लंका से लौट ये पक्का कर देते हैं कि माता सीता लंकेश के ही चंगुल में हैं एवं बिना लंका पर चढ़ाई किये हम माता सीता को कभी नहीं छुड़ा पाएंगे | परन्तु इस विशाल समुन्द्र को सेना पार करें तो कैसे | ऐसे में नल एवं नील को ये जिम्मेदारी सौपी जाती है इस समुन्द्र में पुल बांधने की |

समस्त सेना पत्थरों पर प्रभु राम का नाम लिख उसे पानी में फेंकते हुए पुल का निर्माण करते हुए आगे बढ़ रहे थे | ऐसे में छोटी गिलहरियाँ भी पीछे क्यों रहे भला | वे भी अपने साथ थोड़े रेत उठाकर कार्य में हाथ बटा रही थी परन्तु वानर उनकी इस मुट्ठी भर मदद का मजाक उड़ाने लगे |

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इस बात से रुष्ट हो जब गिलहरियाँ प्रभु राम के पास वानर की शिकायत करने पहुँची तब उनकी श्रद्धा से मोहित हो प्रभु राम उनको प्यार से दुलार करते हैं | शास्त्रों के अनुसार राम की अँगुलियों के वही निशान आज गिलहरी के ऊपर सफ़ेद धारी के रूप में चिन्हित है |

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) :   इस लेख में प्रकट कि गयी जानकारी लेखक द्वारा गहन अध्यन एवं रिसर्च के पश्चात दी गयी है. रीडर्स ध्यान दे कि कुछ तथ्य जुटाने हेतु महाग्रंथो के विभिन्न अध्यायो से मदद ली गयी है. ऐसे में रीडर्स से अनुरोध है कि वे लेख पढ़ते वक़्त किसी भी तरह से विचलित न हो. हमारा उद्देश्य किसी भी तरह से धार्मिक आस्था को आहत करना नहीं है.

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