नारी सम्मान……!!!! उसकी जरूरत और अधिकार

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी”

अर्थार्त…..जननी (माँ) और ये जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़ कर हैं | लेकिन जरा देखिए तो सही, यहाँ एक स्त्री को कितनी बड़ी उपाधि दी गयी है उसे स्वर्ग से भी बड़ा दर्जा दिया गया है, सम्मान दिया गया है | पर क्या ये वाकई सत प्रतिशत सत्य है… क्या वास्तव में एक नारी को इतना सम्मान मिलता है | एक नारी के लिए कितनी यातना और पीड़ा भरा युग रहा था हमारे अतीत के पन्नो में इतिहास में, वेदों में, पुराणों में, महाभारत और रामायण जैसे हिन्दू धार्मिक ग्रंथो में भी भली-भांति इसका विवरण रहा है और इन बातों से हम सभी अच्छी तरह वाकिफ हैं कि आज भी इस संसार में एक नारी के लिए कितना मान-सम्मान और इज्जत भरा दृश्य है | हमारे समाज में, परिवार में, घर हो या बाहर, विद्यालय हो या कार्यालय कहीं भी एक स्त्री को उसके मान-सम्मान, हक़ व् अधिकार से वंचित रखा जाता है | कहीं बहुत लड़ने-भिड़ने के बाद अगर उसे अधिकार मिला तो कहीं इज्जत नहीं और कहीं इज्जत या मान-सम्मान मिला तो वहाँ उसकी कोई वैल्यू नहीं, उसका कोई मूल्य नहीं |

आईये आप खुद ही देख लीजिए हर चरण में एक नारी को क्या दिया जाता है और उसके बदले  उससे क्या कुछ वसूला जाता है :

समाज :-मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है” जी हाँ… समाज…जो एक बहुत ही बड़ा भाग है हम सभी के जीवन का, जो जीवन का आधार है | जिसके खिलाफ हम नहीं जाते, ये सोच कर की समाज क्या कहेगा बस यही एक लाइन “समाज क्या कहेगा” यही सोच कर हम पीछे हट जाते हैं और अपने मन की कभी नहीं कर पाते फिर चाहे हम कुछ सही ही क्यों न करना चाहते हों पर नहीं कर सकते | उसी समाज में एक नारी का दर्ज़ा जानते हैं आप..? समाज एक स्त्री के लिए कभी सकारात्मक सोच नहीं रखता हमेशा बचपन से पल रही एक बेटी के लिए यही समाज ढ़ेरों कुटनीतियों का गट्ठर बांध के उसके गले में टांग देता है | कभी के वो पढ़ के या ज्यादा पढ़ के क्या करेगी, (जबकि आज लड़कियाँ लडकों से ज्यादा कामयाब हो रही हैं) |  हमारे समाज में आज भी ये प्रचालन कॉमन है कि वो लड़की है उसकी जल्दी शादी कर दो, शादी में अगर देरी हो गयी तो ये ताना के “हाय बूढी हो गयी और अभी तक अपने बाप-भाई पर बोझ बनी बैठी है” (ऐसा लगता है जैसे कि वो बेटी खुद के घर से ज्यादा उन समाज वालों के लिय बोझ हो), लड़की के साथ कोई अनहोनी हो जाये तो वही समाज उसे ओछी और घृणित नजरों से देखता है और उसकी इज्जत को दागदार नाम देकर खुद ही उसकी इज्जत लुट लेता है और वहीँ उनके लिए एक लड़का 10 इज्जत पर हाथ डालकर आता है तो भी उसे लड़का है कह कर सम्मानित ही किया जाता है | जी हाँ… बिल्कुल ऐसा ही है आपका समाज |

परिवार :- एक लड़की का खुद का परिवार और उसका खानदान जहाँ से उसका जन्म और पहचान होती है वो भी उसके सच्चे सगे नहीं होते | पैदा होते ही एक लड़की के नाम पर आज भी लाखों घरों में दुःख मनाया जाता है कि लड़की हुई है कुल का दीपक या इस घर का वारिश नहीं और कुछ घरों में तो यहाँ तक कि हमे कमा कर खिलाएगी या काँधे का बोझ उठाएगी ये घटिया सोच है जबकि वहीं लड़का पैदा होता है तो मिठाईयाँ बाँटी जाती हैं दावतें दी जाती हैं (जैसे की वो पैदा होते ही उनके काँधे का बोझ उठा के उन्हें कमा कर खिला देगा…) आज भी एक पिता अपने लड़के को कर्जा लेकर महंगी पढ़ाई कराता है और वही बेटी को एक रुपया तक देना नहीं चाहता पढ़ने के लिए (जी हाँ…ऐसे परिवार भी हैं वास्तव में)

वहीँ दूसरी ओर ससुराल में जो एक औरत का अपना घर माना जाता है | वहाँ एक बहु को हमेशा पराया माना जाता है उसे बोलने का या हक़ की बात तक कहने का अधिकार नहीं होता, बहु का बोलना जैसे कोई पाप हो, घर में दबा कर रखा जाता है ऐसे जैसे कोई जेल में कैदी हो | वही उसका बेटा पैदा हो जाये तो बेटे को सीने से लगाया जाता है और बेटी पैदा हो जाये तो उसकी दुर्गति तो आप जानते ही हैं | बचपन से बुढ़ापे तक एक औरत अपने हक़ और सम्मान के लिए मरती है | पर अगर उसका पति मर जाये तो भी उसी का दोष माना जाता है और उसे विधवा की जिंदगी दी जाती है और विधवा का जीवन कैसा होता है आप जानते ही हैं | ऐसे में हर औरत बस यही सोचेगी की विधवा की जिंदगी ज़ीने से तो अच्छा है हमें मौत आ जाये | क्या हैसियत है उस जननी की, एक स्त्री की, एक नारी की | हमारा खुद का परिवार ही जब हमारा सगा नहीं होता तो किसी और से कैसी उम्मीद….. लेकिन ऐसा क्यों है…? क्या एक औरत या बेटी होना, एक स्त्री या नारी होना गुनाह है..? अगर ऐसा होता तो क्या ये संसार होता..?

कॉलेज, स्कूल या महाविद्यालय:- कॉलेज, स्कूल या महाविद्यालय:- एक लड़की जब युवा अवस्था में कदम रखती है तब उसे ऐसी न जाने कितनी चनौतियों का सामना करना पड़ता है जिसे वो अपने परिवार तक से भी नहीं बाँट सकती क्योंकि पहले ही उसके परिवार की सोच रूढ़िवादी है उसमे अगर वो अपनी कोई बाहरी समस्या उनके सामने रखेगी तो परिवार वाले उसकी इस समस्या का समाधान करने के बजाये उसका सारा काम-धाम छुड़ाकर उसे घर पर बैठा देंगे ऐसे में तो उसकी पढाई-लिखाई भी बंद | और वो समस्यायें भी ऐसी हैं जिन्हें सुनकर आप सभी अग्री तो करते हैं लेकिन खुद भी ऐसी समस्याओं को बढ़ावा देते हैं | स्कूल या कॉलेज में हर लड़की को कहीं न कहीं इन बुराईयों का सामना करना पड़ता है | जब एक लड़की घर से बाहर निकलती है उसे ढेरों तादात में भूखे भेड़िये की तरह नोच के खा जाने वाले दरिन्दे तैयार खड़े रहते हैं जो अपनी बुरी नज़रों और गन्दी कमेंट्स से एक लड़की का जीना दुश्वार कर देते हैं | छेड़ा–खानी करतें हैं | जैसे बाहरी तत्व गुंडे, मावली जो चर्चित हैं अपने घटिया और गिरे हुए हैवानियत भरे कर्मों के लिए | पर हम सभी उन्हें हि 100% घटिया दर्जा देते हैं | चलो माना की वो हैं ऐसे उनकी रूह ही दूषित है | पर उनका क्या जो आम इंसान हैं | जो बड़े ही सज्जन, सीधे, सरल व् मीठे स्वाभाव के बने फिरते हैं दुनिया के सामने ढोंग करते हैं एक अच्छा इंसान होने का नकाब ओढ़े रहते हैं | जो उनके खुद के घर में उनसे ज्यादा चरित्रवान और कोई नहीं दुनिया में ऐसा दिखावा करते हैं | जो खुद किसी के बाप, भाई, बेटा, चाचा, मामा और ताऊ ऐसा हर रिश्ता निभाने के बावजूद भी बाहर की हर माँ, बहन, बेटी को अपनी घिनोनी हरकतों से शर्मशार कर देते हैं | और यहाँ तक ही नहीं खुद के घर और खानदान तक की इज्जत को अपनी हैवानियत भरी घिनोनी नजरों से, हरकतों से तार-तार कर देते हैं | ऐसे लोगों का क्या किया….? अब आप खुद हि बताईये कहाँ जाए एक औरत, एक बेटी, एक स्त्री अपना हक़ व् सम्मान पाने, कहाँ मिलेगा उसे उसका मान-सम्मान बताईये है कोई जवाब आपके पास…?

कार्यस्थल या कार्यालय:-  कार्यालय या कार्यस्थल काम करने की जगह, रोजी-रोटी कमाने की जगह | जिसके बिना घर का खर्चा नहीं चलता | वहीं एक स्त्री भी है जो अपने उस घर के लिए बेटा भी है जहाँ या तो बेटा है नहीं या फिर होते हुए भी न के बराबर है | जहाँ वही स्त्री अपने माँ-बाप और परिवार के अन्य सभी सदस्यों के लिए अन्यपुर्णना होने के साथ-साथ अन्यदाता भी है | अब जब उसे रोजी-रोटी कमाने के लिए भी आज़ादी नहीं जबकि वो अपनी पूरी मेहनत और लगन से अपना काम करना चाहती है | तो वहाँ उसे प्रताड़ित किया जाता है किसी दुसरे तरीके से आईये जानतें हैं….

नौकरी और योग्यता होते हुए भी शर्तें- आज के युग में बेरोजगारी है हम सब जानते हैं लेकिन फिर भी रोजगार देने की शर्तें देखिए | एक स्त्री को नौकरी उसकी योग्यता होने के बाद भी मिलती है लेकिन किसी और चीज से… उसके किसी और बलिदान से वो है उसका expose या शारीरिक शोषण आप सभी ने ऐसी बहुत सी खबरे देखीं और सुनी होंगी और बहुत बार तो आपको इसका व्यक्तिगत तजुर्बा भी रहा होगा | बहुत से ऐसे सरकारी, अर्धसरकारी या प्राइवेट महकमों में आप सभी ने ऐसा देखा होगा की उनकी शर्ते एक स्त्री के लिए ये होती हैं | यहाँ तक खुद राजनीति में भी ऐसे लोग शामिल हैं, देश को चलाने वाली सरकार तक ने भी इस तरह के घिनोने अपराध को अंजाम दिए हैं  | ये है रूप दुनिया का एक औरत के लिए फिर सम्मान किस खेत की मूली |

बड़े पर्दों की रौनक- परदे पर आने वाले हसीन चेहरे जिसे देख कर हर लड़की के मन में एक ख्वाब उठता है | काश.. मैं भी एक हेरोइन होती…. क्या आपने कभी सोचा की उनमें से कईओं के जीवन की दर्द भरी सच्चाई क्या है | वो है ये शारीरिक और मानशिक शोषण जैसी क्रुतियाँ उन्हें कुछ पाने के लिए अपना इतना कुछ खोना पड़ता है | एक स्त्री के लिए उसकी आबरू से बड़ा और कोई गहना नहीं है | फिमी इंडस्ट्रीज में महज़ 10 साल के कैरियर की ये कीमत चुकानी पड़ती है और कईओं ने चुकाई भी है |          

अब कहने लायक कुछ ऐसा नहीं है जिसमे आपको ये बताना और दिखाना रह गया हो की इस संसार में एक नारी का क्या दर्ज़ा है | एक औरत का क्या अस्तित्व है | क्या मान-मर्यादा है जो सिर्फ हम औरतों के लिए है पर उन लोगों के लिए नहीं जो इस मान-मर्यादा को भंग करते हैं | हक़ से मांग करके तो हमने देख लिया… अब बस भीख मांग रहे हैं | हम अपनी ये छोटी सी रहम भरी मांग आखिर किसके सामने रखें… | क्या वो सरकार है, या वो समाज है या फिर आप ये सोच रहें हैं की वो हमारा परिवार है जो हमारा किसी अच्छाई में साथ नहीं देता तो भला किसी बुरी अवस्था में कैसे साथ देगा | या सरकार… जो क्या कायदे-कानून बनाएगी, क्या धाराएँ और Act पास करेगी हमारी सुरक्षा के लिए जिन्हें खुद ही उनके जाने-माने नामों ने खुद मिट्टी में मिलाया है | आखिर……क्यों है ऐसा… कब मिलेगा हमें हमारा मान-सम्मान और हमारा अधिकार…. जो हमारी जरुरत है…और हमारा हक़…!!!!!! आखिर किस से मांग करें हम…..? 

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