गौरेया की चहचहाट को गुम ना होने दें

 

कल तक चहचाहती थी ये गौरेया…

आज आंगन जरा सूना-सूना है…

ये पक्तियां कभी आपकी जबान पर भी ना आ जाये इसलिए जरुरी है कि हमें सतर्क हो जाना चाहिए। जी हाँ…कल तक जो गौरेया हमारे आंगन, बालकनी, छज्जे और छत पर फुदकती फिरती थी वो आजकल जरा उदास है और उसकी संख्या में लगातार कमी होती जा रही है। क्या आपको पता है क्यों गौरेया हो रही है कम…अगर नहीं तो आइये जानते हैं |

क्यों घट रही है गौरेया की संख्या-

  • पेड़ों की घटती संख्या के कारण ! क्योंकि अब वो घोसलें नहीं बना पा रही है और ना हीं अपने बच्चे पाल पा रही है ।
  • नदियाँ और झरने सूख रहे हैं उन्हें पीने का पानी नहीं मिल रहा है।
  • घरों को इस कदर बंद कर दिया गया चारों तरफ से कि उन्हें अपने घोंसले बनाने के लिए उपयुक्त जगह नही मिल रहीं है।
  • दिन-प्रतिदिन बढ़ते टावरों की सख्यां और तारों की संख्या |

कैस बचा सकते हैं हम गौरेया को-

  • अपने घरों की छतों पर किसी बर्तन में पानी भर कर रख दें। और रोज इस बर्तन का पानी बदलें क्योंकि गौरेया साफ और ताजा पानी ही पीती हैं।
  • अनाज के कुछ दाने रोज छत पर डालें। अगर अनाज नहीं है तो आप रोटी या चावल भी डाल सकते हैं।
  • उनके लिए थोड़ी सी छांव की व्यवस्था भी कर सकते हैं।
  • घर की खिड़कियों को खुला रखें उनके पास से एसी और कूलर हटा कर थोड़ी सी जगह बना सकते हैं।
  • ज्यादा से ज्यादा पेड़ पौधे लगायें पार्क में, घरों में, छतों पर और सड़क किनारें। गौरेया पेड़ों पर रहना ज्यादा पसंद करती है और उन्हें वातावरण उपलब्ध कराना ज्यादा जरुरी है।
  • गौरेया के लिए कृत्रिम घर बनाकर और इन्हें किसी भी बेकार पड़ी चीजों से जैसे खराब पड़े प्लास्टिक गमले और खाली पड़े बाक्स से इनके लिए घर तैयार किये जा सकते हैं।
  • गौरेया के बारें में और इनकी कम होती संख्या के बारें में ज्यादा से ज्यादा जागरुकता फैलाकर।

क्यों बचाना जरुरी है गौरेया को-

  • गौरेया की चहचहाट से सारा वातावरण जीवंत हो उठता है। सुबह और बारिश का मौसम गौरेया की चहचहाट से और ज्यादा खुशनुमा हो जाता है।
  • हमे इसे लुप्त कैसे होने दे सकते हैं क्या हम कल को अपनी पीढ़ी को गौरेया के बारे में बतायेंगे कि कभी ये मासूम पक्षी हमारी छतों और आंगनों में फुदकता था।
  • पृथ्वी पर जीवन को बचाये रखना मनुष्य की प्रथम जिम्मेदारी है क्योंकि हम ही सबसे ज्यादा समझदार हैं। यहीं नहीं वातावरण में संतुलन बनाये रखने के लिए ये जरुरी है कि पर्यावरण को हर पहलु को बचाये रखने की कोशिश करें।
  • अगर हमारी आने वाली पीढ़ी के दिल में संवेदना को जगायें रखना है तो जरुरी है कि पशु-पक्षीयों और मनुष्यों के बीच प्यार भरा रिश्ता कायम करना होगा। गौरेया को बचायें और अपने बच्चों को भी ये शिक्षा दें कि इन्हें नियमित तौर पर इन्हें पानी और अनाज दें। ऐसा करने से बच्चों के कोमल मन में पक्षीयों के प्रति प्रेम भावना उत्पन्न होती है। वे अधिक संवेदनशील बनते हैं जो कि मानवजाति के लिए भी जरुरी है।

Nandini Singh

नंदिनी सिंह ट्रेंडिंगऑवर में एडिटोरियल प्रड्यूसर हैं|