युवराज सिंह ने विपरीत परिस्थितियों को मात देकर यह मुकाम पाया है

Indian Cricket Team 24 मार्च 2011 को ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध क्वार्टरफाइनल खेल रही थी. सच बताऊ तो मुझे कुछ ख़ास उम्मीद नहीं थी इसके कई कारण थे जिनमे सबसे प्रमुख था, भारतीय टीम पिछलें कई बड़े ODI टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ बेहतर नहीं कर पायी थी. अब बात करते हैं मैच की ऑस्ट्रेलिया ने पहले बैटिंग करते हुए भारत को 261 रन का लक्ष दिया, लक्ष का पीछा करते हुए भारत की आधी टीम पौने दो सौ के करीब पवेलियन लौट गई. उन बेहद मुश्किल परिस्थियों में युवराज सिंह ने अर्द्धशतक लगाया और ऑस्ट्रेलिया को Cricket World Cup 2011 से बहार का रास्ता दिखाया. युवराज सिंह पुरे वर्ल्ड कप में अपने बेटिंग के साथ-साथ बोलिंग से भी प्रभावित किया था और ‘मैन ऑफ़ द सीरीज़’ रहे थे.

ऐसा नहीं है कि मैं युवराज सिंह का फैन 2011  के वर्ल्ड कप से बना, आप युवराज सिंह के शुरुआती दौर के मैच को याद कीजिये मिडिल आर्डर में शुरू से ही बेहतर रहे. 2002 के नेटवेस्ट ट्राफी का फाइनल याद होगा आपको भारत ने युवराज सिंह के 69 रनों के बदोलत इंग्लैंड के 325 रनों के विशाल लक्ष को पूरा किया और भारत को जीत दिलाई थी|

युवराज का कठिन दौर :

2011 के वर्ल्ड कप के तुरंत बाद युवराज के जिंदगी का कठिन दौर शुरू हो गया था. पता चला की वे कैंसर से ग्रसित हैं. हालांकि आपको याद हो युवी की तबियत World Cup के दौरान ही बिगडने लगी थी. मैच के दौरान अक्सर वे खांसते-हाफ़ते दिख रहे थे. कोई भी खिलाड़ी अपने खेल के दौरान किसी भी तरह के बिमारियों की वजह से खेल छोड़ना नहीं चाहता और तब तो बिलकुल भी नहीं जब आप कैरियर का इतना बड़ा इवेंट खेल रहे हो.

वर्ल्ड कप के ख़त्म होने के कुछ सप्ताह बाद ही कैंसर की ख़बर एक तूफान की तरह आई. जिस तरह युवराज ने उस तूफ़ान किया वो काबिले-तारीफ़ था. वह इलाज के लिए अमेरिका गए जहाँ उनका करीब दो महीने इलाज चला. युवराज कहते हैं कि उन्होनें इलाज के दौरान लांस आर्मस्ट्रांग की किताब पढ़ी जिनसे उनको कैंसर से लड़ने और जीवन जीने की प्रेरणा मिली. युवराज ने खुद को टूटने नहीं दिया. आपको याद होगा इलाज के दौरान उन्होंने खुद की एक तस्वीर माइक्रो ब्लॉग्गिंग वेबसाइट ट्विटर पर सांझा किया जिसमे वे बाल ममुंडवाये हुए थे.

19 जनवरी 2016 को इंग्लैंड के साथ हुए मैच में युवराज सिंह ने सिर्फ 127 गेंदों पर 150 रन की पारी खेली. 6 साल के लम्बे अंतराल के बाद शतक जड़ने  के बाद युवराज का जश्न काफ़ी कुछ कह रहा था, उन्होंने बल्ले को छाती पर कई बार ठोका, इशारा साफ़ था की हाँ मैंने कैंसर जैसे लाइलाज बीमारी के खिलाफ़ जंग जीती है.

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गौरतलब है कि कैंसर से वापसी के बाद युवराज सिंह को भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए काफ़ी मसक्कत करनी पड़ी. कई खेल विशेष्ज्ञ ने तो उन्हें सन्यास लेने तक की सलाह दे डाली. बकौल युवराज “वापसी के दौरान कई बार मन में सवाल भी उठे थे कि क्रिकेट छोड़ दूँ”.

युवराज के टीम में आने की कई वजह है जिसमे सबसे महत्वपूर्ण है युवराज का कभी हार नहीं मानना.पिछले 2-3 सालों में युवी ने 50 से ज्यादा नेशनल लेवल के मैच खेले जिसमे 10 से ज्यादा सेंचुरी और डबल सेंचुरी शामिल है.

उम्र के लिहाज से देखे तो अभी भी युवराज के अंदर काफ़ी क्रिकेट बाकि है. मेहनत, लगन और फ़िटनेस यदि युवराज के साथ बना रहे तो आने वाले दिनों में ये अपने खेल से पुरे दुनियाँ को एंटरटेन करते रहेंगें, यह मेरी उम्मीद नहीं विश्वास भी है.

युवराज सिंह के 127 बॉल में 150 रनों की पारी देखें :

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस लेख में प्रकट किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति ट्रेंडिंगऑवर उत्तरदायी नहीं है।

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