तो ये कारण है भारत में तेल महँगे होने के

खाने पीने कि चीजों का हमारी जिंदगी में काफी महत्वपूर्ण योगदान रहता है, चीजें जड़ा सी महँगी हो जाये हम परेशान हो जाते हैं | इनके अलावा कुछ चीजें ऐसी हैं जिनसे हम अपना पीछा नहीं छुड़ा सकते जी हाँ हमारी रोज मर्रा की जिंदगी में उपयोग होने वाली ईंधन|

भारत में आप जितना खर्च आप तेल पर करते हैं, उसका 50% से ज्यादा रुपए टैक्सों के रूप में गवर्मेंट के पास जाता है|

how price of oil decide
source: बीबीसीहिंदी

2008 में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की कीमतों में खासा इजाफ़ा हुआ था, तब केंद्र सरकार ने एक्साइज़ ड्यूटी को बिल्कुल कम कर दिया था| ऐसा करके उन्होंने आम लोगों पर पड़ने वाले बोझ को कम किया| 2014 के आते-आते तेल की कीमतें लुढ़कीं लेकिन सरकार ने इसे कमाई का ज़रिया बनाने का मौक़ा नहीं छोड़ा|

बीबीसीहिंदी के एक रिपोर्ट में इस बात पे जोड़ दिया गया है की क्या मापदंड होते हैं केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार के विभिन्न टैक्स लगाने के|

tax on oil in states of india
source:बीबीसीहिंदी

“पेट्रोल के असल मूल्य को छोड़ दें तो इस पर दो बड़े टैक्स लगाए जाते हैं- केंद्रीय एक्साइज़ ड्यूटी और राज्यों का वैट (वैल्यू ऐडेड टैक्स), इनकी वजह से ग्राहक को तेल की वास्तविक क़ीमत से दोगुना अधिक रकम देनी पड़ती है.”

भाजपा के ऊर्जा मामलों के सलाहकार और विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा का कहना है “केंद्र सरकार के लिए इससे मिलने वाली एक्साइज़ ड्यूटी काफ़ी महत्वपूर्ण है, इससे मिले राजस्व का एक हिस्सा केंद्र सरकार ख़ुद खर्च करती है और एक हिस्सा राज्यों को विकास कार्यों के लिए मुहैया कराती है|

source : bbchindi

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