मुद्दा : रेलवे में हो रही है खुले आम डीजल की चोरी कौन है ज़िम्मेवार

Diesel Theft in NJP Railway Station: न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन, स्टेशन कोड NJP|  भौगोलिक दृष्टिकोण से पूर्वोत्तर भारत का एक अहम् रेलवे जंक्शन जहा से रोजाना उत्तर बंगाल एवं सिक्किम के हजारो यात्री अपने-अपने गंतव्यों के लिए प्रस्थान करते हैं| दिन भर लाखो यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुँचाती NJP का इतिहास काफी पुराना है एवं समय के साथ-साथ कुछ मुलभुत बदलावों के फलस्वरूप, आज यह जंक्शन भारत के टॉप 100 बुकिंग रेलवे स्टेशन में शुमार हो पाया है| परन्तु आज हम आपको इस जंक्शन के एक अलग रूप से रूबरू कराने जा रहे है| मामला है रेलवे के सम्पति की खुले आम चोरी का| इससे पहले की मैं आगे कुछ बोलू , आइये जरा इस तस्वीर को ध्यान से देखते हैं|

diesel theft in njp railway station
diesel theft in njp railway station

इस तस्वीर में आपको रेलवे इंजन के साथ कुछ आदमी दिख रहे होंगे| जो इन्सान आपको ड्रेस में दिख रहा हैं दरअसल वो रेलवे का एक स्टाफ है जिसका कार्य डीजल इंजन में डीजल भरना होता हैं| NJP स्टेशन में इंजन के रखरखाव से लेकर सफ़र से पहले इंजन में डीजल भरने हेतु भी विशेष सुविधाए दी गयी है| अब जरा इस तस्वीर को एक बार फिर ध्यान से देखिये, उस कर्मचारी के साथ एक महिला एवं एक बच्चे की भूमिका थोड़ा संदेहजनक नहीं लग रही..?

दरअसल उनके हाथ में और कुछ नहीं बल्कि डीजल है| जी हाँ वो डीजल जो रेलवे अपने विशेष अधिकारी के देख-रेख में इंजन में डालने के लिए उपयोग करती है उसे यूँही कोई कर्मचारी मात्र कुछ पैसे के लोभ में आखिर भला क्यूँ बेच रहा हैं..? अब जरा इस तस्वीर पर नजर डालिए|

diesel theft in njp railway station
diesel theft in njp railway station

ये मामला है डीजल चोरी का| आइये अब आपको पुरे घटना क्रम के बारे में बताते हैं| NJP स्टेशन से बाहर निकलने पर किसी से भी पूछ लीजिये कि भैया पेट्रोल पंप से सस्ती डीजल कहा मिलती हैं…? अगर वहां के लोकल गाड़ी चालक वालो ने चाहा तो आपको ये पूरा खेल समझ आ जायेगा| दरअसल डीजल इंजन में एक बार में कई हजार लीटर डीजल की आवश्यकता होती है एवं उनमे डीजल भरने के लिए NJP स्टेशन में इंडियन आयल की एक विशिष्ट पॉइंट बनायीं गयी है जिससे की गाड़ियों में तेल भरा जाता हैं| मगर यहाँ अहम् सवाल ये उठता है कि यदि 30/ 40 हजार लीटर डीजल में से 100/200 लीटर डीजल किसी को बाजार से कम कीमत पर दे भी दिया जाये तो किसी को क्या पता चलेगा|

हालाँकि रेलवे के इतने बड़ी सम्पति के रख-रखाव के लिए RPF की एक विशेष टुकड़ी होती है जिनका कार्य रेलवे के सम्पति की सुरक्षा करना होता है, मगर ताज्जुब होता है कि दिन के उजाले में भला कोई कर्मचारी इतनी बड़ी दुस्साहस कैसे कर सकता हैं| बाजार से काफी कम कीमत पर या तो रात के सन्नाटे में या फिर तडके सुबह रेलवे के डीजल को इन लोकल दुकानदारो को बेच दिया जाता है और इसका लाभ आपस में बाँट लिया जाता हैं| फिर वहां से ये तेल बिकने के लिए लोकल दुकानों में चली जाती हैं| अधिकृत पंप में यदि 60 रूपए के दर से डीजल की बिक्री हो रही हो तो इन डीजल को मात्र 40/45  रूपए के दर से ही लोकल ऑटो चालकों को बेच दिया जाता हैं| और इस तरह यह गोरखधंधा चलता रहता हैं|

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जरा सोचिये हर दिन यदि 100 लीटर डीजल को भी बेचा जाये तो यह आंकड़ा एक महीने में 3000 लीटर का पहुँच जाता है जिसकी अनुमानित कीमत 2 लाख तक की होती हैं| हजारो लीटर के खेल में 100 लीटर की चोरी पकड़ी भी नहीं जाती और चुपके ही सही सबकी जेबे भी गरम होती रहती हैं| हमारे टीम ने जब लोकल लोगो से इस बात की सच्चाई जाननी चाही तो सबने एक सुर में यही कहा कि इस गोरखधंधे में सभी की मिलीभगत है| क्या कर्मचारी, क्या ऑफिसर और क्या RPF|

हमसे रेलवे हमेसा यह अनुरोध करती है कि “रेलवे आपकी सम्पति है” और इसे सुचारू ढंग से चलाने हेतु हम आम जनता के ऊपर भी काफी कुछ निर्भर करता हैं|मगर जब रेलवे के रक्षक ही ऐसा करे तो फरियाद किससे करे…? जानकारों की माने तो यह कार्य केवल NJP जंक्शन में ही नहीं बल्कि देश के तमाम छोटे-बड़े स्टेशन में होती है और फिर आम जनता को इससे लेना देना भी क्या जो इसके खिलाफ आवाज़ उठाये| हमे तो सस्ते में डीजल मिल जाता है अपने गाड़ियों के लिए| हमारे लिए इससे बड़ी बात और क्या होगी| मगर अब वक़्त आ गया है कि सरकार को अपने अधीन हो रहे इस गोरखधंधे के ऊपर से पर्दा उठाना ही परेगा| हमारा परिवार रेलवे से हो रही इस चुक की वजह जानना चाहता हैं कि आखिर क्यूँ इतने बड़े नेटवर्क को सुचारू ढंग से चला पाने के बावजूद भी मात्र कुछ लोगो के वजह से उन्हें बार बार शर्मशार होना पर रहा हैं|

Tredinghour

THNN (Trendinghour News Network).

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