ब्लॉग: जल ही जीवन हैं, इत्ती सी बात हमें समझ क्यूँ नहीं आती

आज जनसंख्या में भाड़ी वृधि एवं जल संसाधनों के अत्यधिक उपयोग के वजह से भारत भी अन्य मुल्कों के तरह धीरे-धीरे सूखे की ओर बढती जा रही हैं| अभी हाल में महाराष्ट्र के लातूर में जन्मे जल संकट, जल प्रबंधन की हमारी दुर्व्यवस्था को साफ़ उजागर करती हैं|आज जहाँ एक ओर हमारे नागरिक पीने लायक साफ़ पानी के वजह से घूंट-घूंट कर दम तोड़ रहे हैं तो वही दुसरे ओर किसान सूखे के चपेट के वजह से आत्म-हत्या कर रहे हैं| मगर यहाँ ध्यान देने लायक बात यह है कि सूखा अचानक नहीं पड़ता, यह भूकंप या किसी अन्य प्राकृतिक विपदाओं के तरह अचानक घटित न होकर धीरे-धीरे विनाश की ओर आगे बढ़ता है।

बड़ा ताज्जुब होता है कि आजादी के इतने वर्षो बाद जहाँ एक ओर हमारे देश ने विज्ञान एवं तकनीक में काफी प्रगति कर ली है तो वही दुसरे ओर जल प्रबंधन के प्रति जागरूकता में कमी के वजह से धीरे-धीरे हम अपने इस अनमोल खजाने का पिटारा खाली करते जा रहे हैं| आज हम मंगल ग्रह पर जल की खोज में लगे हुए है, लेकिन धरती में मौजूद अपने जलाशयों की हमें थोड़ी सी भी फिकर नहीं|इससे पहले की हम जल संकट एवं उसके समाधान के बारे में विस्तार से बात करे, आइये नजर डालते हैं देश-दुनिया के उन 4 तस्वीरों पर जो हमे हमारे भविष्य के प्रति आगाह जरुर करेगी|

जल संकट को उजागर करती तस्वीरें

(1) आज हमारे पास कृतिम रूप से जितने भी जल संसाधनों के स्रोत थे वे एक-एक कर सूखते ही जा रहे हैं|

घटते कुएं एवं अन्य जल संसाधन
सूखते कुएं एवं अन्य जल संसाधन

(2) प्राकृतिक संसाधनों जैसे की नदियों एवं बारिश के अभाव के वजह से पहली ही राजस्थान एवं गुजरात के कुछ भाग जल संकट के समस्या से जूझ रही हैं| वहाँ के औरतों की सबसे बड़ी सिरदर्द पीने लायक पानी का जुगाड़ करना ही हैं|

राजस्थान का हाल बेहाल
राजस्थान का हाल बेहाल

(3) देश के आर्थिक राजधानी मुंबई सहित देश के तमाम छोटे-बड़े नगरों में हो रही जनसँख्या वृधि के वजह से आज आलम यहाँ तक पहुँच गईं हैं कि लोगो को मजबूरन गंदे पानी को भी पीना पड़ रहा हैं|

महानगरों में पानी की किल्लत
महानगरों में पानी की किल्लत

(4) अगर आप सोच रहे होंगे कि केवल भारत में ही जल संकट एवं साफ़ पानी पीने की व्यवस्था सुचारू रूप से काम नहीं कर पा रही हैं तो जरा अफ्रीका के इस बच्चे को पानी पिते देख लीजिये| अफ्रीका के कुछ देशों में तो हालत इतने बदतर है कि लोग पानी के लिए खून बहाने पर भी नहीं झिझकते| आखिर मरता क्या नहीं करता|

अफ्रीका में जल संकट
अफ्रीका में जल संकट

जरा इन आकंड़ो पर भी दे ध्यान

यहाँ बताते चले कि हमारे धरती  के क्षेत्रफल का लगभग 70 प्रतिशत भाग जल से भरा हुआ है, परंतु पीने योग्य जल मात्र 3 प्रतिशत है, शेष भाग समुन्द्र का खाड़ा जल है जो पीने के योग्य नहीं। आकंड़ो की बात करे तो प्रति व्यक्ति मीठे जल की उपलब्धि जो सन् 1994 में 6000 घन मीटर थी वह घटकर सन् 2025 तक मात्र 1600 घन मीटर हो जाने का अनुमान है। अब जरा सेंट्रल वाटर कमीशन द्वारा वर्ष 1999 में दिए गए इस रिपोर्ट की ओर एक नजर डालिए.

विभिन्न वर्षों एवं विभिन्न क्षेत्रों में भारत में जल की माँग (बिलियन क्यूबिक मीटर)

क्षेत्र

वर्ष

2000

2025

2050

घरेलू उपयोग

42

73

102

सिंचाई

541

910

1072

उद्योग

08

22

63

ऊर्जा

02

15

130

अन्य

41

72

80

कुल

634

1092

1447

स्रोतः सेंट्रल वाटर कमीशन बेसिन प्लानिंग डारेक्टोरेट, भारत सरकार 1999

लगभग 17 वर्ष पहले जारी इस रिपोर्ट के अनुसार 2050 तक हमारी जरुरत लगभग 1500 बिलियन क्यूबिक मीटर तक पहुँच जाएगी परन्तु संसाधनों के घटते स्रोत एवं बढ़ते जनसँख्या के अनुसार क्या तब तक बहुत देर नहीं हो जाएगी|यहाँ लोगो का यह मनाना है कि बरसात में कमी के वजह से हमारे संसाधनों में कमी हो रही है| परन्तु ऐसे लोगो को एक बार इजराइल जैसे देशों से जरुर सीखना चाहिए| औसत होने वाले बारिश के दृष्टिकोण से देखा जाये तो वहाँ भारत से भी कम वर्षा होती हैं पर वहाँ  के लोग इस अनमोल खजाने की बूँद-बूँद तक सहेज कर रखते हैं जबकि भारत में हम मात्र सेविंग करने के लिए ही न जाने कितना जल यूँही बहा देते हैं|

जल संकट को कैसे रोका जाए

  • जल-संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है| हमारे समाज में हर व्यक्ति को बचपन से ही स्कूलों में इसके महत्व एवं संरक्षण का पाठ पढाया जाना चाहिए।
  • जल संरक्षण जैसे कार्य को सामाजिक संस्कारों से जोड़ कर देखा जाना चाहिए तथा हर नागरिक को इसके महत्व के प्रति विशेष ध्यानाकर्षण करने पर जोर दिया जाना चाहिए|
  • हर घर में बरसात के जल को संरक्षित करने के लिए अलग से रेन वाटर हार्वेस्टर के उपयोग पर जोर देना चाहियें|
  • कोई फैक्ट्री अथवा कारखाना अत्यधिक रूप से जल का दोलन न कर पाए इसके लिए बने कानून का समुचित ढंग से नियंत्रण होना चाहिए|
  • तालाबों एवं अन्य जल संसाधनों पर सामूहिक अधिकार को बढ़ावा देने वाले कार्यों को प्रोत्साहन देना चाहिए| ताकि हर जाती-धरम के लोग अपने भेद भाव से ऊपर उठ इन प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर सके|
  • कल-कारखानों एवं शहरों से निकलने वाले नालो को नदी में गन्दगी फेंकने से पहले उनपर एक चेक डैम लगाना चाहिए ताकि नदी का जल प्रदूषित न हो पाए|

यदि हम लोगो ने अपने सामजिक कर्तव्यों में से एक जल-संरक्षण के महत्व को सही तरह से समझ इसपर काम करने की शुरुवात नहीं की तो सही मायने में वो दिन भी दूर नहीं जब एक देश दुसरे देशों से तेल के लिए नहीं बल्कि पानी के लिए लड़ेंगे|

 

Rakesh Mandal

सीनियर एडिटर ट्रेंडिंगऑवरडॉटकॉम |

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