वो रात भर जागता है ताकि हम चैन की नींद सो सके..

An Eye Opening Letter on Indian Soldiers:  तारीख 7 नवम्बर 2016, समय सुबह के 3 बजे होंगे लगभग| हाँ 3 ही बजे थे| औरो के लिए अमूमन साल के 365 दिन के तरह यह भी एक आम दिन ही थी मगर हम बिहारी एवं हिंदी भाषी क्षेत्र वालो के लिए इस दिन का अपना अलग ही महत्व था| वजह.. अरे यार छठ पूजा की सुबह| घाट में जाने की तैयारी करते हमारे समाज के अधिकांश लोग शायद उस रात सोते ही नहीं होंगे|भाई सुबह-सुबह पानी में उतरना, नारियल एवं अन्य अर्पित फलों को लूटना और शायद पुरे साल में पहली बार अपने पुरे परिवार एवं बचपन के दोस्तों के साथ खुशीयाँ मनाने का यह वक़्त बार-बार थोड़ी ही न आता है जो हमें नींद आ जाये|

हम तो जगे थे क्योंकि हमारे पास वजह थी मगर उस रात  “Facebook Messenger” में अपने बचपन के एक दोस्त को ऑनलाइन देख मैंने बड़े आश्चर्य से उससे पूछा कि ” भाई इतनी रात को जगा है, नींद नहीं आ रही क्या..?”  उधर से जवाब आया “भाई राजस्थान बॉर्डर में हूँ नाईट ड्यूटी लगी है मेरी”| नाम: निलेश गजमेर “सशस्त्र सीमा बल” में काम करने वाला मेरा बचपन का दोस्त जिसके साथ न जाने हमारे बचपन की कितनी ही यादे जुड़ी है| बात चाहे साथ किसी क्रिकेट मैच खेलने जाने की हो या फिर देर रात ट्यूशन पढ़ लौटते हुए सारे शहर में हल्ला मचाने की| निसंदेह निलेश हमारी ग्रुप की शान था| खुद मै भी उसका बहुत बड़ा फेन हूँ| 12 वी के बाद जब हम दोस्तों ने आगे करियर के लिए अपना-अपना प्लान बनाना शुरू कर दी थी तब निलेश ने हम सब से अलग आर्मी जाने की सोची| वजह उसे भी देश की रक्षा करने थी| खैर आज उस बात के गुजरे हुए लगभग 10 साल हो गए परन्तु देश और हमारी दोस्ती के प्रति उसके जोश में आज भी कोई कमी देखने को नहीं मिलती|

हर रोज हम न्यूज़ में सुनते रहते है कि हमारी सेना ने यह किया हमारी सेना ने वो किया मगर एक राज की बात बताऊ, हम आम नागरिकों को इससे कोई मतलब ही नहीं रहता| हम अपने ही परेशानियों और संघर्ष को लेकर इतना Frustrate रहते है कि क्या जवान और क्या देश| हम अक्सर टीवी-फिल्मों में ये देख्रते और सुनते है कि हमारे जवान कही सीमा पर जागते है इसलिए हम चैन से होली और दिवाली मनाते है| हालाँकि बहुतों को इस में कौन सी बड़ी बात है लगती होगी| मगर जरा सोचिये जिस त्यौहार को मनाने के लिए हम देश-विदेश से किसी भी तरह अपने घर लौटते है उन त्योहारों में यदि कोई बेटा अपने परिवार से दूर कही सीमा में ठण्ड एवं मौत के आगोश में पहरेदारी दे रहा हो तो इसे क्या आप कोई छोटी बात समझेंगे|

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छुट्टी मांगो तो केंसिल हो जाती है| ठण्ड एवं सुखा ऐसा कि कही पानी का ठीक नहीं तो कही भोजन का| जो मिला वो खा लिया और जहा मिला वहां सो गए| आखिर इतना सब कुछ किसके लिए..हमारे देश के रक्षा के लिए ही न..मगर क्या हम उन जवानों को वो सम्मान दे पाते है जिनके वो हक़दार है| हम आज Facebook, Watsapp इत्यादि में सेना एवं वीरों से जुड़ी पोस्ट को Like एवं Share करने में ही अपनी वीरता समझते है परन्तु क्या हम कभी भी अपने बच्चो या परिवार को इस चिलचिलाते हुए ठण्ड में जीवन-मरण के बीच उन्हें सेना में भर्ती के लिए प्रोत्साहित करते है| हालाँकि ये कहानी बस निलेश की ही नहीं है उसके ही तरह हमारे देश के लाखों जवान सीमा पर पहरेदारी करते हुए या तो अपनी पूरी जवानी गुजार देते है या फिर देश के नाम शहीद हो जाते है|

बुरा तो तब लगता है जब राजनितिक फायदों के वजह से राजनेता इस पर भी राजनीती करने से बाज नहीं आते| यह कहानी मेरी एक छोटी सी कोशिश थी निलेश के जरिये देश के उन तमाम वीर सैनिको को सम्मानित करने की जिसके वजह से शायद हम आज सपरिवार बड़े खुशियों से होली दिवाली अथवा छठ जैसा त्यौहार मनाते है| हालाँकि बहुतों को इसमें कौन सी बड़ी बात है जैसा कुछ दिखाए दे सकता है मगर बताते चले कि पुरी रात न सो पाने का मलाल जहाँ एक और हम आम आदमी को गुस्से से भर देता है वही दूसरी और जरा सोचिये कोई ऐसा भी है जो हस्ते-हस्ते हमारे लिए गोलियां भी झेल रहा हैं|

निलेश एवं निलेश जैसे लाखों वीर सैनिकों को हमारा ट्रेंडिंगऑवर परिवार धन्यवाद् देता है| आशा करते है कि हमारी ये छोटी सी कहानी आपको हमारे देश के सच्चे हीरो के प्रति थोडा प्रेरित जरुर करेगी| उन्हें सम्मान दे| उनकी चौड़ी छाती दुश्मनों के गोलियों को तो आसानी से झेल सकती है मगर अपने ही देश के वे लोग जिनके लिए वे अपना सब कुछ न्योछावर करने को तैयार बैठते हैं उनकी बदसुलूकी वो किस हद तक बर्दाश्त कर पाएंगे|

                                               कृपया सैनिको पर होने वाली राजनीति को बंद करे|

                                                                                                                                                         

Rakesh Mandal

सीनियर एडिटर ट्रेंडिंगऑवरडॉटकॉम |

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