विचार : नारी शक्ति वरदान या अभिशाप

 

संसार बनाने वाली वो
घर द्वार सजाने वाली वो

दुःख का सागर भी गर्भ लिए
ममता की छाव लुटाती वो|

वास्तव में सम्पूर्ण सृष्टी की जननी नारी, जिसमें परमात्मा को भी जन्म देने की सामर्थ होती हो जिसके रग-रग में धरती का धेर्य, आकाश की उचाई, सागर की गहराई, नदी की मंगल कामना तथा अदभुत मन्तव विधमान होता है|

किन्तु एक-एक टिस, एक टूट सी उठती है जब उसे शारीरिक तथा कभी मानसिक रूप से उत्पीड़न कर पितृसत्तात्मक समाज अपनी अहमन्यता को सिद्ध कर स्थापित करना चाहता है| पुरुष प्रधान समाज ने हमेशा नारी को हाशिए पर रखा है, स्त्री चाहे स्वर्ण हो या दलित उसके सुख: दुःख की चिंता कभी किसी ने नहीं की वर्तमान समय में नारी की अस्मिता को व्यवस्था ने हासिए पर पहुँचा दिया है| इस व्यवस्था का कोई अंग नहीं है जो स्त्रियों के साथ घिनौने कृत्य के लिए उत्तरदायी न हो – सेक्स स्कैंडल में जज समूह, मधुमिता और नैना साह्नी केस में मंत्री और विधायक, दिल्ली में दामिनी बलात्कार या फिर हरियाणा में जाट आरक्षण के दौरान मुर्थल में बलात्कार आदि इसके उदाहरण हैं|

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नारी बेचारी तुम ही मुंसिफ हो, तुम ही कातिल हो, कहाँ जाए क्या करें, किससे कहे आज तो दिन प्रतिदिन जाने कितनी मधुमिताए, नैना साहनी, दामिनी इत्यादि पुरुषोंके हवस का शिकार हो रही है|

अब देख विधाता नारी को, क्यों चुप बैठा अनजान बना

क्यों लूट गया ईशा उसको, जब तू था पहरेदार बना|

सिनेमा जगत भी नारी को भोग्य के रूप में ही प्रस्तुत करती है | आज नारियों की समाज में कोई मानवीय हैसियत ही नहीं है| वह स्वयं को असुरक्षित महसूस करती है| नारी की स्थिति अत्यन्तं सोचनीय है|

आज अपने को सभ्य कहने वाला समाज में बच्चियों और महिलाओं के साथ बलात्कार, यौन उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, दहेज़ की बलि, देह व्यापार आदि घटनाये आय दिन होती जा रही है| महिलाओं के विरुध्द होने वालें इन सारे उपराधों से पता चलता है की देश में हर घंटे महिलाओ को जघन्य दुष्कर्म झेलने को मजबूर होती है| हर रोज देश में 40 से ज्यादा महिलाएं यौन उत्पीड़न, बलात्कार, छेड़छाड़ के मामलें दर्ज होते हैं|

आज जिन गलियों, सड़कों पर गाय, भैस, बकरियाँ निर्भीक एवं स्वच्छ रूप से विचरण कर सकतें हैं| वहाँ अकेली नारी का भयमुक्त चल सकना इतना मुश्किल क्यों हैं ? वर्तमान समाज में नारी पुरुष के लिए मात्र भोग्य ही बन गयी है|

नारी के त्याग तपस्या का इस जग में कोई हिसाब नहीं उसके असंख्य उपकारों का धरती पर कोई जवाब नहीं आजीवन ही जगजीवन को ममता का कवच सौपती जो उस परमपूज्य नारी मन का सृष्टी में कोई मिसाल नहीं|

 

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Tags : Nari Sakti Vardan ya Abhisap,

Jasvir Shakya

Jasvir Shakya is a PGT (Economics) in a Government School Delhi and loves to write on social and economical issues.

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