बिहार में शिक्षा का गिरता स्तर..कौन है इसका जिम्मेदार?

कुछ दिनों पहले बिहार से एक दोस्त का फ़ोन आया, बिहार बोर्ड के 12वी के नतीजे के बारे में बता रहा था| हालाँकि मैंने ना तो इसबार 12वी की परीक्षा दी थी और न ही यह न्यूज़ मेरे किसी काम की थी लेकिन फिर जब यह सुना कि इस बार केवल 35% छात्र ही पास हो पाए तो मेरे होश उड़ गए| जी हाँ, हाल ही में पब्लिश बिहार बोर्ड के 12 वी के नतीजो में  कुल 12 लाख 40 हजार विद्यार्थियों में से केवल 4 लाख 37 हजार बच्चों को ही “पास” होने का गौरव मिल पाया|

Bihar Board 12th Result
लड़कियों ने फिर से मारी बाजी

बिहार स्कूल एजुकेशन बोर्ड के 12वी की नतीजो पर एक झलक

इससे पहले की बिहार में शिक्षा के गिरते स्तर पर हम आगे अपनी इन्वेस्टीगेशन जारी रखे, आइये डालते हैं एक नजर बिहार स्कूल एजुकेशन बोर्ड द्वारा पब्लिश 12वी के नतीजो से जुड़े कुछ खास बातों पर|

**बिहार स्कूल एजुकेशन बोर्ड द्वारा संचालित 12वी के परीक्षा में बैठने वाले कुल 12 लाख 40 हजार बच्चों में से केवल 4.37 लाख अथवा 35.25% (तीनो स्ट्रीम मिलाकर) बच्चे ही पास हो पाए.

स्ट्रीम पास % 2017 पास % 2016
Intermediate Science (ISC) 30.11% 67.06
Intermediate Arts (IA) 37.13%   56.73
Intermediate Commerce (I.COM) 73.76% 80.87

**यदि आंकड़ो पर ध्यान दे तो लास्ट इयर कुल 11.55 लाख बच्चों ने 12वी का एग्जाम दिया था जिसमे 7.18 लाख या 62.19%  बच्चे पास हुए थे|

**Patna College of Commerce, Arts and Science के प्रियांशु जैसवाल 81.6 अंको के साथ बने स्टेट टॉपर.

**86.2% अंको के साथ खुशबू कुमारी (Simultala Awasiya Vidyalaya, Jamui) रही साइंस स्ट्रीम की टॉपर तो वही समस्तीपुर के RNSJN उत्क्रमित मध्य विद्यालय के गणेश कुमार 82.6% अंको के साथ बने आर्ट्स स्ट्रीम के सितारे, हालाँकि उम्र गलत बताने के आरोप में गणेश कुमार का रिजल्ट बोर्ड ने कैंसिल कर दिया है.

आखिर क्या वजह रही होगीं..?

Bihar Education Department के प्रमुख सचिव RK Mahajan ने रिजल्ट की घोषणा करते वक़्त यह कहा कि Lower Success Rate की वजह एग्जाम के दौरान बरती गयी सख्त दिशा निर्देश थी| यहाँ बताते चले कि एग्जाम के दौरान चीटिंग करने की बातोँ से पूरी दुनिया में हुयी फजीहत से सबक लेते हुए नीतीश सरकार ने इस साल कदाचार मुक्त परीक्षा के आयोजन हेतु सख्त कदम उठाने का फैसला लिया था| हालाँकि, एग्जाम सेंटर के बाहर CCTV से निगरानी, Bar-Code वाली Answer-sheet एवं कदाचार के ऊपर बनाये गए सख्त दिशानिर्देश से एग्जाम कदाचार मुक्त तो हो गया परन्तु कही न कही खोखली हो गयी हमारे शिक्षण पद्धिति की एक झलक भी हमें दिखा गया|

Cheating in Bihar Board Exam
फाइल फ़ोटो: परीक्षा हॉल तक चीट पहुंचाते अभिभावक

भाई ऐसे टफ एग्जाम में सफलता के झंडे गाड़ने वाले प्रतिभागियों एवं स्टेट टॉपरो को पुरुस्कृत करना तो बनता ही है|अब जरा सिक्के के दुसरे पहलु को देखते हुए उन छात्रों की भी बात कर लेते हैं जिनकी “तैयारियों” में शायद कुछ कमी रह गयी| आंकड़ो की माने तो लगभग 8 लाख बच्चों की भविष्य की नैया अब कुछ दिनों के लिए अधर में लटकी रह सकती है| मगर यहाँ एक बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर वह क्या वजह रही होगी जिस वजह से आज हमारी शिक्षा व्यवस्था इतनी चरमरा गयी है कि एग्जाम सेंटर में बरती गयी थोड़ी सी सख्ती इतना भयंकर परिणाम दे जाये|

शिक्षा के घटते गुणवत्ता के पीछें छिपा सच

मूलतः बिहार से होने कि वजह से मेरी प्राथमिक शिक्षा बिहार से ही हुई| फिर उच्च शिक्षा हेतु दिल्ली आ गया| यहाँ के स्कूलों की शिक्षण पद्धिति एवं गुणवत्ता को बरकरार रखने हेतु शिक्षा विभाग द्वारा दिखाए गए प्रतिबद्धता को देख मैं काफी प्रभावित था| ख़ुद से यह सवाल पूछता था कि क्या यह सब हमारे बिहार में नहीं हो सकता, जहाँ की शिक्षा पद्धति प्राचीन कालों से ही दुनियाभर में अपनी सुगंध बिखेर रही है. खैर दिल्ली से इंजीनियरिंग कर कुछ समय के लिए मुझे बिहार में एक शिक्षण संसथान से जुड़ने का मौका मिला, वहाँ रह कर मैंने बिहार के प्राइमरी शिक्षा को काफ़ी नज़दीक से देख पाया| अभी फ़िलहाल कुछ सालों से दिल्ली के एक सरकारी शिक्षण संसथान में शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ|

बिहार के मधेपुरा स्थित समिधा ग्रुप कैम्पस में इ-मूल्यांकन करते शिक्षक
बिहार के मधेपुरा स्थित समिधा ग्रुप कैम्पस में इ-मूल्यांकन करते शिक्षक

देश की राजधानी और मेरे बिहार के शिक्षण पद्धिति को काफी करीब से देखने के बाद मैंने पाया है कि अच्छी शिक्षा किसी एक अच्छे शिक्षक अथवा समर्पित छात्र की बात नहीं है| शिक्षा के स्तर में सुधर कई पहलुओं पर निर्भर करता है| आइये डालते है एक नजर उन 3 अहम् वजहों पर जिसे सुधारे बिना हम कभी अपने खोये अतीत को नहीं पा सकते|

संसाधनों में कमी

कहते है कि एक ऊँची ईमारत की जान उसके नीवं में होती है| प्राथमिक स्तर पर एक बेहतर शिक्षा व्यवस्था का वादा करती प्राथमिक विद्यालयों की खस्ता हालत देख दिल रो बैठता है| कही-कही तो हालत इतनी ख़राब हो गयी है कि विद्यालय प्रांगन किसी भुतहा खंडहर से कम नहीं लगती| ऐसे में ज्यादातर बच्चे वहाँ शिक्षा हेतु नहीं बल्कि मिड डे माल का आननद लेने आतेजातें हैं| न तो बैठने को बेंच और न ही कोई अन्य सुविधाए|अब जरा सोचिये मुलभुत जरूरतों एवं एक ठोस बुनियाद से नदारद यह बच्चे जब 12वी अथवा 10वी के एग्जाम में बैठेंगे तो उनका सफल हो पाना किस हद तक मुमकिन रह पायेगा|

Bihar primary school
बैठने को बेंच नहीं, फिर भी हमें पढना हैं|

शिक्षको की गुणवत्ता में आयी गिरावट

बचपन से हम सुनते आये हैं कि बिन गुरु ज्ञान कहा मिलता है|परन्तु गुरु ही अज्ञानी हो तो हम ज्ञान कि बातें कैसे कर सकते हैं| मैं यह नहीं कहता कि बिहार में प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में शिक्षको की नियुक्ति की प्रकिया गलत है या, थी (यह एक शोध का विषय है)| इसके नतीजे काफी घातक सिद्ध हो सकते हैं| अक्सर मीडिया में आती विभिन्न प्रकार की खबरों से बिहार के शिक्षको कि गुणवत्ता का मज़ाक उड़ाते कोई न कोई न्यूज़ देखने को मिल ही जाता है| जब शिक्षा की बागडोर ऐसे कर्णवीरों के हाथों में हो तो भविष्य के बारे में चिंता करना लाज़मी है|

कुछ दिन पहले सोशल मीडिया में वायरल हुए इस विडियो को देखें:

यहाँ यह भी जानना जरुरी है कि आज भी मैंने कुछ ऐसे शिक्षक देखे हैं जिन्होंने अपनी गुरु ज्ञान से सैकड़ो बच्चो के डूबती नैया को पार लगाया है परन्तु उनकी संख्या काफी कम है|

उचित मार्गदर्शन का अभाव

गाँव में रहने के वजह से लोगो से जुड़ उनके सुख-दुःख का सहभागी बनाने का मौका मिला| एक अच्छे नागरिक एवं शिक्षक के तरह मेरी यह हमेशा कोशिश रही कि मैं अपने आने वाली पीढ़ी  को उचित मार्गदर्शन दे सकू| गाँव में उचित मार्गदर्शन एवं उच्च शिक्षा के अभाव में बच्चे अपने आने वाले कल के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हो पाते|

ऐसे में पास होकर आगे अपने कैरियर को बनाने का सबसे आसान तरीका रह  जाता है परीक्षा में चीटिंग का सहारा लेना या फिर किसी गलत माध्यम से पास होने लायक नंबर जुटाना. हम-आप में से लगभग सभी ने बोर्ड के एग्जाम दिए हैं, मैं भले यहाँ परीक्षा में नैतिकता की बातें कर रहा हूँ लेकिन उन बच्चों के बारे में सोचिये जिन्होंने साल भर इस उम्मीद में समय बिताया है कि एग्जाम में कुछ ना कुछ जुगाड़ तो हो ही जाएगा|

मैंने ऐसे ढेरों बच्चें देखे हैं जिनके काबिलियत की तलवार में सिर्फ इस लिए जंग लग जाती है क्योंकि उन्हें सही हाथों का सहारा नहीं मिल पाता|खैर नतीजा चाहे जो भी हो एक बात तो तय है कि यदि ऐसा ही चलता रहा तो हम जैसे हजारो बिहारियों को हर साल उच्च शिक्षा हेतु बाहर निकलना ही पड़ेगा|

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस लेख में प्रकट किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति ट्रेंडिंगऑवर उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार ट्रेंडिंगऑवर के नहीं हैं, तथा ट्रेंडिंगऑवर उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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