राय : एक नेता एक सीट से चुनाव लड़े

एक नेता एक सीट से चुनाव लड़े : भारत में किसी भी तरह का चुनाव हो – लोकसभा, विधानसभा, पंचायती राज्य इत्यादि प्रत्याशी दो या दो से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ सकता है | इसके साधारण से कारण है कि दो सीट में से किसी एक सीट पर तो चुनाव जीत ही जायेगा और संसद या विधानसभा में जनप्रतिनिधि बनकर राजनैतिक लाभ उठा सकेगा | अक्सर हमारे देश के बड़े-बड़े नेता दो सीटों से चुनाव लड़ते रहे हैं|

हालिया चुनावों में इसका सबसे बड़ा उदाहारण है 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी जी का वडोदरा लोकसभा सीट (गुजरात) व वाराणसी (उ.प्र) से तथा उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव जी का मैनपुरी लोकसभा (उ.प्र) व आजमगद लोकसभा (उ.प्र) दो-दो सीटों से चुनाव लड़ना | बहरहाल दोनों नेता भाग्यशाली रहे और अपने दोनों सीटों पर जीत दर्ज की|

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लेकिन कानून यह है कि एक व्यक्ति एक ही सीट से जनप्रतिनिधित्व कर सकता है और दो जीती हुई सीट में से एक सीट खाली करनी पड़ती है | ऐसी खाली हुई सीटों पर चुनाव आयोग द्वारा फिर से उपचुनाव कराये जाते हैं और इन उपचुनाव में सरकारी कर्मचारी की ड्यूटियां लगाई जाती है | जनता को इन्हें वेतन के अतिरिक्त मानदेय दिया जाता है और जनता को एकदिन वोट डालने जाना पड़ता है, कुछ समर्थक तो प्रचार व रैलियों में काफी समय भी बर्बाद करते हैं |

इस तरह दो सीटों से नेताओ द्वारा चुनाव लड़ने से सरकारी धन और समय के अपव्यय के साथ-साथ जनता का काफी समय बर्बाद होता है | अत: भारतीय संविधान में सशोधन करके केवल दो या दो से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की स्वतंत्रता समाप्त करके केवल एक प्रत्याशी को एक ही सीट से लड़ने का नियम हो | चुनावों में यह सुधार राष्ट्हित व जनहित में होगा |

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Vinod Yadav

विनोद जी एक शिक्षक हैं और सामाजिक गतिविधियों में बढ़ चढ़ के हिस्सा लेते हैं | विनोद यादव जी से फेसबुक पर जुड़े |

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