हाय..! ! ! बिजली गई मायके…किसका फायदा और किसका नुकसान

चिलचिलाती गर्मियां शुरु हो चुकी है और इसके साथ ही शुरु हो चुका है बिजली की लुकाछिपी का खेल। क्या महानगर और क्या गाँव…सभी बिजली देवी से नदारद होने पर गुस्साये हुये हैं लेकिन बिजली देवी कहाँ किसी की सुनती हैं …मन किया तो बल्ब टिमटिमायेंगें नहीं तो हसंती-खेलती कॉलोनियां अंधेरे के गाल में समा जाती हैं। लेकिन आप ऐसा भी ना सोचे की इन्वर्टर से ये समस्या हल हो जायेगी क्योंकि बिजली 1 या 2 घंटे नहीं बल्कि 8-9 घंटों के लिये अपने मायके जाती है…

आजकल बिजली का जाना सिर्फ बिजली का जाना नहीं है | Sir…..यहाँ महानगरों की लाइफलाइन रुक जाती है। पानी के नलों का जमाना गया..हर घर में समर्सेबिल गढ़े हुये हैं लेकिन क्या फायदा ऐसी तकनीक का जो बिजली जाने के बाद मृत साबित हो जाये। तो इसका मतलब बिजली गई तो पानी गया…चलो इससे भी निपट लेगें क्योंकि छतों के ऊपर रखी टंकियों में काफी पानी स्टोर है लेकिन उनका क्या जो घर से बैठकर काम करते हैं । जी हाँ…टेक्नोलॉजी (technology) और लघु घरेलु उघोग ने पैसा कमाने के ढेरों रास्ते तो खोल ही दिये हैं लेकिन ये बिजली करमजली कुछ समझने को ही तैयार नहीं है…बिना लैपटॉप के तो आजकल क्या घर और क्या ऑफिस  दोनों की ही कल्पना नहीं की जा सकती है।

ऑफिस में तो पतिदेव लैपटॉप पर काम करने में लगे हुये हैं तो वहीं श्रीमती जी पति के साथ चैंटिंग और मूवी देखने के लिये लैपटॉप पर चिपटी हुई है…पतिदेव जहां बिजली के ना आने का धन्यवाद करते नहीं थक रहे हैं तो वही श्रीमति जी के अंदर बिजली के आने पर हजारों बोल्ट का करंट दौड रहा है। लेकिन ऐसा नहीं है कि लैपटॉप का बस यही यूज है।  हमारे युवा वर्ग भी कम मेहनती नहीं हैं आजकल हॉलिडे होमवर्क भी इटरनेट बेस्ड आता है लेकिन क्या करें ये कमबख्त बिजली कुछ समझती ही नहीं। इसके अलावा अगर फोन, टेबलेट चार्ज ना हो तो जैस खुजली और भी ज्यादा बढ जाती है।

लेकिन एक सबसे बड़ा फायदा बिजली ना होने का हमारी कॉलोनी में ये हुआ है कि हम सबको एक दूसरे की शक्लें देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। गर्मी से तिलमिलायें लोग कब तक कालकोठरी में पसीने से नहाते रहेंगें और इसीलिये जब बर्दाश्त से बाहर हुआ तो सब मदमस्त हवा लेने के लिये गलियों में निकल आये…और फिर जो महफिल का दौर शुरु हुआ वो किसी पार्टी से कम नहीं था… गली के कोनों कोनों पर मस्ती वाले झुंड बन गये थे …ठहाकों की आवाजें आ रही थी…शांत रहने वाली गली जैसे मनुष्यों की आवाजों से गुंजायमान हो गई थी। मोबाइल, टैबलेट और लैपटाप पर बिजी रहने वाले लोगों को आज खुद ही बातों से फुर्सत नहीं थी।

तो फिर क्या कहें इस बिजली जाने का एडवाटेंज या फिर डिसएडवांटेज….जाहिर है ऐसे दिन कभी-कभी ही आ पाते हैं जब पड़ोसी को पड़ोसी से मिलने का टाइम मिलता है। पर जो भी था मजेदार था…

अगर आपके पास भी कुछ मजेदार जो बिजली के गुल होने से सबंधित हो तो हमारे साथ जरूर शेयर करें…हमें इंतजार रहेगा।

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सभी बिजली देवी से नदारद होने पर गुस्साये हुये हैं लेकिन बिजली देवी कहाँ किसी की सुनती हैं
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Nandini Singh

नंदिनी सिंह ट्रेंडिंगऑवर में एडिटोरियल प्रड्यूसर हैं|

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