ब्लॉग : तो क्या ये कांग्रेस का अंत है

The Grand Old Party के नाम से मसहुर कांग्रेस कभी भारतीय राजनीती की धुरी समझी जाती थी | बात चाहे वर्ल्ड क्लास लीडर्स की हो या फिर आर्थिक/सामाजिक नीतियों से भारत के विकास की परिभाषा गढ़ने वाली सोच की, एक वक़्त था जब विरोधी दल कांग्रेस के समक्ष अपना वजूद तलाशने में लगी रहती थी | मगर कहते है ना की वक़्त बदलते वक़्त नहीं लगता |

ताज्जुब होता है कि कभी गाँधी, पटेल एवं शास्त्री जैसी सोच से सिंचित होने वाली कांग्रेस आज अपने ही वजूद को ढूंढने की पुरजोर कोशिश कर रही है | एक-एक कर राज्यों में सिमटती राजनीती एवं आतंरिक कलह की वजह से कांग्रेस ख़त्म होने के कगार पर आ खड़ी है | आलम यह है की आज कांग्रेस एवं उनके आला-कमान खुद एक मजाक बनकर रह गए हैं तो क्या इसे कांग्रेस का अंत मान लेना सही होगा या फिर कांग्रेस एक बार फिर अपने सुनहरे अतीत को दोहरायेगी…खैर अभी वो दिन काफी दूर दिखाई देता है | आइये डालते है नजर कुछ महत्वपूर्ण कारणों पर जो कांग्रेस के अंत की सबसे बड़ी वजह बन सकती है :

मूल उद्देश्य से भटकती राजनीती: कभी भारतीय आजादी का चेहरा रही कांग्रेस आज अपने ही आदर्शो से भटकती हुई मालूम होती है…पूंजीवाद के अंत हेतु स्थापित कांग्रेस आज परिवारवाद के साये तक ही सिमट कर रह गयी है | बेहतर राजनीती हेतु युवा टैलेंट को मौका देने मे कांग्रेस कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखा रही |

गलतियों से कोई सीख नहीं: कहते हैं कि यदि सुबह का भुला शाम को घर आ जाये तो उसे भुला नहीं कहते | परन्तु आज अपनी हार से सीख लेने जैसे कुछ बेहतर राजनितिक प्रयासों के अभाव ने कांग्रेस को भीतर से खोखला बना दिया है | पार्टी के राजनेताओ के बीच आतंरिक कलह इस बात पर इशारा करती है की पार्टी में सुधार की जरुरत है |

भ्रष्टाचार का पर्याय बनी मानसिकता: भ्रष्टाचार शायद कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी साबित हुई है | 2G स्कैम, कोयला घोटाला, आनंद सोसाइटी स्कैम एवं हाल ही में VVIP AUGUSTA स्कैम ने तो मानो राजनितिक पटल पर भूचाल ला दिया | आज कांग्रेस का नाम सुनते ही लोगो के मन में निराशा का घर करने की सबसे बड़ी वजह शायद यही है |

किसी मजबूत लीडरशीप का अभाव: अपने सुना होगा की लोहा को केवल लोहा ही काट सकता है | आज विपक्ष में जहाँ भाजपा के पास नरेन्द्र दामोदरदास मोदी के रूप में एक मजबूत लीडरशिप है तो वही कांग्रेस आज एक मजबूत लीडरशिप के अभाव से जूझ रही है | अभी हाल ही में संपन्न हुए असम विधानसभा चुनाव मे हारने के बाद भी अब तक कांग्रेस में किसी मजबूत लीडर के उदय की कोई संभावना देखने को नहीं मिली है |

युवाओं के बीच घटती लोकप्रियता: आज सोशल मीडिया में कांग्रेस की अच्छी खासी दिलचस्पी नहीं देखी जा रही | आप माने या ना माने परन्तु सोशल मीडिया ने ही मोदी एवं भाजपा को अन्य राजनितिक पार्टियों से अलग लाकर खड़ा दिया है | आज जिस तरह राहुल गाँधी एवं कांग्रेस विरोधी नारे सोशल साइट्स पर ट्रेंड कर रहे हैं | निश्चित तौर पर इससे युवाओं के बीच कांग्रेस के प्रति लोकप्रियता में कमी आएगी |

सदनों में घटती सदस्यता: सरकार यदि पूर्ण बहुमत की ओर अग्रसर होने लगे तो निश्चित रूप से विपक्ष के पास वापसी का कोई मौका नहीं रह जाता | आज लोकसभा एवं राज्य सभा के दोनों सदनों में सदस्यता की कमी झेल रही कांग्रेस की हालत उस इंसान जैसी हो गयी है जो बेहतर विकल्प लिए दूर देश कमाने तो निकल जाते हैं परन्तु काबिलियत एवं दृढ संकल्प के अभाव में अपनी जिंदगी के एक मुकाम पर अपने द्वारा लीये गए फैसलों पर अफ़सोस करते हैं |

क्षेत्रीय पार्टियों का विकास: अब गए वो दिन जब राजनीती में केवल कांग्रेस की ही तूती बोलती थी | आज हर राज्य में मजबूत क्षेत्रीय राजनितिक पार्टियों के उदय ने एक बात तो साबित कर दी है की कांग्रेस को सरकार बनाने हेतु गठजोड़ में काफी मसक्कत करनी पड़ेगी | JDU, TMC, AIDMK, AAP, BJD इत्यादि जैसी मजबूत पार्टियों के उदय ने काफी हद तक पूर्ण बहुमत की कांग्रेस के सपने को झकझोर कर रख दिया है |

 

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Photo : Indian Express

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