पाकिस्तान के जिहादी सोच की जड़

भारतीय सुरक्षा बलों और प्रबुद्ध वर्ग के बीच अक्सर यह चर्चा होती रहती है कि आखिर वह क्या चीज है जिस वजेह से पाकिस्तानी युवा जिहादी बनने को प्रेरित रहते हैं|

मूलतः इसका जबाव पाकिस्तान की शिक्षा व्यवस्था में हैं, अमेरिकी सरकार की एक रिपोर्ट की माने तो पाकिस्तान की स्कूली पुस्तकें हिन्दुओं एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति पूर्वाग्रह और अस्हिनुस्ता को बढ़ाबा देती है जबकि अधिकतर शिक्षक गैर मुस्लिमों को दुश्मन के तौर पर देखतें हैं|

इसके लिए अमेरिकी संस्था ने पाकिस्तान के 4 प्रदेशों में पहली से 10वीं कक्षा तक की 100 से ज्यादा पुस्तकें देखी गयी और वहां के शिक्षकों-विद्यार्थियों से बातचीत की| अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वत्रंता पर अमेरिकी आयोग के अध्यक्ष लियोनार्ड लियो का कहना है की “गलत शिक्षा इस आशंका को बताती है कि पाकिस्तान में हिंसक घटना, धार्मिक आतिवाद बढ़ना और धार्मिक स्वतंत्रता कमजोर होना जारी रहेगा|”

न्यू रिसर्च सेण्टर रना के एक अध्ययन में पाया गया है की पाकिस्तान दुनिया में तीसरा असहिष्णु देश है, भारत पाकिस्तान का सबसे नजदीकी बहुसंख्यक देश है और वह अनंतकाल तक इससे प्रभावित बना रहेगा|

हिन्दू विरोधी पूर्वाग्रहों के साथ भारत विरोधी भावनाएं पाकिस्तान में अपने जन्म के वक्त से ही रही हैं|जनरल जिया उल हक़ के शासन के दौरान पाठ्य पुस्तकों समेत देश के इस्लामीकरण का कार्य शुरू हुआ| 1979 में बदलाव की गयी शिक्षा नीति में कहा गया कि इस्लामी विचार के इद्र गिद्र पूरी सामिग्री को समेकित करने की बात ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम में सुधार और शिक्षा को साहित्यिक रूप देना जरुरी है ताकि युवा वर्ग की सोच में इस्लामी आदर्श घुल मिल जाए|

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पाकिस्तान के सभी सरकारी स्कूल में उपयोग की जाने वाली पाठ्य पुस्तक के प्रकाशनों में जिहाद, गैर मुस्लिम की तुच्छता, पाकिस्तान के साथ भारत की कथित शत्रुतापूर्ण जैसे विचार धार्मिक सोच को बढ़ावा देतें हैं|

पाकिस्तानी स्कूलों की सरकारी पाठ्य पुस्तके मेरे द्वारा लिखे तथ्य को काफी हद तक समझने में सहायता करेगी|

 

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Jasvir Shakya

Jasvir Shakya is a PGT (Economics) in a Government School Delhi and loves to write on social and economical issues.

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