आम बजट 2017-2018 की मुख्य बातें, डाउनलोड करें PDF

नई दिल्ली : 01 फ़रवरी 2017 को भारत के वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली के द्वारा आम बजट 2017-2018 पेस किया गया. जेटली ने अभिभाषण के दौरान सरकार के कई उपलब्धियों को गिनवाए. विमुद्रीकरण से लेकर एफडीआई तक सभी मुद्दों को सदन में रखा. इस आम बजट 2017 में किसानों, युवाओं, गरीबों और गांव के विकास पर खासा जोर दिया गया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उम्मीद जताई है कि इस साल मानसून के अच्छा रहने की वजह से अर्थव्यवस्था में सुधार आएगा. पेस है जेटली द्वारा पेस किये गए अभिभाषण के कुछ अंश :

पिछले ढाई वर्षोँ में प्रशासन विवेकाधीन, पक्षपात से प्रणालीगत और पारदर्शिता की और बढ़ा है. तीन लाख तक आय वाले व्यक्तियों पर कोई टैक्स नहीं, पहले यह सीमा 2.5 लाख रुपये थी। ढाई लाख से 5 लाख तक की आय वाले लोगों पर टैक्स 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी किया गया। पांच से दस लाख रुपये तक की आय के लिए 20 फीसदी टैक्स लगाया जाएगा। आपको बता दें कि पहले भी 20 फीसदी ही टैक्स लगता था। 1 करोड़ से अधिक आय वाले लोगों पर 12 फीसदी सरचार्ज जारी रहेगा। एक राजनीतिक पार्टियाँ एक व्यक्ति से अधिकतम 2000 रुपये का कैश चंदा ले सकती है। तीन लाख से अधिक कैश लेन-देन पर लगेगी रोक, इसके लिए टैक्स कानून में संशोधन किया जाएगा।

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अब आम बजट 2017-2018 को विस्तार से पढ़ें :

विमुद्रीकरण :

  • कर-वंचना और समानांतर अर्थव्यवस्था पर अंकुश लगाने के लिए साहसिक और निर्णायक उपाय.
  • भ्रष्टाचार, काला धन, नकली मुद्रा और आतंकवाद की फंडिंग को समाप्त करने का सरकार का संकल्प.
  • आर्थिक गतिविधियों में कोई कमी आई है तो यह अस्थायी है.
  • दीर्घावधि लाभों का सृजन जिनमे कम भ्रष्टाचार, अधिक डिजिटलीकारण, वित्तीय बचतों का अधिक प्रवाह और अर्थव्यवस्था का अधिकाधिक ओपचारिककारण.
  • पुनः मौद्रिकरण की गति में तेजी आई है और यह शीघ्र ही संतोषजनक स्तर पर पहुच जाएगी.
  • बैंकिंग प्रणाली में अधिशेष नकदी उधार लागत कम होगी और क्रेडिट पहुच में वृद्धि होगी.
  • गरीबो के लिए आवास, किसानों को राहत, एमएसएमई को क्रेडिट सहायता, डिजिटल लेन-देनों को प्रोत्साहित करना, गर्ववती महिलाओं और वरिष्ट नागरिकों को सहायता, मुद्रा योजना के तहत दलितों, जनजातियो, पिछड़े वर्गो और महिलाओं को प्राथमिकता, हमारी अर्थव्यवस्था के मुख्य सरोकारों के समाधान पर फोकस करते हुए माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 31 दिसम्बर 2016 को घोषणा की गई.

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रोडमैप और प्राथमिकताए :

वर्ष 2017-18 का एजेंडा है : “ट्रांसफॉर्म एंड क्लीन इंडिया” टेक इंडिया.

टेक इंडिया का उद्देश्य इस प्रकार है :

  • शासन की गुणवत्ता और हमारी जनता के जीवन स्तर को बदलना.
  • समाज के विभिन्न वर्गो विशेषतः युवकों और कमजोर तबकों में उर्जा का संचार संचार करना और उन्हें उनकी क्षमता से परिचित कराना, और देश में भ्रष्टाचार, काला धन और अपारदर्शी राजनीतिक फंडिंग की बुराईयों को समाप्त करना.

इस व्यापक एजेंडे को चलाने की दस विशिष्ट थीम :

  • किसान : 5 वर्षों में आय दुगुना करने के लिए प्रतिबद्ध.
  • ग्रामीण आबादी : रोजगार और बुनियादी अवसंरचना मुहैया कराना.
  • युवा : शिक्षा, कौशल और रोजगार के जरिए उर्जा का संचार करना.
  • गरीब तथा विशेष सुविधाओं से वंचित वर्ग : सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और किफायती आवास की प्रणाली को मजबूत करना.
  • अवसंरचना : कारगरता, उत्पादकता और जीवन स्तर के लिए.
  • वित्तीय क्षेत्र : मजबूत संस्थानों के द्वारा विकास और स्थिरता.
  • डिजिटल अर्थव्यवस्था : गति, उत्तरदायित्व और पारदर्शिता हेतु.
  • सार्वजनिक सेवा : जनता की भागीदारी के जरिए कारगर शासन और कारगर सेवा सुपुर्दगी.
  • विवेकपूर्ण राजकोषीय प्रबंधन : संसाधनों का इष्टम नियोजन सुनिश्चित करना और राजकोषीय स्थिरता बनाये रखना, कर-प्रशासन, ईमानदार का आदर करना.

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किसान के लिए :

  • वर्ष 2017-18 में कृषि संबंधी क्रेडिट को 10 लाख करोड़ रुपए के रेफार्ड स्तर पर नियत किया गया है.
  • किसानों को भी 31 दिसम्बर 2016 को की 60 दिन की ब्याज माफ़ी का लाभ मिलेगा.
  • छोटे किसानों को ऋण प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए सरकार जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंकों की कोर बैंकिंग प्रणाली के साथ सभी 63,000 कार्यरत प्राथमिक कृषि क्रेडिट सोसाइटी के कंप्यूटरीकारण और समेकन हेतु नाबार्ड को सहायता देगी.
  • फसल बिमा योजना के तहत व्याप्ति का दायरा 2015-16 में फसल क्षेत्र के 30 प्रतिशत से 2017-18 में बढ़ाकर 40 प्रतिशत और 2018-19 में 50 प्रतिशत किया जाएगा. इसके लिए 9000 करोड़ रुपए का बजट का प्रावधान किया गया है.

ग्रामीण आबादी :

  • केन्द्रीय बजट, राज्यों के बजटों, स्व-सहायक समूहों आदि के लिए बैंक लिंकेज से ग्रामीण गरीब के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक वर्ष 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि व्यय की जाएगी.
  • वर्ष 2019 गाँधी जी की 150वी जयंती तक एक करोड़ परिवारों को गरीबी से बाहर लाना तथा 50,000 ग्राम पंचायतों को गरीबी से मुक्ति दिलाना.
  • मनरेगा के अंतर्गत कृषि से जुड़े 5 लाख के लक्ष्य की तुलना में, मार्च 2017 तक खेती से जुड़े 10 लाख तलाबों का कार्य पूरा कर लिया जाएगा. वर्ष 2017-18 के दौरान, खेती से जुड़े और 5 लाख तालाबों का कार्य शुरू किया जाएगा

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युवा वर्ग :

  • हमारे स्कूलों में अधिगम (लर्निंग) के वार्षिक परिणाम प्रणाली प्रारंभ करना.
  • बेहतर प्रशासनिक और शैक्षिक (अकादमिक) स्वायत्तता प्राप्त करने के लिए अच्छी गुणवत्ता के उच्चतर शिक्षा संसथान.

गरीब तथा विशेष सुविधाओं से वंचित वर्ग :

  • 14 लाख आईसीडीएस आंगनवाड़ी केन्द्रों में 500 करोड़ रुपए के आवंटन से महिला शक्ति केंद्र स्थापित किये जाएँगे. यह ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु कौशल विकास, रोजगार, डिजिटल साक्षरता, स्वास्थ्य और पोषाहार के अवसरों के लिए एक स्टाप
  • सामूहिक सहायता सेवाए प्रदान करेगा.
  • सस्ते आवासों को अवसंरचना का दर्जा दिया जाएगा.
  • राष्ट्रीय आवास बैंक 2017-18 में लगभग 20,000 करोड़ रुपए के व्यष्टि आवास ऋणों का पुनवित्तपोषण करेगा.

आम बजट 2017-18 में जानें क्या हुआ सस्ता और क्या हुआ महंगा :

ये चीजें सस्ती हुई है :

पवन चक्की, आरओ, पीओएस, पार्सल, लेदर का सामान, सोलर पैनल,प्राकृतिक गैस, निकेल, बायोगैस, नायलॉन, रेल टिकट खरीदना, सस्ता घर देने का प्रयास, टैक्स में मध्यम वर्ग को राहत देने का प्रयास, भूमि अधिग्रहण पर मुआवजा टैक्स मुक्त होगा. सौर उर्जा बैटरी और पैनल के विनिर्माण में काम आने वाले सोलर टैम्पर्ड ग्लास को सीमा शुल्क से छूट.
ये चीजें महँगी हुई है :

मोबाइल फोन, पान मसाला, सिगरेट, एलईडी बल्ब, चांदी का सामान, तंबाकू, हार्डवेयर, सिल्वर फॉयल, स्टील का सामान, चांदी के गहने, स्मार्टफोन. पान मसाला पर उत्पाद शुल्क 6% से बढ़ाकर 9%, गैर-प्रसंस्कृत तंबाकू पर 4.2 से बढ़ाकर लगभग दोगुना 8.3% कर दिया गया है. तंबाकू (गुटखा) वाले पान मसाला पर उत्पाद शुल्क 10% से बढ़ाकर 12%किया गया. 65 मिलीमीटर तक लंबाई वाली सिगरेट पर उत्पाद शुल्क 215 रुपये प्रति एक हजार से बढ़ाकर 311 रुपये प्रति हजार किया गया. एल्यूमीनियम महंगा, इसके अयस्क और कंसंट्रेट पर आयात शुल्क शून्य से बढ़ाकर 30% किया गया.

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मोबाइल फोन विनिर्माण में काम आने वाले प्रिंटेड सर्किट बोर्ड पर सीमा शुल्क शून्य से बढ़ाकर 2% किया गया. एलईडी बल्ब विनिर्माण में उपयोग होने वाले कलपुजों पर पांच प्रतिशत की दर से मूल सीमा शुल्क और 6% प्रतिपूर्ति शुल्क लगेगा. सिगार, सुल्फी (चुरट) पर उत्पाद शुल्क बढ़ाकर 12.5% अथवा प्रति हजार 4006 रुपये जो भी अधिक होगा, किया गया. पहले यह दर 12.5% और 3,755 रुपये प्रति हजार थी.

 

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