मशरूम की खेती में संभावनाए अपार

आज Mashroom ki kheti में सरकार द्वारा मिल रहे प्रोत्साहन एवं कौशल विकास (Skill-Development) के फलस्वरूप एक बड़े वर्ग ने कृषि एवं अन्य Non Farming acivities को अपना व्यवसाय बना लिया है | कम पूंजी, कम जगह एवं कम समय में ज्यादा से ज्यादा कमाने के इन्ही हसरतों ने आज मशरूम फार्मिंग (Mushroom Framing) एवं अन्य Allied Services को जन्म दिया|

अब आप भी यदि घर बैठे (Ghar baithe) मात्र कुछ पैसों के लागत से अपना खुद का मशरूम बिज़नस (Mushroom Business) स्टार्ट कर लाखों कमाना चाहते हैं तो मशरूम का व्यापार खास आपके लिए ही है| आज काफी लोग Mushroom ki Kheti कर लाखों कमा रहे हैं| यदि आप भी मशरूम की खेती करना चाहते है तो ये लेख खास आपके लिए ही है|

(1) मशरूम के खेती के लिए समय एवं स्थान का चुनाव:

ध्यान दे Mashroom ki kheti से पहले एक उपयुक्त स्थान का चुनाव काफी महत्वपूर्ण होता है| मशरूम काफी नाजुक होती है इसलिए भण्डारण से वितरण के बीच ज्यादा देर आपके फसल को ख़राब कर सकती है| साथ ही मार्किट से ज्यादा दुरी आपके टोटल लागत को भी बढा सकती है|

मशरुम की खेती के लिए 35 से 40 डिग्री तक का तापमान (Temperature) अनुकूल माना जाता है| साथ ही मशरूम के विकास के लिए नमी की भी काफी आवश्यकता होती है| हवा में 85-90% तक की आद्रता (Humidity) बनाये रखना एक चैलेंज हो सकता है| अमूमन मशरूम की खेती के लिए मई से अक्टूबर तक का समय बिलकुल उपयुक्त समझा जाता है| हालाँकि आवश्यक वातावरण एवं माहौल बना आप बारहों महीने इसकी खेती कर सकते हैं|

(2) मशरूम के बीजो के लिए क्यारियों की तैयारी :

शुरुवाती चरण में यदि आप Mashroom ki kheti छोटे लेवल पर करना चाहते हैं तो 400 Sq Feet  तक की जगह आपके लिए उपयुक्त रहेगी| भारत में मशरूम की खेती के लिए मूलतः तीन तरह की क्यारियाँ बनायीं जाती है|

(i) लटका कर (Hanging): मशरूम के लिए कम्पोस्ट (Subtract) का निर्माण कर प्लास्टिक बैग में कम्पोस्ट रख बीच में बीज (Mushroom spawns) की एक परत बना ले| ऊपर से कम्पोस्ट की परत दर परत में बीज को रोप कर प्लास्टिक का मुंह धागे से बांध दे| किसी स्टैंड के सहारे कम्पोस्ट को झुला कर रख दे| यह विधि खासकर उनके लिए काफी उपयुक्त है जब आपके पास जगह का अभाव हो|

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(ii) जमीन में क्यारियां बनाकर: जमीन में क्यारियां बना कम्पोस्ट को फैला कर बीज को रोपा जाता है| समय-समय पर सिंचाई एवं आवश्यक देखभाल के फलस्वरूप Mashroom ki kheti की जाती है|

(ii) बांस का बेड बनाकर(Bamboo Bed): यदि आप जमीन में क्यारियां बना खेती नहीं करना चाहते तो फिर आप बांस (Bamboo) का मचान बना सकते हैं| बांस अथवा किसी लकड़ी की मदद से जमीन से थोडा ऊपर बांस का बेड अथवा मचान बना उसपर मशरूम के बीज बो सकते है|

(3) Mushroom ki Kheti के लिए कम्पोस्ट की तैयारी :

Mashroom ki kheti के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है कम्पोस्ट (Subtract) की तैयारी जिसमे बीजो को बोया जाता है| भारत में ज्यादातर कम्पोस्ट (Compost) की तैयारी में पुआल (straw) का उपयोग किया जाता है|  पुआल बाजार से काफी कम कीमत पर आसानी से ख़रीदा जा सकता है| अब बारी होती है पुआल को कम्पोस्ट में बदलने की.

(i) शुरुवाती दौर में 5 से 10 KG तक पुआल से काम चल जायेगा| सबसे पहले भूसे को छोटे-छोटे टुकडो में काट ले| ध्यान दे टुकड़ा न बहुत छोटा न बहुत बड़ा रहे| 1/2 इंच का पुआल आदर्श माना जाता है|

(ii) अब भूसे को किसी टब अथवा टंकी में पानी से भर रात भर के लिए फूलने के लिए छोर दे| ध्यान दे पुआल में कार्बोहायड्रेट(Carbohydrate) कंटेंट बढाने के लिए आप Soluble liquid का भी प्रयोग कर सकते है जो कि आपके नजदीकी खाद्य-भण्डार से आसानी से प्राप्त किया जा सकता है|

(iii) रात भर कम्पोस्ट को भींगोने के बाद अब इस कम्पोस्ट को निकाल कर जमीन पर सूखने के लिए छोर दे| ध्यान दे पुआल न ज्यादा गिला न ही ज्यादा सुखा रहे| 2-3 घंटे बाद पुआल को हाथ से दबा कर चेक कर ले यदि काफी दबाने पर थोडा पानी निकल रहा है तो ये कम्पोस्ट आपके लिए आदर्श है|

(iv) आप चाहे तो इसमें नाइट्रोजन (Nitrogen) एवं फॉस्फोरस( Phosphorus) कंटेंट बढाने के लिए थोडा यूरिया का भी इस्तेमाल कर सकते है|  ये मशरूम के  Caramelization में काफी मदद करेगा|

(v) बनाये गए क्यारियों में अब आप इस कम्पोस्ट को फैला दे एवं थोड़ी-थोड़ी दुरी पर मशरूम के बीज को बो दे| अब दोबारा बीजो के ऊपर एक परत कम्पोस्ट की दे तथा बीज रोप दे.|इस प्रकार परत दर परत कम्पोस्ट के बीच में बीज रोप कर कुछ दिन के लिए छोर दे|

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(vi) ध्यान रहे कमरे का तापमान 35 से 40 डिग्री तक बना रहे. आवश्यक नमी बनाये रखने के लिए हर 2-3 दिनो के अंतराल में पानी का छिडकाव करते रहे| मशरूम के फसल को कीट-पतंगों एवं अन्य हानिकारक कीड़ो से बचाने के लिए कीटनाशक दवा का भी छिडकाव करे|

(vii) ध्यान रहे कमरा बंद रहे एवं कमरे में किसी तरह की रौशनी न पहुँचने पाए| फसल होने में 3 से 4 हफ़्तों का वक़्त लग जाता है| कोशिश करे बीच-बीच में आवश्यक नमी एवं कमरे का तापमान चेक करते रहने की| शुरुवाती दौर में 30 KG भींगे पुआल से 5 KG तक फ्रेश मशरूम उगाया जा सकता है|

(viii) मशरूम के भंडारण एवं वितरण में ज्यादा समय न लगाये| आप प्लास्टिक में 100, 250 ,500 ग्राम अथवा 1 KG का पैक बना इसे या तो सीधा मार्किट में उतार दे अथवा किसी सब्जी वाले के हाथों अपनी फसल बेच दे|

(4) जरा इन बातोँ पर भी दे ध्यान:

(i) मशरूम के बीज (Mushroom Spawns) को आवश्यक नमी पहुँचाने के लिए हर 2-3 दिनो के बीच में पानी का छिडकाव करते रहे|

(ii) रूम में साफ-सफाई का विशेष ध्यान दे| कम्पोस्ट को छुने अथवा मशरूम के बीजो के संपर्क से पहले हाथ को अच्छी तरह से साबुन से धोये एवं कोशिश करे कमरे में जूते-चप्पल इत्यादि पहन कर प्रवेश न करे|

(iii) मशरूम को कीट-पतंगों एवं अन्य हानिकारक कीटाणुओं द्वारा ख़राब होने का खतरा हो सकता है जो कि आपके सारे किये-कराये पर पानी फेंट सकता है| ऐसे हालात में कीटनाशक का छिडकाव आपके फसल को बचा सकता है|

(iv) ध्यान दे कमरे में धुप न पहुँचने पाए इससे कमरे की आवश्यक नमी के खोने का खतरा बना रहता है| खिडकियों पर गीले चादर का उपयोग करे ताकि किसी भी तरह से नमी खोने न पाए|

(5) मार्किट (Market for Mushroom):

भारत में मूलतः दो तरह की Mashroom ki kheti की जाती है| ओएस्टर मशरूम एवं बटन मशरूम| मार्किट के हिसाब से हर KG  ओएस्टर मशरूम (Oyster mushroom) की आपको 100 से 120 रूपए तो वही बटन मशरूम (Button Mushroom) के लिए आपको 200 से 250 रूपए तक  आसानी से मिल सकती है| आप चाहे तो डायरेक्टली अपना मार्किट बना सकते है अथवा ऑनलाइन प्लेटफार्म का इस्तेमाल कर अपने मशरूम को विदेशों में बेच भाड़ी मुनाफा भी कमा सकते है.

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(6) कहाँ से करे ट्रेनिंग:

विगत कुछ वर्षों में सरकार द्वारा प्राप्त प्रोत्साहन राशी एवं समय-समय पर  कौशल विकास हेतु दी जाने वाली ट्रेनिंग के वजह से आज मशरूम उत्पादन एक बड़ा व्यापार बनते जा रहा है| Mashroom ki kheti सीखने के लिए आपको ज्यादा पढ़े लिखे होने की जरुरत नहीं| सिर्फ आपकी मेहनत, लगन एवं खेती की थोड़ी बहुत जानकारी ही आपके भाग्य का ताला खोल सकती है| भारत में आप इन जगह से मशरूम की खेती करना सीख सकते है|

  • Indian Agricultural Research Institute(IARI), Department of plant pathology, Pusa, Delhi
  • Rajendra Agricultural University, Pusa, Samastipur, Bihar
  • Orissa Agricultural University, Bhubaneswar, Orissa,
  • Haryana Agro-Industrial Corporation R&D Centre, Murthal(sonepat)
  • ICAR research Complex for NEH region, Umroi Road, Borapani, Meghalaya
  • Directorate of mushroom research, ICAR, Chambaghat, Solan, Himachal Pradesh

फोटो साभार: ModernFarmer

 

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मशरूम की खेती कैसे करे
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मशरूम आज लाखोँ लोगो के लिए रोज़गार का प्रमुख जरिया बनता जा रहा है. ऐसे में हम भी मशरूम की खेती कर एक बेहतर भविष्य बना सकते हैं. मशरूम के खेती से जुड़ी तमाम सवालों के जवाब जानना चाहते है तो ये लेख खास आपके लिए ही हैं.
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