राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त से जुड़े कुछ रोचक बाते

Maithili sharan gupt facts: अक्सर  हमारी पूरी जिंदगी दूसरों को सिर्फ यही समझाने में चली जाती है कि हम भीड़ से अलग हैं और हम में भी कोई बात है परन्तु उस दौरान ऐसा भी होता है जब आपको कई बार समाज की तीखी आलोचनओं का सामना करना पड़ता है | जो बच गए वे इतिहास रचते हैं एवं जो समाज के आगे घुटने टेक देते हैं वे खुद इतिहास बन जाते हैं |

जरा सोचिये एक ऐसा दौर जहाँ भारतीय साहित्य की धूरी ब्रजभाषा के इर्द- गिर्द घूम रही हो एवं समाज के प्रतिष्ठित साहित्यकार ब्रज को ही अपना रहे हों ऐसे में उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में जन्मे मैथली शरण गुप्त जी ने न सिर्फ खड़ी-बोली को अपना हथियार बनाया बल्कि एक के बाद एक कुछ ऐसे साहित्यो के कर्णधार बने कि समाज ने उन्हें राष्ट्रकवि तक का दर्जा दे दिया |

अपने साहित्य से देशवासियों के बीच आज़ादी का बिगुल बजाने वाले राष्ट्र कवि को ट्रेंडिंग ऑवर के सम्पूर्ण परिवार की तरफ से उनके जन्म दिन पर शत शत नमन | एक छोटे से गाँव से राष्ट्रकवि बनने तक का सफ़र इतना आसान नहीं था पर कहते है न कि कुछ लोग सिर्फ इसलिए पैदा होते हैं ताकि दूसरों को जीना सिखा सके | गुप्त जी के जन्मदिन पर आईये जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ रोचक बाते |

Maithili sharan gupt facts:

1. बचपन में मैथली शरण गुप्त को स्कूल जाना बिलकुल भी अच्छा नहीं लगता था | इसी वजह से उनके पापा ने घर में ही पढ़ाई की व्यवस्था करवा रखी थी | बचपन से ही पढ़ाई के प्रति विशेष रूचि रखने वाले गुप्त जी ने वहीं से संस्कृत, बंगला एवं अंग्रेजी का ज्ञान अर्जित किया |

2. बचपन से ही धार्मिक माहौल में पले-बढ़े गुप्त जी को अपने इतिहास में गहन रूचि थी यही वजह है कि उनके द्वारा लिखा गया अधिकतर साहित्य रामायण, महाभारत अथवा किसी बौद्ध धर्म के नायको को चरित्र बना रची गयी होती थी | साकेत, यशोधरा इत्यादि साहित्य के माध्यम से साहित्य को एक नयी जान फूंकने वाले गुप्त जी की साकेत को एक बार तो आपको जरुर पढ़ना चाहिए |

3. विशुद्ध खड़ी बोली में राष्ट्रीय संप्रभुता की लौ जलाती उनकी कविताओं को राष्ट्रीय आजादी के दौरान काफी बड़े पैमाने में राष्ट्र प्रेम जगाने के लिए प्रयोग किया जाता था | ऐसे में साहित्य एवं राष्ट्र प्रेम में अभूतपूर्व योगदान को देखते हुए महात्मा गाँधी जी ने उन्हें राष्ट कवि की उपाधि दी थी |

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4. आज़ादी के बाद गुप्त जी राज्य सभा के भी मेम्बर बनाये गए | ऐसे में अपने विपक्षी को कविताओं से जवाब देते गुप्त जी ने पॉलिटिक्स में साहित्य की मिठास घोलने का काम किया था | उनके योगदान से प्रभावित हो भारत सरकार ने उन्हें साल 1954 में पद्म भूसन की उपाधि से भी नवाजा था |

5. साहित्य के इस पुजारी को यूँ तो कई सम्मान मिले थे परन्तु क्या आपको पता है कि वे तत्कालीन बुंदेलखंड के राजा दीवान शत्रुघ्न सिंह के टीचर भी थे जिन्हें उस वक़्त बुंदेलखंड गाँधी के नाम से भी जाना जाता था |

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Summary
Photo ofमैथली शरण गुप्त
Name
मैथली शरण गुप्त
Nickname
(गुप्त)
Job Title
कवि
Company
राष्ट्र कवि
Address
झाँसी ,
उत्तर प्रदेश,

Tredinghour

THNN (Trendinghour News Network).

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